रांची में छात्रा की हत्या, छत्तीसगढ़ में झाड़फूंक के बहाने शोषण का आरोप और विरार में महिला से सामूहिक दुष्कर्म का मामला


भरोसे का कत्ल, हवस के आरोप और खामोश धमकियां: तीन राज्यों से सामने आए यौन अपराध के मामले

क्राइम डेस्क | विशेष रिपोर्ट
देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आए तीन आपराधिक मामले समाज के सामने गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कहीं 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली 17 वर्षीय छात्रा की हत्या का मामला सामने आया, तो कहीं बीमारी के इलाज और झाड़फूंक के नाम पर एक नाबालिग के कथित यौन शोषण का आरोप लगा। महाराष्ट्र के विरार में एक महिला ने अपने पति के दो दोस्तों पर सामूहिक दुष्कर्म और उसके चार वर्षीय बेटे को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
तीनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन इनमें भरोसे के दुरुपयोग, महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा तथा अपराध की शिकायत करने वालों को धमकाए जाने जैसे गंभीर पहलू सामने आते हैं। पुलिस की जांच और अदालत में सामने आने वाले साक्ष्य ही आरोपों की वास्तविकता तय करेंगे।
रांची: नदी पर बुलाने के बाद छात्रा की हत्या का आरोप

