खटीमा। सनातन श्री रामलीला पात्र परिषद द्वारा आयोजित रामलीला मंचन का शुभारंभ शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की झांकी की पूजा-अर्चना और विधिवत आरती के साथ श्रद्धा एवं भक्तिभाव से हुआ। माता के नौ स्वरूपों की आराधना के बाद रामलीला मंचन प्रारंभ किया गया। इस अवसर पर धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और भक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर
स्थानीय कलाकारों ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों को अपने अभिनय के माध्यम से जीवंत करते हुए दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामलीला के प्रथम दिवस अहिल्या उद्धार, मीना बाजार का सुंदर नाटक, पुष्पवाटिका प्रसंग, माता सीता का स्वयंवर, रावण और बाणासुर के बीच तीक्ष्ण संवाद तथा भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष खंडन मुख्य आकर्षण रहे। कलाकारों की संवाद अदायगी, भाव-भंगिमाओं और मंचीय प्रस्तुति ने दर्शकों को पूरे आयोजन के दौरान बांधे रखा। रामलीला में अहिल्या उद्धार का प्रसंग विशेष रूप से मार्मिक रहा। पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि गौतम के शाप के कारण उनकी पत्नी अहिल्या शिला रूप में रहकर भगवान श्रीराम के चरणों के स्पर्श से मुक्ति मिलने की प्रतीक्षा कर रही थीं। त्रेतायुग में महर्षि विश्वामित्र के साथ वन मार्ग से गुजरते हुए भगवान श्रीराम उनके आश्रम पहुंचे। महर्षि विश्वामित्र के निर्देश पर भगवान श्रीराम के चरणों का स्पर्श होते ही अहिल्या शाप से मुक्त होकर पुनः स्त्री स्वरूप में प्रकट हुईं। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने भगवान श्रीराम की करुणा, भक्ति की महिमा और मुक्ति के आध्यात्मिक संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। मंचन के दौरान अहिल्या की प्रतीक्षा और उनके उद्धार का दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो उठे। इसके बाद पुष्पवाटिका प्रसंग का आकर्षक मंचन किया गया, जिसमें भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन की भावपूर्ण झलक दिखाई गई। कलाकारों ने संवादों और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से इस प्रसंग की सुंदरता को जीवंत कर दिया। माता सीता के स्वयंवर के मंचन ने भी दर्शकों में उत्साह भर दिया। विभिन्न राजाओं द्वारा शिव धनुष उठाने के प्रयास और असफलता के बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने शिव धनुष उठाकर उसका खंडन किया। इस दृश्य के मंचन के साथ ही रामलीला स्थल पर उत्साह का वातावरण बन गया। रावण और बाणासुर के बीच तीक्ष्ण संवाद भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे। दोनों पात्रों के कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली संवाद अदायगी और अभिनय से प्रसंग को जीवंत बना दिया। वहीं मीना बाजार के सुंदर नाटक ने दर्शकों का मनोरंजन किया। धार्मिक प्रसंगों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के समावेश ने रामलीला को आकर्षक और यादगार बना दिया। इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों ने विभिन्न पात्रों की भूमिकाएं निभाकर अपनी अभिनय प्रतिभा का परिचय दिया। रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था, नैतिक मूल्यों और भगवान श्रीराम के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच भी है। नवरात्रि के प्रथम दिन माता के नौ स्वरूपों की आराधना के साथ रामलीला का शुभारंभ होने से आयोजन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया। कार्यक्रम में कमेटी के संरक्षक राजीव सिंघल, अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, मनोज वाधवा, संतोष अग्रवाल, विजय गुप्ता, चिरंजीव बत्रा, अजहर सिद्दीकी, पप्पू सक्सेना, प्रदीप गुप्ता और दिगंबर गुप्ता सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन भगवान दास गुप्ता ने किया। रामलीला मंचन को संगीतमय और प्रभावशाली बनाने में इंद्रेश गुंबर, मनोज सक्सेना और रोहित रस्तोगी ने संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हारमोनियम, तबले और गिटार सहित विभिन्न वाद्य यंत्रों के माध्यम से संगीत की सुंदर प्रस्तुति दी गई, जिससे मंचन के विभिन्न दृश्य और अधिक प्रभावशाली बन गए। सनातन श्री रामलीला पात्र परिषद की ओर से आयोजित इस रामलीला के प्रथम दिवस ने श्रद्धालुओं को भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों का संदेश भी दिया। अहिल्या उद्धार से लेकर शिव धनुष खंडन तक के प्रसंगों ने धर्म, करुणा, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। स्थानीय कलाकारों की सहभागिता, कमेटी पदाधिकारियों के सहयोग और संगीत की सुंदर प्रस्तुति ने नवरात्रि के प्रथम दिन आयोजित रामलीला मंचन को विशेष बना दिया।
