रुद्रपुर भाजपा में मिशन 2027 की आहट या सियासी वर्चस्व की जंग? विकास शर्मा का ठुकराल प्रेम, शिव अरोड़ा से 36 का आंकड़ा और रोडवेज की दुकानों पर चला बुलडोजर… आखिर किसके लिए बिछ रही है राजनीतिक बिसात


सुलह के बाद फिर तल्खी की चर्चाएं, गांधी पार्क से गल्ला मंडी तक कार्यक्रम के बहाने आमने-सामने आए नेता; भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रतिष्ठानों पर हुई कार्रवाई ने भी खड़े किए कई सियासी सवाल।
रुद्रपुर। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव भले ही अभी कुछ महीने दूर हों, लेकिन रुद्रपुर भाजपा की राजनीति में चुनावी बिसात अभी से बिछती दिखाई देने लगी है। यहां सवाल केवल विधायक और मेयर के बीच कथित मतभेदों का नहीं है, बल्कि सवाल राजनीतिक महत्वाकांक्षा, संगठन में वर्चस्व, पुराने रिश्तों और आने वाले विधानसभा टिकट की दावेदारी का भी है। रुद्रपुर की राजनीति में इन दिनों एक ऐसी कहानी चर्चा में है, जिसमें एक तरफ विधायक शिव अरोड़ा हैं तो दूसरी तरफ महापौर विकास शर्मा। दोनों के बीच सुलह-समझौते की कोशिशें हो चुकी हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही कि अंदरखाने सब कुछ सामान्य नहीं है।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट | उत्तराखंड उत्तर प्रदेश, संपूर्ण भारत, देश-विदेश, खेल, आध्यात्मिक, राजनीतिक और जन सरोकारों की खबरें।


मिशन 2027 और टिकट की राजनीतिक महत्वाकांक्षा!
रुद्रपुर की राजनीति को करीब से देखने वाले लोगों के बीच यह चर्चा है कि महापौर विकास शर्मा की नजर भी 2027 के विधानसभा चुनाव पर हो सकती है। राजनीतिक चर्चाओं में उन्हें विधायक शिव अरोड़ा के सामने एक संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि विकास शर्मा की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन भाजपा की अंदरूनी राजनीति में टिकट को लेकर संभावित समीकरणों की चर्चा शुरू हो चुकी है।
दूसरी ओर विधायक शिव अरोड़ा अपनी मौजूदा राजनीतिक जमीन को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या रुद्रपुर भाजपा में दो राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं आमने-सामने हैं? क्या 2027 का टिकट ही दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी की एक बड़ी वजह है या फिर मामला केवल संगठनात्मक मतभेदों तक सीमित है?
रोडवेज के सामने दुकानों पर बुलडोजर, भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी!
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में रोडवेज के सामने स्थित दुकानों और प्रतिष्ठानों पर नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर उभरी है। बताया जाता है कि कार्रवाई की जद में आए कुछ लोग भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता और पदाधिकारी रहे हैं। जिन लोगों ने वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया, राजनीतिक कार्यक्रमों में भागीदारी की और संगठन के साथ खड़े रहे, उन्हें अपने प्रतिष्ठानों पर बुलडोजर चलता देखना पड़ा।
इन दुकानदारों और प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी शिकायत यह रही कि उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला और न ही किसी वैकल्पिक स्थान पर स्थापित करने की व्यवस्था की गई।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में यह बात भी सामने आती रही है कि विधायक शिव अरोड़ा ने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया था कि फिलहाल वे चुनाव लड़ने दें, अगले कार्यकाल में उनके पुनर्वास और व्यवस्था का प्रयास किया जाएगा। लेकिन इसी बीच नगर निगम की कार्रवाई ने पूरे मामले को नया राजनीतिक रंग दे दिया।
अब सवाल यह है कि क्या इस कार्रवाई को केवल प्रशासनिक और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया मानकर देखा जाए या इसके पीछे स्थानीय राजनीति के समीकरण भी काम कर रहे थे? क्या प्रभावित कार्यकर्ताओं की नाराजगी आने वाले चुनाव में राजनीतिक असर डाल सकती है? इन सवालों का जवाब संबंधित पक्षों को देना चाहिए।
विकास शर्मा और राजकुमार ठुकराल की नजदीकियों की चर्चा!