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


झारखंड की राजधानी रांची के सिल्ली क्षेत्र में 17 वर्षीय छात्रा का शव घर से करीब ढाई किलोमीटर दूर एक सुनसान स्थान पर झाड़ियों में मिलने से सनसनी फैल गई। छात्रा 11वीं कक्षा में पढ़ती थी। पुलिस ने इस मामले में 23 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन आरोपी ने कथित तौर पर नशे की हालत में छात्रा को फोन किया और उसे नदी में नहाने के बहाने वहां बुलाया। छात्रा अपनी सात वर्षीय चचेरी बहन के साथ मौके पर पहुंची थी। पुलिस का आरोप है कि वहां छात्रा के साथ दुष्कर्म किया गया और बाद में गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई।
छात्रा घर से यह कहकर निकली थी कि वह अपने भाई और भाभी से मिलने जा रही है। कुछ समय बाद उसकी चचेरी बहन घर लौट आई, लेकिन छात्रा वापस नहीं पहुंची। परिवार ने तलाश शुरू की और बाद में उसका शव झाड़ियों में मिला।
सिल्ली के डीएसपी मनीष चंद्र लाल के मुताबिक, छापेमारी के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपराध स्वीकार किया और उसकी निशानदेही पर छात्रा का मोबाइल फोन तथा अन्य सामान बरामद किए गए। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर होगी।
इस घटना ने किशोरियों की सुरक्षा, सुनसान स्थानों पर बुलाकर किए जाने वाले संभावित अपराधों और समय रहते पुलिस तक सूचना पहुंचाने की जरूरत को फिर चर्चा में ला दिया है।
छत्तीसगढ़: झाड़फूंक के नाम पर नाबालिग के शोषण का आरोप
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में 14 वर्षीय किशोरी के कथित यौन शोषण के मामले में 44 वर्षीय रमेश कुमार पिस्दा को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी के बारे में बताया गया है कि वह झाड़फूंक करता था।
अधिकारियों के अनुसार, मामला तब सामने आया जब किशोरी के माता-पिता उसे अंतागढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। चिकित्सकीय जांच में पता चला कि वह पांच महीने की गर्भवती थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और मामला दर्ज किया गया।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, किशोरी के पिता की शिकायत में बताया गया कि 15 अप्रैल को बच्ची की तबीयत खराब होने पर परिवार उसे इलाज के लिए अमागांव गांव में रहने वाले आरोपी के पास ले गया था। आरोप है कि आरोपी ने जांच करने का नाटक किया और बच्ची को बताया कि उसके गर्भाशय में समस्या है। उसने किशोरी को एक ताबीज भी दिया।
शिकायत के अनुसार, 25 मई को घर के काम के सिलसिले में किशोरी को उसके चाचा के साथ आरोपी के घर भेजा गया था। इस दौरान क्या-क्या हुआ, इसकी विस्तृत पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होनी बाकी है।
प्रशासन ने मामले की जांच के लिए जिला-स्तरीय समिति गठित की है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है।
यह मामला इस बात की गंभीर चेतावनी है कि बीमारी, अंधविश्वास और झाड़फूंक के नाम पर किसी बच्ची को असुरक्षित परिस्थितियों में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को इलाज या धार्मिक विश्वास की आड़ में नाबालिग की सुरक्षा और उसकी शारीरिक स्वायत्तता का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है।
विरार: पति की गैरमौजूदगी में सामूहिक दुष्कर्म का आरोप
महाराष्ट्र के विरार में एक महिला ने अपने पति के दो दोस्तों पर सामूहिक दुष्कर्म करने और घटना उजागर करने पर उसके चार वर्षीय बेटे की हत्या की धमकी देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर सूरज यादव और विशाल नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक लालू तुरे के अनुसार, आठ अक्टूबर की रात महिला का पति घर पर मौजूद नहीं था। इसी दौरान दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोप है कि वारदात के बाद उन्होंने महिला को धमकाया कि यदि उसने किसी को घटना के बारे में बताया तो उसके बेटे को जान से मार दिया जाएगा।
पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी महिला के पति के दोस्त थे और अक्सर उसके घर आते-जाते थे। शिकायत मिलने के बाद विरार पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई की। दोनों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
इस मामले में सबसे चिंताजनक पहलू कथित अपराध के साथ बच्चे को नुकसान पहुंचाने की धमकी है। ऐसी धमकियां पीड़ित को शिकायत करने से रोकने और उसे मानसिक दबाव में रखने का माध्यम बन सकती हैं। पीड़ित की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उसे बिना दबाव के बयान देने का अवसर उपलब्ध कराना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
तीन मामले, कई गंभीर सवाल
रांची, कांकेर और विरार की घटनाएं अलग-अलग परिस्थितियों में सामने आई हैं। एक मामले में हत्या और दुष्कर्म का आरोप है, दूसरे में झाड़फूंक के बहाने नाबालिग के कथित शोषण की जांच हो रही है और तीसरे में महिला ने सामूहिक दुष्कर्म तथा उसके बच्चे को धमकी दिए जाने की शिकायत की है।
इन मामलों से कुछ बुनियादी सवाल सामने आते हैं। क्या बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सामाजिक स्तर पर पर्याप्त प्रयास किए जा रहे हैं? क्या परिवारों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय प्रशासन के बीच शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की प्रभावी व्यवस्था है? क्या पीड़ितों को कानूनी सहायता, चिकित्सकीय देखभाल और मनोवैज्ञानिक सहयोग समय पर मिल रहा है?
यौन अपराधों की रिपोर्टिंग में पीड़ित की पहचान और निजता की रक्षा भी बेहद जरूरी है। खासकर नाबालिगों के मामलों में नाम, तस्वीर, पता या ऐसे विवरण प्रकाशित नहीं किए जाने चाहिए जिनसे उनकी पहचान उजागर हो सकती हो।
निष्कर्ष
इन तीनों मामलों में पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल गिरफ्तारी को न्याय का अंतिम पड़ाव नहीं माना जा सकता। निष्पक्ष जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य, पीड़ितों की सुरक्षा और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया आवश्यक हैं। समाज की जिम्मेदारी भी है कि वह पीड़ितों को दोष देने के बजाय उनका साथ दे और किसी भी प्रकार की हिंसा या धमकी की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाए।
संपादकीय टिप्पणी: इस रिपोर्ट में आरोपों को आरोप के रूप में प्रस्तुत किया गया है। दोष सिद्ध होने का निर्णय न्यायालय करेगा।