रुद्रपुर में पत्रकार रूपेश कुमार के साथ मारपीट का आरोप, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल


पत्रकार की शिकायत और दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच की मांग, पुलिस से आधिकारिक बयान जारी करने की अपेक्षा
रुद्रपुर। शहर में देर रात पत्रकार साथी एवं ‘अनसुनी आवाज’ के संपादक रूपेश कुमार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के बाद रुद्रपुर कोतवाली में भारी पुलिस बल की तैनाती की सूचना है। इस मामले में रूपेश कुमार की ओर से पुलिस पर उनके खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


घटना के सामने आने के बाद पत्रकारिता जगत में चिंता का माहौल है। हालांकि, पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति, मारपीट के कारणों और मुकदमा दर्ज किए जाने की परिस्थितियों को लेकर अभी पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है।
इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर देर रात क्या घटनाक्रम हुआ? पत्रकार रूपेश कुमार के साथ मारपीट किस परिस्थिति में हुई? क्या इस संबंध में उनकी ओर से पुलिस को शिकायत दी गई थी? मुकदमा किन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर दर्ज किया गया? इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आना चाहिए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। पत्रकारों को अपनी बात रखने, जनसमस्याओं को उजागर करने और प्रशासन से सवाल पूछने का अधिकार है। साथ ही कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है। यदि किसी पत्रकार के खिलाफ कोई शिकायत या आरोप है तो उसकी जांच भी कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए और यदि पत्रकार के साथ मारपीट हुई है तो उस पर भी निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस मामले में तत्काल आधिकारिक बयान जारी करे और स्पष्ट करे कि घटना की रात वास्तव में क्या हुआ था। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएं, घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच की जाए। यदि किसी पक्ष की ओर से कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो बिना किसी दबाव या पक्षपात के नियमानुसार कार्रवाई हो।
पत्रकार संगठनों और प्रशासन के बीच विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता जरूरी है। किसी को भी केवल पत्रकार होने के कारण कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता और पत्रकार होने के कारण उसके साथ अन्याय भी नहीं होना चाहिए।
सवाल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि निष्पक्ष न्याय, पत्रकारों की सुरक्षा और कानून के समान अनुपालन का है। रुद्रपुर की जनता और पत्रकार समुदाय पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की सच्चाई सार्वजनिक करने की अपेक्षा कर रहे हैं।