हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 में ‘नेत्र कुंभ’ बनेगा लाखों लोगों की रोशनी का सहारा, एक लाख से अधिक नेत्र परीक्षण का लक्ष्य


सक्षम उत्तराखंड ने शुरू की तैयारियां, निःशुल्क चश्मे, नेत्र रोग परामर्श और मोतियाबिंद के ऑपरेशन पर रहेगा विशेष जोर
देहरादून। आस्था, आध्यात्मिकता और मानव सेवा के संगम के रूप में पहचान बना चुका ‘नेत्र कुंभ’ हरिद्वार में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले अर्धकुंभ के अवसर पर एक बार फिर लाखों लोगों के जीवन में रोशनी लाने की तैयारी कर रहा है। सक्षम द्वारा आयोजित किए जा रहे इस सेवा अभियान का उद्देश्य उन लोगों तक नेत्र चिकित्सा की सुविधाएं पहुंचाना है, जो आर्थिक तंगी, जागरूकता की कमी, अशिक्षा या अन्य परिस्थितियों के कारण समय पर अपनी आंखों की जांच नहीं करा पाते। ऐसे अनेक लोग वर्षों तक कमजोर दृष्टि के साथ जीवन बिताते रहते हैं और उन्हें यह एहसास तक नहीं होता कि उनकी आंखों की रोशनी लगातार कमजोर हो रही है।
सक्षम उत्तराखंड के संरक्षक डॉ. ललित मोहन उप्रेती ने 11 अक्टूबर 2026 को जारी अपने संदेश में कहा कि वर्ष 2027 में हरिद्वार की पावन भूमि पर आयोजित होने वाले नेत्र कुंभ को पहले से अधिक व्यापक बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस बार एक लाख से अधिक लोगों के नेत्र परीक्षण, जरूरतमंदों को निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराने और मोतियाबिंद के ऑपरेशन की व्यवस्था करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए अधिक संसाधन जुटाने, चिकित्सा विशेषज्ञों को जोड़ने और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग प्राप्त करने की आवश्यकता है।
कमजोर दृष्टि की अनदेखी बन सकती है बड़ी समस्या

