देहरादून से रुद्रपुर, किच्छा, नैनीताल और पिथौरागढ़ तक करवा चौथ की धार्मिक परंपराओं की रही चर्चा; बादलों के बीच चंद्र दर्शन की प्रतीक्षा ने बढ़ाया उत्सुकता का भाव
रुद्रपुर, उत्तराखंड।
भारतीय संस्कृति में करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, त्याग, समर्पण और दांपत्य जीवन की मंगलकामना का पवित्र पर्व है। 29 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सुहागिन महिलाओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ करवा चौथ मनाया। महिलाओं ने अपने जीवनसाथी की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखा। दिनभर उपवास के बाद शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की आराधना की गई तथा रात में चंद्र दर्शन के बाद पारंपरिक विधि से व्रत पूरा किया गया।
उत्तराखंड के देहरादून, रुद्रपुर, किच्छा, नैनीताल और पिथौरागढ़ सहित विभिन्न शहरों में पर्व को लेकर उत्साह रहा। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में चंद्रोदय के समय को लेकर महिलाओं में उत्सुकता रही। प्रकाशित जानकारी के अनुसार, देहरादून में चंद्रोदय का संभावित समय रात 8:02 बजे और नैनीताल में लगभग 7:59 बजे बताया गया था। मौसम, पहाड़ियों और स्थानीय परिस्थितियों के कारण वास्तविक दर्शन में अंतर संभव था।
करवा चौथ का आध्यात्मिक महत्व
सनातन परंपरा में करवा चौथ का व्रत दांपत्य जीवन की मंगलकामना से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और परिवार में सुख-शांति के लिए प्रार्थना करती हैं। इस पर्व का आध्यात्मिक संदेश केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि रिश्तों में विश्वास, धैर्य, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा भी देता है।
माता पार्वती और भगवान शिव का दांपत्य आदर्श भारतीय धार्मिक परंपरा में श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। भगवान गणेश की पूजा से मंगल की कामना की जाती है, जबकि चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। करवा चौथ की कथा सुनना और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करना इस पर्व के प्रमुख धार्मिक अंग हैं।
इस दिन सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद अनेक महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को पूजा की थाली सजाकर दीपक, रोली, अक्षत, पुष्प, करवा और जल के साथ पूजा की जाती है। परिवार की परंपरा के अनुसार करवा चौथ की कथा सुनी जाती है। चंद्रमा के दर्शन होने पर अर्घ्य दिया जाता है और फिर व्रत खोलने की रस्म निभाई जाती है। <
देहरादून से नैनीताल तक चंद्र दर्शन का इंतजार
उत्तराखंड के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में चंद्रोदय का समय अलग-अलग रहा। देहरादून में महिलाओं ने अपने परिवारों की धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की। रुद्रपुर और किच्छा में भी करवा चौथ की तैयारियों, शृंगार और चंद्र दर्शन को लेकर उत्साह रहा। नैनीताल और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में पहाड़ियों तथा मौसम की परिस्थितियों के कारण चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन के समय में अंतर हो सकता है।
रुद्रपुर में इस अवसर पर बादलों के कारण चंद्रमा को देखने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ी। संपादक अवतार सिंह बिष्ट और उनकी अर्धांगिनी मोहनी बिष्ट के परिवार में भी चंद्र दर्शन का क्षण विशेष रूप से यादगार रहा। रात 8:39 बजे बादलों के बीच लालिमा लिए चंद्रमा के पूर्ण दर्शन हुए और लगभग 8:45 बजे तक चंद्रमा दिखाई देने के बाद पुनः बादलों में छिप गया। इस क्षण ने दिनभर के व्रत और प्रतीक्षा को एक आत्मीय स्मृति में बदल दिया।
अवतार सिंह बिष्ट और मोहनी बिष्ट ने की आराधना
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के संपादक अवतार सिंह बिष्ट की अर्धांगिनी मोहनी बिष्ट ने अपने जीवनसाथी की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ करवा चौथ का व्रत रखा। शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता का स्मरण कर पूजा-अर्चना की गई।
चंद्रमा के दर्शन होने पर पारंपरिक रीति के अनुसार चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित किया गया और परिवार की मंगलकामना की गई। प्रचलित परंपरा के अनुसार छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की रस्म निभाई जाती है। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा है। पूजा की विधि परिवार की मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
अवतार सिंह बिष्ट और मोहनी बिष्ट के लिए यह अवसर प्रेम, विश्वास और साथ की भावना को फिर से अनुभव करने का क्षण बना। वैवाहिक जीवन की सुंदरता केवल पर्वों और उत्सवों में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन में एक-दूसरे का सम्मान करने, कठिन परिस्थितियों में साथ निभाने और छोटी-छोटी खुशियों को साझा करने में भी निहित है।
सोलह शृंगार और प्रेम की अभिव्यक्ति
करवा चौथ पर महिलाओं का सोलह शृंगार भारतीय संस्कृति की सुंदर परंपरा है। रंग-बिरंगे परिधान, माथे की बिंदी, मांग का सिंदूर, हाथों की चूड़ियां और चेहरे की मुस्कान इस पर्व की रौनक बढ़ाते हैं। शृंगार के साथ जुड़ी भावनाएं प्रेम, आत्मीयता और पारिवारिक खुशहाली की कामना को अभिव्यक्त करती हैं।
इस अवसर पर प्रेम की भावना को समर्पित पंक्तियां हैं—
चांद की राह निहारती, मन में प्रेम अपार,
सुखी रहे जीवनसाथी, यही हृदय की पुकार।
सभी प्रदेशवासियों और देशवासियों को शुभकामनाएं
करवा चौथ का यह पावन पर्व सभी परिवारों के जीवन में प्रेम, विश्वास, स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि लेकर आए। व्रत रखने वाली सभी महिलाओं की श्रद्धा को नमन करते हुए हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की ओर से उत्तराखंड के समस्त प्रदेशवासियों, देशवासियों, मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को हार्दिक मंगलकामनाएं।
छोटे भाई-बहनों और बच्चों को स्नेहपूर्ण आशीर्वाद, बड़ों को सादर प्रणाम एवं सम्मान तथा सभी मित्रों और परिवारों को प्रेमपूर्ण शुभेच्छाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि हर घर में सुख-शांति बनी रहे, दांपत्य जीवन में परस्पर सम्मान और विश्वास मजबूत हो तथा सभी की मंगलकामनाएं पूर्ण हों।
अवतार सिंह बिष्ट
संपादक, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स
रुद्रपुर, उत्तराखंड
मोहनी बिष्ट एवं अवतार सिंह बिष्ट की ओर से करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं।
प्रेम की डोर अटूट रहे, विश्वास का दीप सदा जलता रहे और हर परिवार का जीवन सुख, शांति तथा मंगल से आलोकित रहे।
