गदरपुर की 85 वर्षीय कृष्णावंती छाबड़ा नेत्रदान कर बनीं प्रेरणा, दो लोगों की आंखों में आएगी रोशनीपरिजनों ने पूरी की अंतिम इच्छा, नेत्रदान की मुहिम को मिली मजबूती

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गदरपुर। मानव जीवन की सार्थकता समाज के लिए किए गए कार्यों से होती है। गदरपुर के वार्ड नंबर छह स्थित कुंज विहार कॉलोनी निवासी 85 वर्षीय कृष्णावंती छाबड़ा ने अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में ऐसा संकल्प छोड़ा, जो उनके निधन के बाद भी दो लोगों के जीवन में रोशनी बनकर कायम रहेगा। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान कराया। इस मानवीय पहल से जरूरतमंद दो लोगों को दृष्टि मिलने की उम्मीद है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


कृष्णावंती छाबड़ा पत्नी स्वर्गीय रोशन लाल छाबड़ा का बीती रात आकस्मिक निधन हो गया। निधन के बाद परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। इस कठिन समय में उनके पुत्र सतनाम छाबड़ा, विपिन छाबड़ा और राकेश छाबड़ा तथा दामाद राजकुमार खुराना ने उनकी इच्छा को सर्वोपरि रखते हुए नेत्रदान कराने का निर्णय लिया। परिवार के इस निर्णय ने दुख की घड़ी को समाजसेवा के एक बड़े अवसर में बदल दिया।
परिजनों ने भारत विकास परिषद रुद्रपुर शाखा के नेत्रदान सहसंयोजक संजय ठुकराल से संपर्क किया और कृष्णावंती छाबड़ा के नेत्रदान की इच्छा की जानकारी दी। सूचना मिलते ही संजय ठुकराल ने नेत्रदान टीम को अवगत कराया और आवश्यक प्रक्रिया शुरू कराई। टीम ने परिवार के साथ समन्वय स्थापित करते हुए निर्धारित प्रक्रिया के तहत नेत्रदान संपन्न कराया।
महाराजा अग्रसेन ग्लोबल चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन एसके मित्तल तथा सीआर मित्तल नेत्रदान केंद्र के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. एलएम उप्रेती के निर्देशन में आई टेक्नीशियन मनीष रावत मौके पर पहुंचे। उन्होंने आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी कराते हुए नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई। चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद प्राप्त कॉर्निया जरूरतमंद दृष्टिबाधित लोगों के उपचार में उपयोगी होंगे।
कृष्णावंती छाबड़ा का नेत्रदान समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी छोड़ गया है। मृत्यु के बाद शरीर के अंग और नेत्र किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में उपयोगी बन सकते हैं। विशेष रूप से कॉर्निया की आवश्यकता वाले लोगों के लिए नेत्रदान उम्मीद की किरण बनता है। एक व्यक्ति का नेत्रदान दो लोगों को दृष्टि प्रदान करने की दिशा में सहायक हो सकता है। इस कारण नेत्रदान को मानव सेवा के महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल किया जाता है।
परिजनों ने बताया कि कृष्णावंती छाबड़ा की इच्छा थी कि उनके निधन के बाद उनके नेत्र जरूरतमंद लोगों के काम आएं। परिवार ने उनकी इस इच्छा को पूरा कर उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। परिवार के सदस्यों का कहना था कि प्रियजन के निधन का दुख गहरा है, मगर उनकी अंतिम इच्छा पूरी होने से यह संतोष अवश्य है कि उनके नेत्र किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में उजाला ला सकते हैं।
गदरपुर में लंबे समय से नेत्रदान को लेकर सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न संगठनों की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जाते रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में लोगों के बीच नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर किए जा रहे नेत्रदानों ने इस मुहिम को सामाजिक आधार दिया है। बताया गया कि नेत्रदान के क्षेत्र में लगातार सक्रियता के चलते गदरपुर की पहचान उत्तराखंड में उल्लेखनीय रूप से सामने आई है और नगर को सर्वाधिक नेत्रदान करने वाले नगरों में प्रमुखता से बताया जाता है।
कृष्णावंती छाबड़ा के नेत्रदान के बाद सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने छाबड़ा परिवार के इस निर्णय की सराहना की। लोगों ने कहा कि किसी अपने को खोने का दुख अत्यंत गहरा होता है, ऐसे समय में परिवार द्वारा नेत्रदान जैसा निर्णय लेना समाज के लिए प्रेरक संदेश है। इससे दूसरे परिवार भी मृत्यु के बाद नेत्रदान के प्रति जागरूक हो सकते हैं।
कृष्णावंती छाबड़ा के निधन पर भारत विकास परिषद रुद्रपुर शाखा, सोचो डिफ्रेंट संस्था, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल, जय भवानी जागरण मंडल, पंजाबी सभा, जियो जिंदगी, नगर पालिका परिषद, पुरातन शिव मंदिर, पुरातन सनातन धर्म मंदिर तथा सनातन धर्म मंदिर बुध बाजार सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्रद्धांजलि देने वालों में राजकुमार खुराना, वीरेंद्र ठुकराल, गदरपुर नगर पालिका अध्यक्ष मनोज गुम्बर मिंटू, ध्रुव छाबड़ा, अनिल छाबड़ा, अरुण छाबड़ा, अंशु छाबड़ा, कस्तूरी छाबड़ा, हार्दिक बाटला, उदय बटला, तन्मय दर्गन, रोहित छाबड़ा, रोहित खुराना, भविष्य, पार्थ छाबड़ा, आंचल ठुकराल, शिखर छाबड़ा, राकेश बटला और पवन दर्गन सहित परिवार एवं नगर के अनेक लोग शामिल रहे।
सभी ने कृष्णावंती छाबड़ा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही शोकाकुल परिवार को धैर्य, संबल और इस कठिन समय को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
कृष्णावंती छाबड़ा का नेत्रदान यह संदेश दे गया कि जीवन की अंतिम यात्रा के बाद भी मानव सेवा का सिलसिला जारी रखा जा सकता है। उनके नेत्र जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी लाने में सहायक होंगे। परिवार द्वारा अंतिम इच्छा पूरी किए जाने से गदरपुर में नेत्रदान की मुहिम को भी एक नई प्रेरणा मिली है।


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