रुद्रपुर। शहर के बीचोंबीच स्थित विशाल गांधी पार्क का स्वरूप बदल रहा है। नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के चलते पार्क का दायरा करीब 30 फीट तक कम होने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पार्क की लंबाई और चौड़ाई दोनों प्रभावित हुई हैं। विकास कार्य अपनी जगह जरूरी हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या रुद्रपुर की पहचान रहे गांधी पार्क की उपयोगिता भी धीरे-धीरे सीमित होती जा रही है?
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
पुराने रुद्रपुर के लोगों के लिए गांधी पार्क केवल हरियाली और टहलने की जगह नहीं, बल्कि शहर की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। हिंदू समाज के अनेक त्योहारों और बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए इसी मैदान का इस्तेमाल होता रहा है। दशकों से इस पार्क ने शहर के लोगों को एक साथ आने, उत्सव मनाने और सामूहिक कार्यक्रम आयोजित करने का अवसर दिया है।
अब मेयर की ओर से पार्क में प्रभु श्रीराम की मूर्ति स्थापित करने की बात भी कही गई है। भगवान श्रीराम की प्रतिमा धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हो सकती है, लेकिन इसके साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि पार्क में बड़े आयोजनों के लिए पर्याप्त खुला स्थान बचेगा या नहीं।
यदि पार्क का क्षेत्रफल पहले से कम हो चुका है और आगे इसका स्वरूप बच्चों के मनोरंजन तथा सीमित गतिविधियों के अनुरूप विकसित होता है, तो क्या यहां पहले की तरह बड़े धार्मिक, सामाजिक और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित हो सकेंगे? कहीं ऐसा तो नहीं कि शहर का ऐतिहासिक आयोजन स्थल धीरे-धीरे केवल चिल्ड्रन पार्क बनकर रह जाए?
सरकार और नगर निगम के लिए हाईवे विस्तार तथा शहरी विकास जरूरी हैं, लेकिन विकास का अर्थ पुराने सार्वजनिक स्थलों की उपयोगिता घटाना नहीं होना चाहिए। पार्क का मूल क्षेत्रफल कितना था, अब कितना बचा है और भविष्य में इसके उपयोग की क्या योजना है, प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए।
नए रुद्रपुर में बसने वाले लोगों के लिए शायद यह बदलाव सामान्य हो, लेकिन पुराने शहर के नागरिकों के लिए गांधी पार्क की पहचान और उससे जुड़ी यादें मायने रखती हैं।
सवाल सीधा है—क्या रुद्रपुर के गांधी पार्क को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करते हुए उसके ऐतिहासिक स्वरूप और बड़े आयोजनों की क्षमता को बचाया जा सकेगा, या आने वाले समय में यह विशाल मैदान केवल बच्चों के खेलने तक सिमटकर रह जाएगा?
