हिंदूवादी सरकार में त्योहारों के दिन ही प्रदर्शन क्यों? धनतेरस पर अमित शाह के देहरादून दौरे को लेकर उठे सवाल

धनतेरस जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का देहरादून आगमन और सड़क पर प्रस्तावित राजनीतिक प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह है कि जिस सरकार की पहचान हिंदुत्व और सनातन संस्कृति के संरक्षण के दावों से जुड़ी है, क्या उसे देश के बड़े त्योहारों के दिन ही ऐसे राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए?

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर

धनतेरस पर देहरादून में लाखों लोग खरीदारी के लिए बाजारों का रुख करेंगे। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी को लेकर लोगों में विशेष उत्साह रहता है। ऐसे में यदि वीआईपी मूवमेंट और राजनीतिक प्रदर्शन के कारण यातायात बाधित होता है, तो इसका सीधा असर आम जनता, व्यापारियों और बाजारों की रौनक पर पड़ सकता है।

देहरादून की यातायात व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है। सामान्य दिनों में भी थोड़ी सी बाधा लगने पर सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। ऐसे में धनतेरस जैसे व्यस्ततम खरीदारी के दिन सड़क प्रदर्शन और बड़े नेताओं की आवाजाही से पैदा होने वाली स्थिति की जिम्मेदारी कौन लेगा?

यहां राजनीतिक दोहरे मापदंडों पर भी सवाल उठता है। कुछ दिन पहले दिल्ली में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन पर भाजपा से जुड़े लोगों और व्यापारिक संगठनों की ओर से व्यापार प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। तब सवाल उठे थे कि राजनीतिक प्रदर्शनों से दुकानदारों और आम नागरिकों को परेशानी क्यों होनी चाहिए।

अब वही सवाल भाजपा के सामने भी खड़ा है। यदि विपक्ष के प्रदर्शन से व्यापार प्रभावित होने की चिंता जायज है, तो सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं के कार्यक्रमों से बाजार और यातायात प्रभावित होने की आशंका पर सवाल क्यों नहीं उठने चाहिए?

आखिर हिंदूवादी सरकार में त्योहारों के दिन ही राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन क्यों? क्या त्योहारों की गरिमा, आम जनता की सुविधा और व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए? राजनीति अपनी जगह है, लेकिन धनतेरस करोड़ों लोगों की आस्था, परंपरा और शुभ खरीदारी का पर्व है।

सरकार से अपेक्षा है कि वह राजनीतिक कार्यक्रमों से पहले आम जनता की सुविधा, व्यापारियों के रोजगार और त्योहार की गरिमा का ध्यान रखे। क्योंकि त्योहार जनता के होते हैं, राजनीतिक दलों के शक्ति प्रदर्शन के लिए नहीं।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | अवतार सिंह बिष्ट, रुद्रपुर