रुद्रपुर की राजनीति में एक और नाम लगातार चर्चा में है और वह है पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल का। राजनीतिक गलियारों में महापौर विकास शर्मा और राजकुमार ठुकराल के बीच बढ़ती नजदीकियों और राजनीतिक तालमेल को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
कभी भाजपा की राजनीति में अलग-अलग खेमों की पहचान रखने वाले नेताओं के बीच आज यदि नजदीकियां दिखाई दे रही हैं तो राजनीतिक विश्लेषक इसके मायने तलाशेंगे ही। सवाल यह भी है कि क्या यह सामान्य राजनीतिक मेलजोल है या फिर 2027 के मद्देनजर कोई नया राजनीतिक समीकरण आकार ले रहा है?
हालांकि किसी भी राजनीतिक मुलाकात या नजदीकी को टिकट की रणनीति अथवा किसी गुप्त समझौते का प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन रुद्रपुर की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में इन घटनाओं पर नजर जरूर रखी जा रही है।
सुलह के बाद फिर आमने-सामने होने की चर्चाएं!
हाल ही में जिला भाजपा कार्यालय में आगामी 3 नवंबर से शुरू होने वाली ‘लोकतंत्र बचाओ, भेड़तंत्र हटाओ यात्रा’ की तैयारियों को लेकर बैठक हुई। बैठक में गांधी पार्क से यात्रा शुरू करने और समापन स्थल को लेकर अलग-अलग सुझाव सामने आने की चर्चा है।
महापौर विकास शर्मा जहां यात्रा का शुभारंभ और समापन दोनों गांधी पार्क में कराने के पक्ष में बताए गए, वहीं विधायक शिव अरोड़ा की ओर से गांधी पार्क से शुरुआत और गल्ला मंडी में समापन का सुझाव दिए जाने की बात सामने आई।
इसी विषय को लेकर बैठक में कथित नोकझोंक की चर्चाएं तेज हुईं। हालांकि विधायक, महापौर और भाजपा जिलाध्यक्ष की ओर से किसी विवाद से इनकार किया गया। दोनों नेताओं ने इसे सामान्य विचार-विमर्श बताया।
इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक मंच पर तल्खी की चर्चाएं सामने आ चुकी हैं। प्रदेश नेतृत्व की मौजूदगी में सुलह-समझौते की कोशिश के बाद माना जा रहा था कि विवाद समाप्त हो गया है, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भाजपा के लिए असली परीक्षा 2027 में होगी!
रुद्रपुर की राजनीति में इस समय कई सवाल एक साथ खड़े हैं। क्या महापौर विकास शर्मा भविष्य में विधानसभा टिकट के दावेदार बनेंगे? क्या विधायक शिव अरोड़ा के सामने पार्टी के भीतर कोई नई चुनौती तैयार हो रही है? रोडवेज के सामने दुकानों पर हुई कार्रवाई से नाराज कार्यकर्ताओं का रुख क्या होगा? राजकुमार ठुकराल और विकास शर्मा की नजदीकियों के राजनीतिक मायने क्या हैं?
इन सवालों के बीच भाजपा संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने और नेताओं के बीच समन्वय बनाए रखने की होगी।
क्योंकि विधानसभा चुनाव केवल नेताओं की लोकप्रियता से नहीं जीते जाते, बूथ स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। जिन कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक पार्टी का झंडा उठाया, यदि वही अपने आपको उपेक्षित महसूस करने लगें तो चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है।
राजनीति में चेहरे बदलते हैं, समीकरण बदलते हैं और दोस्तियां भी बदलती हैं, लेकिन चुनाव के समय कार्यकर्ताओं की याद हर नेता को आती है।
रुद्रपुर में फिलहाल एक तरफ मिशन 2027 की तैयारी है, दूसरी तरफ राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की चर्चा और तीसरी तरफ उन कार्यकर्ताओं की नाराजगी है, जिनके प्रतिष्ठानों पर बुलडोजर चला।
अब देखना यह है कि 2027 में भाजपा का टिकट किसे मिलता है और रुद्रपुर की सियासी बिसात पर कौन किसका साथ देता है।
कहते हैं राजनीति में इशारा समझने वालों के लिए काफी होता है, लेकिन रुद्रपुर की राजनीति में इस बार इशारों के साथ-साथ बुलडोजर के निशान भी बहुत कुछ कह रहे हैं!