ED-IT का बड़ा एक्शन: पार्क ग्रुप डील मामले में दो कारोबारी हिरासत में, पूछताछ जारी

  • अचानक दस्तक: सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 की सुबह लगभग 7 बजे दिल्ली और गुरुग्राम की आयकर और ईडी टीमों के लगभग 30-35 अधिकारी सुरक्षा बलों के साथ बिलासपुर की बत्रा कॉलोनी पहुंचे।
  • हिरासत में लेकर पूछताछ: कार्रवाई शुरू होने के वक्त रोहिताश बत्रा मॉर्निंग वॉक पर थे और डॉ. दीपक छाबड़ा पास ही एक जिम में गए हुए थे ।टीमों ने दोनों को वहीं से अपने घेरे में लिया और घरों के अंदर लाकर दरवाजे बंद कर दिए।
  • सुरक्षा व्यवस्था: सुरक्षा के लिहाज से दोनों आवासों के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और उत्तर प्रदेश पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं।
  1. छापेमारी का कारण क्या है?
  • पार्क ग्रुप से कनेक्शन: जानकारों के मुताबिक, रोहिताश बत्रा और डॉ. दीपक छाबड़ा रुद्रपुर के प्रसिद्ध मेडिसिटी हॉस्पिटल के पार्टनर (साझेदार) थे। हाल ही में इस हॉस्पिटल को पार्क ग्रुप (Park Group) को हस्तांतरित (Acquire) किया गया था।
  • चूंकि इस समय पार्क ग्रुप के खिलाफ आयकर विभाग और ईडी की बड़ी जांच और कार्रवाई चल रही है, इसी कड़ी में इन दोनों के ठिकानों पर भी वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और प्रॉपर्टी सौदे से जुड़े दस्तावेज खंगालने के लिए यह छापेमारी की गई है।
  1. अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
  • लगातार दूसरे दिन पड़ताल: मंगलवार देर शाम तक जांच टीमें दोनों आवासों के भीतर डटी रहीं और बंद दरवाजों के पीछे दस्तावेजों की स्क्रूटनी व पूछताछ चलती रही।
  • नेताओं का जमावड़ा: इन दोनों परिवारों का क्षेत्र में बड़ा रसूख होने के कारण रुद्रपुर के विधायक शिव अरोड़ा इच्छा विधायक तिलक राज बहेड़ महापौर रुद्रपुर विकास शर्मा और कई शुभचिंतक जानकारी लेने पहुंचे। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने किसी को भी घर के भीतर या पास फटकने की इजाजत नहीं दी।

दस्तावेजों की जांच: अधिकारियों द्वारा मुख्य रूप से मेडिसिटी हॉस्पिटल की डील से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों के कागजात खंगाले जा रहे हैं।

रुद्रपुर में लगातार ईडी की कार्रवाई पर उठे सवाल,

रुद्रपुर जैसे मेहनतकश और शांत शहर में मेडिसिटी अस्पताल से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की लगातार दूसरे दिन जारी छापेमारी ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। इससे पहले भी शहर में इसी तरह की केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई देखी जा चुकी है। स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि रुद्रपुर एक छोटा व्यापारिक हब है, जहां लोग अपनी मेहनत से व्यापार खड़ा करते हैं।

चर्चाएं गर्म हैं कि पिछली कार्रवाई की तरह इस बार भी शायद कुछ हाथ न लगे। ऐसे में विपक्ष ने सीधे सत्ता पक्ष के नेताओं पर निशाना साधते हुए गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। राजनीतिक हलकों में आरोप लगाया जा रहा है कि केंद्रीय अधिकारियों का इस्तेमाल केवल सत्तासीन नेताओं के इशारे पर विपक्ष या विशिष्ट व्यापारियों को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई वाकई किसी वित्तीय अनियमितता की निष्पक्ष जांच है या फिर राजनीतिक रंजिश साधने का एक जरिया मात्र है।