INDIA गठबंधन (INDIA Bloc) की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा (Neha Bora) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में अंग्रेजी में बेहद आक्रामक भाषण दिया।

  • युवा चेहरे को तवज्जो: जेएनयू (JNU) की पीएचडी छात्रा नेहा बोरा को इस बड़े विपक्षी मंच पर जगह देकर INDIA गठबंधन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे छात्र संगठनों और युवाओं की आवाज़ को सीधे अपनी मुख्यधारा की राजनीति से जोड़ रहे हैं।
  • हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा के इस अंग्रेजी भाषण और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया का पूरा वीडियो आप यहाँ देख सकते हैं:

INDIA गठबंधन के मार्च में भागीदारी: वह राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ विपक्षी सांसदों की उस बस में भी सवार थीं, जो चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च निकालते हुए सुप्रीम कोर्ट की तरफ बढ़ रही थी।

मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली और वर्तमान में जेएनयू (JNU) की पीएचडी छात्रा नेहा बोरा पिछले कुछ समय से दिल्ली में हो रहे छात्र आंदोलनों का प्रमुख चेहरा बन चुकी हैं।

  1. नीट पेपर लीक और भूख हड़ताल: नेहा बोरा ने नीट परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।
  2. पुलिस को चकमा देकर जंतर-मंतर पहुंचना: हाल ही में जब दिल्ली पुलिस ने उन्हें और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था, तब कनोट प्लेस में पुलिस को चकमा देकर और बैरिकेड्स लांघकर जंतर-मंतर की तरफ दौड़ने का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।

जब हम कहते हैं ‘हम भारत के लोग’ बनाम बीजेपी, तो हम एक पक्ष की बात कर रहे होते हैं। हम एक साझा दुश्मन के बारे में बात कर रहे हैं—इस देश की जनता का एक दुश्मन, भारतीय लोकतंत्र का एक दुश्मन।

वे जितने भी दावे करते हैं कि हम राष्ट्रविरोधी हैं, हम गद्दार हैं… अब यह सच पूरी तरह से सामने आ चुका है कि इस देश के लोगों के खिलाफ वास्तव में जिसने देशद्रोह किया है, वह बीजेपी है। और इस देशद्रोह को बढ़ावा देने वाले भारत के चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को अपने पद से हटना होगा।

यह ‘SIR’ (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया… विपक्षी दल लगातार कह रहे हैं कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष नहीं है और इसमें धांधली की गई है। इसे इसलिए नहीं किया जा रहा कि मतदाता सूचियों को सुधारा जा सके, बल्कि इसे इसलिए किया जा रहा है ताकि एक बार के लिए चुनाव आयोग नागरिकों को चुने, सत्ताधारी दल नागरिकों को चुने, और फिर उन नागरिकों से कहा जाए कि वे सत्ताधारी दल को वोट दें।

यही कारण है कि आज हम सब लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एक साथ खड़े हैं।”