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर


डॉ. उप्रेती के अनुसार, आंखों की रोशनी कमजोर होने की समस्या उम्र बढ़ने के साथ अधिक सामने आती है। सामान्यतः 40 से 50 वर्ष की आयु के बाद लोगों को पढ़ने-लिखने के लिए चश्मे की आवश्यकता महसूस होने लगती है। आंख के भीतर मौजूद प्राकृतिक लेंस की उम्र के साथ बदलती क्षमता के कारण पास की वस्तुओं को देखने में परेशानी हो सकती है। वहीं, मोतियाबिंद ऐसी समस्या है, जिसमें आंख का प्राकृतिक लेंस धुंधला होने लगता है और व्यक्ति की दृष्टि प्रभावित होती है।
समय पर नेत्र परीक्षण कराने से दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान की जा सकती है। उचित चश्मे, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक उपचार से अनेक लोगों को बेहतर दृष्टि प्राप्त करने में सहायता मिलती है। मोतियाबिंद के मामलों में ऑपरेशन प्रभावी उपचार है। हालांकि, आंखों की देखभाल में देरी करने से कुछ स्थितियों में गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं और उपचार के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों, दूरस्थ इलाकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में रहने वाले अनेक लोगों के लिए नियमित नेत्र परीक्षण कराना आसान नहीं है। कई लोग दैनिक कामकाज किसी तरह करते रहते हैं, लेकिन उन्हें पढ़ने, छोटे अक्षरों को पहचानने या दूर की वस्तुओं को देखने में परेशानी होती है। नेत्र कुंभ ऐसे ही लोगों तक पहुंचकर उन्हें जांच, परामर्श और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करता है।
अंधता निवारण अभियान में सामाजिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका
देश में अंधता और दृष्टि संबंधी समस्याओं की रोकथाम के लिए सरकारी स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों की सफलता में सक्षम जैसी सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवकों, नेत्र रोग विशेषज्ञों और अन्य सहयोगी संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
डॉ. उप्रेती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में नेत्र कुंभ के माध्यम से की जा रही जनसेवा की प्रशंसा किया जाना अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं के लिए उत्साहवर्धक और प्रेरणादायक है। इससे समाज में नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के संकल्प को मजबूती मिलती है।
नेत्र कुंभ का मूल विचार यही है कि स्वास्थ्य सुविधाएं केवल बड़े शहरों और संपन्न वर्गों तक सीमित न रहें, बल्कि उन लोगों को भी उपलब्ध हों, जो सामान्य परिस्थितियों में अस्पतालों तक पहुंचने में कठिनाई महसूस करते हैं।
प्रयागराज कुंभ 2019 से शुरू हुआ व्यापक सेवा अभियान
नेत्र कुंभ का पहला बड़ा आयोजन वर्ष 2019 में प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से त्रिवेणी संगम क्षेत्र में विशाल शिविर लगाकर किया गया था। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के नेत्र परीक्षण किए गए और जरूरतमंदों को सहायता उपलब्ध कराई गई। इस पहल ने धार्मिक आयोजनों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को जोड़ने का एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किया।
इसके बाद वर्ष 2021 में हरिद्वार कुंभ के दौरान सक्षम और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से नेत्र कुंभ का आयोजन किया गया। उस समय कुंभ क्षेत्र बहादराबाद से लेकर ऋषिकेश तक विस्तृत था। श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर निर्भर न रहना पड़े, इसके लिए सप्त ऋषियों की स्मृति से प्रेरित होकर सात अलग-अलग स्थानों पर नेत्र परीक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया।
कोरोना महामारी के कारण उस समय अनेक चुनौतियां सामने आईं। इसके बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों से आए सक्षम के स्वयंसेवकों और चिकित्सा दलों ने अभियान जारी रखा और बड़ी संख्या में लोगों तक सहायता पहुंचाई।
75 हजार लोगों की जांच, 49 हजार को मिले निःशुल्क चश्मे
हरिद्वार में वर्ष 2021 के नेत्र कुंभ के दौरान उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 75 हजार लोगों की आधुनिक उपकरणों की सहायता से आंखों की जांच की गई। इनमें से करीब 49 हजार लोगों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए। नेत्र रोग विशेषज्ञों ने मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श दिया और जरूरतमंदों को निःशुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
इस अभियान के दौरान लगभग नौ हजार लोगों में मोतियाबिंद की समस्या की पहचान की गई और उन्हें आगे उपचार तथा ऑपरेशन के लिए संबंधित चिकित्सा केंद्रों में भेजने की व्यवस्था की गई।
ये आंकड़े बताते हैं कि समय पर नेत्र परीक्षण और उचित परामर्श मिलने से कितने बड़े स्तर पर लोगों को लाभ पहुंचाया जा सकता है। किसी जरूरतमंद व्यक्ति को पहली बार चश्मा मिलने के बाद जब उसे दुनिया पहले से अधिक स्पष्ट दिखाई देती है, तो वह अनुभव उसके लिए अत्यंत सुखद और यादगार बन जाता है। नेत्र कुंभ से जुड़े स्वयंसेवकों के लिए भी ऐसे क्षण सेवा की सार्थकता का प्रमाण हैं।
अर्धकुंभ 2027 में बढ़ेगा अभियान का दायरा
प्रयागराज कुंभ 2025 में मिली सफलता के बाद अब हरिद्वार में वर्ष 2027 के अर्धकुंभ के लिए तैयारियां तेज करने का आह्वान किया गया है। इस बार अभियान का लक्ष्य केवल नेत्र परीक्षण और चश्मा वितरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मोतियाबिंद से पीड़ित लोगों के ऑपरेशन की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके लिए चिकित्सा उपकरणों, चश्मों, दवाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों, शिविर स्थलों और स्वयंसेवकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। सक्षम की ओर से अन्य सामाजिक संगठनों, चिकित्सा संस्थानों, दानदाताओं और सेवा भाव से जुड़े नागरिकों को अभियान से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
कुंभ और अर्धकुंभ में देशभर से करोड़ों श्रद्धालु, साधु-संत और विभिन्न आयु वर्ग के लोग हरिद्वार पहुंचते हैं। ऐसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान नेत्र कुंभ जैसी पहल स्वास्थ्य सेवाओं को जनसुलभ बनाने का अवसर प्रदान करती है। यहां जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति की सीमाओं से ऊपर उठकर जरूरतमंदों की सेवा करने का संदेश मिलता है।
‘यस वी कैन डू’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा सक्षम
डॉ. ललित मोहन उप्रेती ने सभी सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवकों, चिकित्सकों और समाजसेवियों से अपील की है कि वे हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 के नेत्र कुंभ को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दें। उनका कहना है कि लक्ष्य बड़ा अवश्य है, लेकिन सामूहिक प्रयास, बेहतर योजना और संसाधनों के सहयोग से इसे प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने आह्वान किया कि अधिक से अधिक संस्थाएं इस अभियान से जुड़ें और जरूरतमंद लोगों की आंखों की रोशनी बचाने के पुण्य कार्य में भागीदार बनें।
नेत्र कुंभ केवल चिकित्सा शिविर नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का अभियान है। हरिद्वार की पवित्र भूमि पर गंगा स्नान और आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आने वाले श्रद्धालुओं को यदि बेहतर दृष्टि और स्वस्थ जीवन की सौगात भी मिले, तो यह आयोजन जनसेवा की एक अनूठी मिसाल बनेगा।
‘यस वी कैन डू’ यानी ‘हां, हम यह कर सकते हैं’ के संकल्प के साथ सक्षम उत्तराखंड ने अर्धकुंभ 2027 में एक लाख से अधिक लोगों की आंखों की जांच और जरूरतमंदों को उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में समाज से सहयोग का आह्वान किया है।
— डॉ. ललित मोहन उप्रेती
संरक्षक, सक्षम उत्तराखंड
प्रांत प्रशिक्षण वर्ग, झाझरा, देहरादून
दिनांक: 11 अक्टूबर 2026