इस नवरात्र मां दुर्गा को प्रसन्न कर आप अपने आने वाले भविष्य के लिए मंगल कामना कर सकते हैं। माना जाता है कि, दुर्गा पूजा (Durga Puja 2026) के पावन मौके पर दिन के समय जितनी पवित्रता बनी रहती है, उतनी ही रात को भी, क्योंकि मां दुर्गा को रात्रि बेहद पसंद है।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर
दुर्गा सप्तशती से जुड़ा खास श्लोक
नवरात्र 2026 पर जो लोग मां ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ नहीं कर सकते हैं, उन्हें हर रात को सोने से पहले मां दुर्गा के एक खास मंत्र का जाप अवश्य करना ही चाहिए।
‘दुर्गा सप्तशती’ ग्रंथ में वर्णित मां के इस पवित्र मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को रोग, दोष, कष्ट, बाधा और जीवन की तमाम उलझनों से मुक्ति मिलती है।
मां दुर्गा का पवित्र श्लोक
माना जाता है कि नवरात्र के दौरान दिन से अधिक रात्रि पूजा, ध्यान और साधना काम करती है, क्योंकि इस दौरान आसपास का वातावरण बेहद शांत होता है और मां दुर्गा की साधना को आसान बनाता है।
जो लोग नवरात्र के दौरान अतिरिक्त पूजा-पाठ में समय नहीं दे पाते हैं या ऑफिस, स्कूल और कॉलेज जाते हैं, तो उन्हें हर रात सोने से पहले मात्र 11 बार मां दुर्गा के इस मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए।
इस श्लोक को आप सोने से पहले कर लेते हैं, मन में वो संकल्प लिए जिसके लिए आप दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, तो माता रानी आपकी इच्छा जरूर पूरा करती है।
श्लोक-सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते
In English-sarvamaṅgalamangalye sive sarvarthasadhike
saraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo stu te
मंत्र का संपूर्ण मतलब
सर्व मंगल मांगल्ये यानी सभी तरह के मंगल (शुभ फल) प्रदान करने वाली, परम मंगलमयी।
शिवे सर्वार्थ साधिके- शिव स्वरूपा जो भगवान शिव की पत्नी हैं। सभी तरह के लक्ष्यों, मनोकामनाओं और पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) को पूरा करने वाली।
नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्तों को ज्ञान, तप, त्याग और संयम की प्रेरणा मिलती है.
मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या और साधना की देवी माना जाता है. नवरात्र के दूसरे दिन भक्त विधि विधान से मां की पूजा करते हैं और उनके मंत्रों का जाप करते हैं.
मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आरती करने से मन को शांति मिलती है और भक्तों को माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. अगर आप भी नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कर रहे हैं, तो पूजा के बाद उनकी आरती जरूर करें. यहां पढ़ें मां ब्रह्मचारिणी की पूरी आरती.
आरती देवी ब्रह्मचारिणी जी की
जय अम्बे ब्रह्मचारिणी माता जय चतुरानन प्रिय सुख दाता
ब्रह्मा जी के मन भाती हो ज्ञान सभी को सिखलाती हो
ब्रह्म मन्त्र है जाप तुम्हारा जिसको जपे सरल संसारा
जय गायत्री वेद की माता जो जन जिस दिन तुम्हें ध्याता
कमी कोई रहने ना पाये कोई भी दुख सहने न पाये
उसकी विरति रहे ठिकाने जो तेरी महिमा को जाने
रद्रक्षा की माला ले कर जपे जो मन्त्र श्रद्धा दे कर
आलस छोड़ करे गुणगाना मां तुम उसको सुख पहुंचाना
ब्रह्मचारिणी तेरो नाम पूर्ण करो सब मेरे काम
भक्त तेरे चरणों का पुजारी रखना लाज मेरी महतारी
मां ब्रह्मचारिणी की आरती का महत्व
