दीपावली  से दो दिन पहले धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सोना-चांदी और बर्तन खरीदने के साथ झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। धार्मिक और लोक मान्यताओं के अनुसार, झाड़ू का संबंध घर की स्वच्छता और मां लक्ष्मी के स्वागत से जोड़ा जाता है।

ऐसे में अगर आप भी धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो जान लीजिए कि किस तरह की झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है और कितनी झाड़ू खरीदने की मान्यता है।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर

धनतेरस पर झाड़ू खरीदना क्यों है खास?

साफ-सुथरे और व्यवस्थित घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है। यही वजह है कि दीपावली से पहले लोग घर की सफाई करते हैं और मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी में जुट जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और इसे सुख-समृद्धि के आगमन से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर की दरिद्रता दूर होती है।

कौन सी झाड़ू खरीदनी चाहिए?

धनतेरस पर प्राकृतिक घास या सींक से बनी झाड़ू खरीदना अच्छा माना जाता है। मजबूत सींक वाली या फूल वाली झाड़ू को प्राथमिकता दी जाती है। कई लोग हाथ से बनी झाड़ू खरीदना भी पसंद करते हैं। हालांकि, झाड़ू के किसी एक खास प्रकार को लेकर सभी जगह एक सी परंपरा नहीं है।

कितनी झाड़ू खरीदना माना जाता है शुभ?

धनतेरस पर कितनी झाड़ू खरीदनी चाहिए, इसे लेकर भी कई मान्यताएं हैं। कुछ परंपराओं में विषम संख्या में झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अनुसार लोग 3, 5 या 7 झाड़ू खरीदते हैं। ऐसे में आप अपनी जरूरत के अनुसार झाड़ू खरीदें।

नई झाड़ू की पूजा कैसे करें?

धनतेरस पर खरीदी गई नई झाड़ू को इस्तेमाल करने से पहले पूजा करने की परंपरा है। इसके लिए शुभ समय में झाड़ू पर हल्दी, कुमकुम और अक्षत लगाकर मां लक्ष्मी का स्मरण करें। कई लोग झाड़ू पर सफेद धागा भी बांधते हैं, जो शुभ माना जाता है। फिर नई झाड़ू को दीपावली की सफाई के लिए उपयोग कर सकते हैं।

दिवाली पर मंदिर की सफाई

नई झाड़ू से दीपावली के दिन पूजा स्थल की सफाई करने की मान्यता है। इससे घर को साफ-सुथरा रखने और पूजा की तैयारी शुरू करने की परंपरा जुड़ी हुई है। झाड़ू खरीदने की संख्या, प्रकार और पूजा विधि को लेकर हर घर में अलग मान्यताएं हो सकती हैं। ऐसे में पारिवारिक परंपरा का पालन करना बेहतर है।