किच्छा में भाजपा की बगावत से बढ़ी चुनौती, काशीपुर में नाबालिग से कुकर्म का आरोप; हल्द्वानी में छात्र रैली पर केस, देहरादून में पुरानी पेंशन के लिए कर्मचारी लामबंदकाशीपुर में 10 वर्षीय किशोर से कुकर्म का आरोप, मुख्य आरोपित गिरफ्तार; दो विधि विवादित किशोर संरक्षण में

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काशीपुर। आइटीआइ कोतवाली क्षेत्र में 10 वर्षीय किशोर के साथ कुकर्म करने और उसे जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मामले में शामिल दो विधि विवादित किशोरों को पुलिस संरक्षण में लिया गया है। घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता ने बताया कि 10 सितंबर को दोपहर उसके 10 वर्षीय बेटे को गांव के ही तीन लोग मछली पकड़ने के बहाने अपने साथ ले गए। आरोप है कि तीनों किशोर को बरखेड़ा पांडे गांव में आरिफ के खेत पर बने खाली टीनशेड में ले गए।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वहां तीनों ने किशोर को छुरा दिखाकर डराया-धमकाया। इसके बाद बारी-बारी से उसके साथ कुकर्म किया गया। किशोर को घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।
मामले की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। वहीं दो अन्य आरोपित नाबालिग होने के कारण उन्हें पुलिस संरक्षण में लिया गया है।
पुलिस मामले में घटनास्थल और अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। साथ ही आरोपों से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। नाबालिग से जुड़े इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है।
किच्छा में भाजपा के बागियों ने बढ़ाई संगठन की चिंता, शैली फुटेला को मनाने में जुटे प्रदेश और जिला पदाधिकारी
किच्छा। नगर पालिका किच्छा के चुनाव में भाजपा के लिए बागी प्रत्याशी चुनौती बन गए हैं। पार्टी ने लंबे समय बाद हो रहे नगर पालिका चुनाव में संदीप अरोड़ा को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी घोषित किया है, लेकिन टिकट घोषित होने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया।
भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष शैली फुटेला, देवभूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष एवं भाजपा नेता विजय अरोड़ा तथा नरेंद्र सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था। इसके बाद पार्टी संगठन ने बागियों को मनाने की कवायद तेज कर दी।
शुक्रवार रात से ही भाजपा नेताओं ने शैली फुटेला से संपर्क कर उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए मनाने का प्रयास शुरू किया। भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोड़ा ने भी देर रात तक उनसे बातचीत की, लेकिन सहमति नहीं बन पाई।
शनिवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान विजय अरोड़ा का नामांकन निरस्त कर दिया गया। इसके बाद अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोड़ा के सामने शैली फुटेला ही प्रमुख चुनौती के रूप में रह गईं।
शैली फुटेला का नामांकन जांच में सही पाए जाने के बाद भाजपा संगठन की चिंता और बढ़ गई। दोपहर बाद पार्टी के प्रदेश और जिला स्तर के नेताओं ने उनसे बातचीत का सिलसिला तेज कर दिया।
भाजपा प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल, जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, प्रदेश प्रवक्ता राजेश शुक्ला और भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोड़ा शनिवार शाम शैली फुटेला के आवास पर पहुंचे। नेताओं ने करीब तीन घंटे तक बातचीत की। इसके बावजूद देर रात तक नाम वापसी को लेकर सहमति नहीं बन पाई।
अब रविवार को नाम वापसी की अंतिम प्रक्रिया है। ऐसे में भाजपा संगठन की पूरी कोशिश शैली फुटेला को मनाकर उनका नामांकन वापस कराने की है। चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के सामने बागी उम्मीदवार के मैदान में रहने से भाजपा के वोटों के बंटवारे की आशंका भी बढ़ गई है।
किच्छा में लंबे समय बाद नगर पालिका चुनाव होने के कारण पहले से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। अब भाजपा के भीतर टिकट को लेकर पैदा हुई नाराजगी चुनावी मुकाबले को और रोचक बना रही है। नाम वापसी के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ होगी कि मैदान में कितने प्रत्याशी रहेंगे।
एमबीपीजी छात्रसंघ चुनाव में रैली पर पुलिस की सख्ती, 18 नामजद समेत 40-50 अज्ञात पर मुकदमा
हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव के बीच तिकोनिया क्षेत्र में निकली एक रैली को लेकर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। कोषाध्यक्ष पद के प्रत्याशी मुकेश पांडे के समर्थन में निकली रैली में हाईवे घेरकर यातायात बाधित करने, राहगीरों और फड़-रेहड़ी वालों से गालीगलौज तथा मारपीट के आरोप में पुलिस ने 18 नामजद समेत 40-50 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
वरिष्ठ उपनिरीक्षक रोहताश सिंह की तहरीर के अनुसार 11 सितंबर को कुछ छात्र-छात्राओं और अन्य लोगों ने तिकोनिया, एमबीपीजी कॉलेज, नैनीताल-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग और ठंडी सड़क पर वाहनों के साथ रैली निकाली।
पुलिस का आरोप है कि रैली में शामिल लोग वाहनों पर बड़े-बड़े झंडे लहरा रहे थे और खतरनाक तरीके से जिगजैग वाहन चला रहे थे। इस दौरान सड़क पर यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस के अनुसार रैली के दौरान राह चलते लोगों के साथ गालीगलौज और अभद्रता की गई। विरोध करने पर मारपीट के आरोप भी सामने आए हैं। फड़, फेरी, रेहड़ी और ठेली लगाने वालों के साथ भी मारपीट की शिकायत पुलिस को मिली।
तहरीर में आरोप लगाया गया है कि रैली में शामिल लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग को घेर लिया था। इससे सामान्य यातायात के साथ ही आपातकालीन वाहनों के आवागमन में भी बाधा पैदा हुई। पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
एसएसपी के निर्देश पर पहचान शुरू
एसएसपी डा. मंजुनाथ टीसी के निर्देश पर पुलिस ने रैली में शामिल लोगों की पहचान शुरू कर दी है। एसपी सिटी हल्द्वानी मनोज कत्याल और अपर पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी अमित सैनी के नेतृत्व में कार्रवाई की जा रही है। प्रभारी निरीक्षक कोतवाली हल्द्वानी विजय मेहता ने पुलिस टीम गठित कर वीडियो और अन्य माध्यमों से लोगों की पहचान शुरू कराई है।
एसपी सिटी मनोज कत्याल ने स्पष्ट किया कि सड़क पर हुड़दंग, अराजकता, बलवा, यातायात में बाधा डालना अथवा आम लोगों में भय पैदा करने की कोशिश किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पुरानी पेंशन के लिए देहरादून में आज कर्मचारी-शिक्षकों का प्रदर्शन, सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने भी दिया समर्थन
देहरादून। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर रविवार को देहरादून में होने वाले कर्मचारी-शिक्षक आंदोलन को सेवानिवृत्त कर्मचारियों का भी समर्थन मिल गया है। पेंशन मार्च और मुख्यमंत्री आवास घेराव के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रदेशभर से कर्मचारी और शिक्षक देहरादून पहुंच रहे हैं।
राज्यभर के कर्मचारी और शिक्षक रविवार को देहरादून में एक दिवसीय धरना देंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास की ओर प्रदर्शन किया जाएगा। आंदोलन को लेकर कर्मचारी संगठनों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
जीपीडब्ल्यूओ के प्रांतीय अध्यक्ष चौधरी ओमबीर सिंह और महामंत्री जेपी चाहर ने बताया कि संगठन आंदोलन में कर्मचारियों और शिक्षकों के साथ खड़ा है। प्रदेशभर से आने वाले पेंशनर्स विकास भवन में एकत्र होंगे। इसके बाद वे ‘पुरानी पेंशन बहाल करो’ के नारे लगाते हुए धरना स्थल तक जाएंगे।
महामंत्री जेपी चाहर ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों की वर्षों की सेवा से जुड़ा अधिकार है। उनके अनुसार वर्ष 2004 से नई पेंशन व्यवस्था लागू होने के बाद पुरानी पेंशन बंद कर दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त विधेयक 2025 की आड़ में वर्तमान पुरानी पेंशन व्यवस्था को भी समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पेंशन से जुड़े फैसलों को लेकर कर्मचारियों और पेंशनर्स को एकजुट होकर अपनी बात सरकार तक पहुंचानी होगी।
आंदोलन की तैयारियों को लेकर शनिवार देर शाम जीपीडब्ल्यूओ की बैठक भी हुई। इसमें रविवार को होने वाले कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और प्रदेशभर से आने वाले कर्मचारियों व पेंशनर्स की भागीदारी को लेकर चर्चा की गई।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा केवल वर्तमान कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा भी जुड़ी है। यही कारण है कि अब सेवानिवृत्त कर्मचारी भी आंदोलन में अपनी भागीदारी दर्ज करा रहे हैं।


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