क्या E20 पेट्रोल से गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है? क्या पुराने वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंच सकता है? इन सवालों पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में सरकार का आधिकारिक पक्ष रखा है।

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उन्होंने राज्यसभा में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में बताया किअब तक हुए व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों में E20 पेट्रोल से वाहनों की परफॉर्मेंस या इंजन की टिकाऊ क्षमता पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पाया गया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

माइलेज सिर्फ ईंधन पर निर्भर

गडकरी ने बताया कि माइलेज केवल ईंधन के प्रकार पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति, ट्रैफिक, वाहन की मेंटेनेंस और इंजन की स्थिति जैसे कई कारकों से तय होता है। इसलिए केवल E20 पेट्रोल को माइलेज कम होने की वजह नहीं माना जा सकता।

पुराने वाहनों पर क्या बोली सरकार?

राज्यसभा में लिखित जवाब में गडकरी ने बताया कि इंडियन ऑयल (IOCL), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर संयुक्त अध्ययन किया।

अध्ययन में क्या पाया?

गड़करी ने बताया कि अब तक जो अध्ययन हुए हैं। उनके मुताबिक पुराने (Legacy) वाहनों की परफॉर्मेंस में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है। इसके अलावा इंजन या अन्य पार्ट्स में असामान्य घिसावट (Wear and Tear) नहीं मिली। ड्राइवेबिलिटी, स्टार्ट होने की क्षमता, धातु और प्लास्टिक पार्ट्स की संगतता जैसी जांचों में कोई बड़ी समस्या नहीं मिली।

क्या इंजन में बदलाव कराना पड़ेगा?

गडकरी ने कहा कि अध्ययन में कार या बाइक के इंजन में किसी तरह का मॉडिफिकेशन कराने की जरूरत नहीं पाई गई। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अप्रैल 2005 से लागू BS-III मानकों वाले और 2016 से पहले बने कुछ वाहनों में रबर के कुछ पार्ट्स या गैस्केट बदलने पड़ सकते हैं। यह काम सामान्य सर्विसिंग के दौरान आसानी से किया जा सकता है।

NITI आयोग की समिति ने क्या कहा?

गडकरी ने बताया कि 26 दिसंबर, 2020 को नीति आयोग के तहत एक अंतर-मंत्रालयी समिति बनाई गई थी। इस समिति ने इथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़े सभी पहलुओं जैसे- इंजन कैलिब्रेशन, फ्यूल सिस्टम, मटेरियल कम्पैटिबिलिटी, ड्राइवेबिलिटी, टिकाऊपन, उत्सर्जन और फ्यूल एफिशिएंसी का अध्ययन किया। इसके आधार पर “रोडमैप फॉर इथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-25” जून 2021 में जारी किया गया था।

दुनिया में कितना पुराना इथेनॉल ब्लेंडिंग?

गडकरी ने बताया कि दुनिया में पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिग पिछले 100 साल से अधिक समय से हो रही है। ब्राजील जैसे देशों में कई दशकों से E20 से भी अधिक इथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम 2001 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ था। 2006 में E5 पेट्रोल आया और इसके बाद धीरे-धीरे इथेनॉल मिश्रण बढ़ाया गया। अप्रैल 2026 में E20 लागू करने से पहले प्रयोगशाला परीक्षण, ड्यूरेबिलिटी ट्रायल और फील्ड वैलिडेशन किए गए।


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