हनुमान चालीसा की एक चौपाई जम कुबेर दिगपाल जहां ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते” और “तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाये राज पद दीन्हा” छंद इसका सबसे सुंदर उदाहरण है।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
हनुमान जी की महानता शब्दों से परे है
हनु्मान चालीसा के पहले श्लोक में कहा गया है कि यम, कुबेर और दिशाओं के रक्षक, बड़े-बड़े कवि और विद्वान भी हनुमान जी महिमा का पूर्ण रूप से वर्णन नहीं कर सकते हैं।
हनुमान जी को असाधारण शक्ति, ज्ञान, साहस और भक्ति के लिए जाना जाता है। किसी व्यक्ति की ज्ञान और शक्ति के लिए तारीफ की जा सकती है, लेकिन हनुमान जी की महानता इस बात से आती है कि वह शक्ति को विनम्रता के साथ जोड़ते हैं। अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल भगवान राम और दूसरों की सेवा करने में लगाते हैं।
इस श्लोक में कुबेर कौन हैं?
हनुमान चालीसा में कुबेर का जिक्र है, जिन्हें पारंपरिक रूप से धन के देवता और उत्तर दिशा का रक्षक भी माना जाता है। बहुत ज्यादा ताकत, अधिकार या ज्ञान से जुड़े लोग भी हनुमान जी की शक्ति का वर्णन नहीं कर सकते हैं।
हनुमान जी की ताकत, विनम्रता, भक्ति और सेवा से जुड़ी रहती है, जिससे यह श्लोक याद दिलाता है कि असली महानता पहचान की मांग नहीं करती है।
हनुमान जी ने सुग्रीव की मदद की
दूसरे श्लोक में हनुमान जी सु्ग्रीव की मदद करते हैं। रामायण की परंपरा के मुताबिक, सुग्रीव अपने राज्य से अलग हो गए थे और डर के साये में जी रहे थे। हनुमान जी ने सुग्रीव और राम जी के बीच एक अच्छे रिश्ते की संभावना को पहचाना।
उन्होंने उन्हें एक साथ लाने में मदद की, एक ऐसा रिश्ता बनाया जिसने आखिरकार सुग्रीव को राजा घोषित कर दिया। यह सिर्फ उन्होंने अपनी ताकत ही नहीं दिखाई, बल्कि समझा कि क्या जरूरी है और सही समय पर सही लोगों को एक-दूसरे से मिलाने में मदद की।
जब ये श्लोक पढ़ें जाते हैं, तो इनके पीछे की कहानी याद आने पर इनका गहरा अर्थ समझ आता है। आज भी हनुमान जी की महानता की याद की जाती है, लेकिन सबसे बड़ी खूबी सिर्फ उनकी ताकत नहीं है, बल्कि वे उस ताकत का इस्तेमाल दूसरों की भलाई के लिए करते हैं।
