उत्तरकाशी में राज्य आंदोलनकारियों का सरकार के खिलाफ हल्ला बोल, ‘देवभूमि परिवार कानून’ पर भड़का आक्रोश; मूल निवास लागू न होने पर महाआंदोलन की चेतावनी

Spread the love


उत्तरकाशी, 15 जून। उत्तराखंड में प्रस्तावित ‘देवभूमि परिवार कानून’ को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को उत्तरकाशी में चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारियों और स्थानीय पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में सरकार की नीतियों, मूल निवास के मुद्दे तथा कथित रूप से उत्तराखंड के हितों की अनदेखी को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया गया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।


बैठक की अध्यक्षता समिति के जिला अध्यक्ष प्रताप सिंह चौहान ने की, जबकि केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेन्द्र पोखरियाल मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। इस दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सरकार द्वारा लाया जा रहा ‘देवभूमि परिवार कानून’ प्रदेश के मूल निवासियों के हितों के खिलाफ है और यदि सरकार ने समय रहते अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया तो राज्यभर में बड़े स्तर पर जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
गंगोत्री विधानसभा से सरकार के खिलाफ बिगुल
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेन्द्र पोखरियाल ने कहा कि उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार लगातार कमजोर किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे कानून और नीतियां बना रही है, जिनका सीधा असर राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप पर पड़ रहा है।
डॉ. पोखरियाल ने कहा कि सरकार की नीतियों ने वर्षों से शांत बैठे मूल निवासियों को जगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों में असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार प्रदेश में मूल निवास को अनिवार्य घोषित नहीं करती और स्थायी निवास व्यवस्था को समाप्त नहीं करती, तो राज्य आंदोलनकारी गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अलग उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए ऐतिहासिक आंदोलन चला था, उसी तर्ज पर एक नया महाआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
डॉ. पोखरियाल ने यह भी कहा कि जब से प्रदेश में स्थायी निवास की व्यवस्था लागू हुई है, तब से उत्तराखंड की मूल पहचान और स्थानीय लोगों के अधिकारों पर लगातार संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने इसे राज्य के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया।
“राज्य को बचाने के लिए युवाओं को आगे आना होगा”
वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी खुशहाल सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन में सरकार और कुछ मंत्रियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मूल निवास कानून लागू न होने का एक बड़ा कारण यह है कि सत्ता में बैठे कुछ प्रभावशाली लोग स्वयं को बाहरी राज्यों का मूल निवासी बताते हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया था। इसके लिए हजारों आंदोलनकारियों ने अपना जीवन संघर्ष में बिताया और अनेक लोगों ने बलिदान दिए।
बिष्ट ने कहा, “हमने अपनी जवानी इस राज्य के निर्माण के लिए लगा दी। आज हम उम्र के इस पड़ाव पर भी अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन सरकार राज्य की मूल भावना को कमजोर करने में लगी हुई है। अब समय आ गया है कि प्रदेश के युवा आगे आएं और उत्तराखंड की अस्मिता तथा अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करें।”
सुबोध उनियाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग
बैठक में राज्य आंदोलनकारियों ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के कुछ कथित विवादित बयानों पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। खुशहाल सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया कि मंत्री द्वारा राज्य आंदोलनकारी महिलाओं और देश के सैनिकों को लेकर की गई टिप्पणियां बेहद अमर्यादित और दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे बयान न केवल आंदोलनकारियों का अपमान हैं बल्कि उन सैनिकों का भी अपमान हैं जिन्होंने देश और प्रदेश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है।
आंदोलनकारियों ने मांग की कि सुबोध उनियाल सार्वजनिक मंच से सैनिकों और राज्य आंदोलनकारियों से माफी मांगें। साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की गई कि वे मंत्री को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें।
स्थानीय रोजगारों पर बाहरी लोगों के कब्जे का आरोप
बैठक में आंदोलनकारी चतर सिंह राणा ने स्थानीय रोजगारों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे पदों पर भी बाहरी लोगों की नियुक्तियां की जा रही हैं, जिनके लिए स्थानीय परिस्थितियों और भौगोलिक जानकारी की आवश्यकता होती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले डाकिया जैसे पदों पर स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलती थी, जिससे लोगों को बेहतर सेवाएं मिलती थीं। लेकिन अब ऐसे पदों पर भी बाहरी राज्यों के लोगों की नियुक्तियां हो रही हैं।
राणा ने कहा कि इससे स्थानीय युवाओं में निराशा बढ़ रही है और रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की राजनीति में बाहरी प्रभाव बढ़ता जा रहा है और उत्तराखंड सरकार अपने स्वतंत्र निर्णय लेने में असमर्थ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है।
कानून व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
चतर सिंह राणा ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजधानी देहरादून सहित विभिन्न क्षेत्रों में आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं और आम लोग असुरक्षा महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई गंभीर मामलों में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। राणा ने कहा कि सरकार कानून व्यवस्था सुधारने के बजाय केवल राजनीतिक नारों और घोषणाओं तक सीमित दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब केवल घोषणाएं नहीं बल्कि धरातल पर परिणाम देखना चाहती है।
“मूल निवास लागू हो, स्थायी निवास व्यवस्था समाप्त की जाए”
समिति के कोषाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पैन्यूली ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार मूल निवासियों की भावनाओं को समझने में असफल रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोग लंबे समय से मूल निवास कानून की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। इससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
पैन्यूली ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं, किसानों और स्थानीय निवासियों के हितों की रक्षा के लिए मूल निवास को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि स्थायी निवास की वर्तमान व्यवस्था समाप्त कर मूल निवास आधारित व्यवस्था लागू करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में अधिकारों की मांग करने वाले लोगों पर प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है, जबकि अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ अपेक्षित सख्ती दिखाई नहीं दे रही है।
आंदोलन को तेज करने का संकेत
बैठक में मौजूद वक्ताओं ने स्पष्ट संकेत दिए कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने कहा कि वे प्रदेश के हर जिले, ब्लॉक और गांव तक पहुंचकर लोगों को जागरूक करेंगे।
बैठक में यह भी कहा गया कि राज्य आंदोलन की भावना और उत्तराखंड निर्माण के मूल उद्देश्यों को बचाने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों को जोड़ने की रणनीति तैयार की जाएगी।
बड़ी संख्या में आंदोलनकारी रहे मौजूद
बैठक में जिला अध्यक्ष प्रताप सिंह चौहान, कोषाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पैन्यूली, चतर सिंह राणा, संतोष सेमवाल, धर्म सिंह मेहर, राम लाल नेगी, तेग सिंह राणा, मूलचंद सिंह पंवार, दीपक सिंह बिष्ट सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में आंदोलनकारियों ने एकजुट होकर प्रदेश में मूल निवास कानून लागू करने तथा राज्य के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। साथ ही सरकार को चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो प्रदेशभर में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।


Spread the love