प्रधानमंत्री मोदी के ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान से उत्तराखंड को नई दिशा की उम्मीद, धामी सरकार के सामने जमीनी चुनौती

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रुद्रपुर/देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘नशा मुक्त युवा फॉर

प्रधानमंत्री मोदी के ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान से उत्तराखंड को नई दिशा की उम्मीद, धामी सरकार के सामने जमीनी चुनौती

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ करते हुए देश के युवाओं से नशे के खिलाफ जनआंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया। इस अभियान का उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपने-अपने क्षेत्र में नशा विरोधी अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनने और समाज को नशे की गिरफ्त से मुक्त कराने का संकल्प लेने की अपील की।
अभियान की शुरुआत के साथ ही देशभर के लगभग 10 हजार स्थानों पर एक साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें एक करोड़ से अधिक युवाओं ने नशा मुक्त भारत का संकल्प लिया। इस जनभागीदारी अभियान का नेतृत्व MY Bharat के युवा स्वयंसेवक करेंगे। प्रत्येक रविवार खेल प्रतियोगिताएं, योग, वॉकाथॉन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, जागरूकता रैली, चित्रकला प्रतियोगिता और सामाजिक संवाद जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वयंसेवकों और संस्थाओं को 50वें, 75वें और 100वें सप्ताह पर सम्मानित भी किया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश ऐसे समय आया है जब उत्तराखंड के अनेक हिस्सों में नशे का जाल तेजी से फैलता दिखाई दे रहा है। सीमावर्ती जनपद ऊधमसिंहनगर से लेकर देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, काशीपुर, रुद्रपुर, सितारगंज, किच्छा और पर्वतीय क्षेत्रों तक नशे का कारोबार समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। कच्ची शराब, अवैध शराब, स्मैक, हेरोइन, चरस, गांजा और नशीली गोलियों का अवैध कारोबार युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है।
उत्तराखंड के अनेक शहरों और कस्बों में यह चिंता लगातार व्यक्त की जाती रही है कि नशे की उपलब्धता आसान होती जा रही है। कई स्थानों पर युवाओं के बीच जन्मदिन पार्टियों, निजी समारोहों और अन्य आयोजनों में शराब और अन्य मादक पदार्थों का सेवन सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक जैसा प्रस्तुत किया जाने लगा है। यह प्रवृत्ति समाज और परिवार दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस मानसिकता को नहीं बदला गया तो इसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने समय-समय पर नशा तस्करों के खिलाफ अभियान चलाने, पुलिस और विशेष कार्यबल के माध्यम से कार्रवाई तेज करने तथा युवाओं को जागरूक करने के प्रयास किए हैं। विभिन्न जिलों में अवैध शराब, स्मैक और नशीले पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। पुलिस द्वारा बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं और अनेक तस्करों को जेल भेजा गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नशा तस्करी करने वालों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
फिर भी चुनौती केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। नशे की समस्या का समाधान समाज, परिवार, विद्यालय, महाविद्यालय, पंचायत, नगर निकाय, धार्मिक संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों की संयुक्त भागीदारी से ही संभव है। यदि गांव-गांव, वार्ड-वार्ड और मोहल्लों में सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया जाए, अभिभावकों को सतर्क किया जाए तथा युवाओं को खेल, शिक्षा, रोजगार और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए तो इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किया गया “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान” उत्तराखंड के लिए विशेष महत्व रखता है। सीमावर्ती राज्य होने के कारण यहां मादक पदार्थों की तस्करी की चुनौती अलग प्रकार की है। ऐसे में केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि जनभागीदारी को आंदोलन का स्वरूप देना आवश्यक होगा। यदि प्रत्येक ग्राम सभा, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम, ब्लॉक और वार्ड स्तर पर नियमित नशा विरोधी कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तो इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
विद्यालयों और कॉलेजों के आसपास विशेष निगरानी, युवाओं के लिए खेल सुविधाओं का विस्तार, रोजगार के अवसरों में वृद्धि, परामर्श केंद्रों की स्थापना तथा नशा छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करना भी समय की आवश्यकता है। समाज के प्रभावशाली लोग, खिलाड़ी, कलाकार, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता यदि इस अभियान से जुड़ते हैं तो युवाओं पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का युवा स्वस्थ, जागरूक और नशा मुक्त होगा। उनका यह संदेश केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का आह्वान है। उत्तराखंड जैसे जागरूक राज्य में इस अभियान को जनआंदोलन का रूप देकर आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक नागरिक स्वयं से यह संकल्प ले कि वह न तो नशा करेगा और न ही किसी को नशे की ओर बढ़ने देगा। परिवार अपने बच्चों पर ध्यान दें, समाज संदिग्ध गतिविधियों की सूचना प्रशासन को दे और युवा स्वयं इस मुहिम के नेतृत्वकर्ता बनें। तभी प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को वास्तविक मजबूती मिलेगी और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड नशा मुक्त, स्वस्थ और सशक्त राज्य बनने की दिशा में प्रभावी कदम बढ़ा सकेगा।
संदेश स्पष्ट है— नशा किसी व्यक्ति का नहीं, पूरे समाज का दुश्मन है। यदि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर इस चुनौती का सामना करें, तो उत्तराखंड की युवा शक्ति नशे के अंधकार से निकलकर विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।


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