इस व्रत को सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
शास्त्रों में इस व्रत से जुड़े कई नियमों के बारे में बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि व्रत के दौरान विशेष बातों का ध्यान न रखने से व्रत टूट सकता है। इसलिए व्रत करने से पहले इसके नियमों के बारे में जरूर जान लें। आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि करवा चौथ व्रत के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।स
कब है करवा चौथ?
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ: 29 अक्टूबर को रात 01 बजकर 06 मिनट से
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का समापन: 29 अक्टूबर को रात 10 बजकर 09 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, करवा चौथ 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05 बजकर 54 मिनट से शाम 07 बजकर 10 मिनट तक
करवा चौथ के दिन चंद्रोदय: रात 08 बजकर 39 मिनट पर
1. सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें
इस व्रत की शुरुआत सरगी के साथ होती है। सास अपनी बहू को सरगी देती है। इसमें फल, मेवे, मिठाइयां, सुहाग का सामान और कपड़े होते हैं। करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले उठकर सरगी खा लेनी चाहिए। इस दौरान पौष्टिक चीजें खाएं, जिससे दिनभर शरीर में ऊर्जा बनी रहे।
2. निर्जला व्रत
इस व्रत के दौरान अन्न और जल का सेवन नहीं करना चाहिए। रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलें। सुबह स्नान के बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखने का संकल्प लिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि व्रत के दौरान पानी पीने या कुछ खाने से व्रत टूट सकता है। अगर आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या है, तो व्रत करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
3. सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व
इस दिन सुहागिन महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार करने का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि सोलह श्रृंगार न करने से व्रत अधूरा रह जाता है। हाथों में मेहंदी जरूर लगाएं। सिंदूर, मंगलसूत्र, बिंदी, चूड़ियां और पैरों में महावर लगाना इस व्रत का अहम हिस्सा है।
4. करवा चौथ की कथा सुनना है जरूरी
करवा चौथ व्रत के दौरान व्रत की कथा का पाठ करना या सुनना जरूरी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कथा सुने बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है। पूजा के समय एक मिट्टी का करवा रखा जाता है, जिसका दान बाद में सास या किसी सुहागिन महिला को किया जाता है।
