आज 6 नवंबर को देश भर में धनतेरस का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर ही धनतेरस होती है। इसे धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है।

इस खास दिन पर मां लक्ष्मी और कुबेर देवता के साथ-साथ भगवान धन्वंतरि की भी पूजा होती है। धनतेरस पर लोग अपनी पसंद और बजट के हिसाब से सोने-चांदी, पीतल और कांसे के बर्तन वगैरह खरीदते हैं। वहीं धनतेरस की शाम में यम दीपदान करने की भी खास परंपरा है। शाम में घर की चौखट पर यमराज के नाम का दीया जलाया जाता है।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर

धार्मिक मान्यता है कि यम दीपदान से पूरे परिवार को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है और उनकी कृपा हर एक सदस्य पर हमेशा बनी रहती है। ऐसे में एक कन्फ्यूजन ये भी बना रहता है कि आखिर इस दिन घर में कुल कितने दीए जलाने चाहिए? तो चलिए जानते हैं कि आखिर इसका सही जवाब और सही विधि क्या है? साथ ही जानें इस यम दीपदान के वक्त कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए और इसके लिए शुभ मुहूर्त क्या है?

धनतेरस पर कितने दीए जलाएं?

मान्यता है कि धनतेरस की शाम में पूरे घर में कुल 13 दीए जलाने चाहिए। घर के अलग-अलग कोनों में इन 13 दियों को जलाने की परंपरा है। पहला दीया यमराज के नाम से घर के मुख्यद्वार पर रखने की परंपरा है। ध्यान रहें कि यहां पर रखा दीया दक्षिण दिशा की ओर हो। घर के मंदिर और मुख्यद्वार के साथ-साथ तुलसी के पौधे के पास एक-एक दीया जलाया जाता है। एक दीया आप घर की छत पर भी रख दें। इसी के साथ किचन, घर की खिड़की या फिर पानी रखने वाली जगह पर दीए रख सकते हैं। ध्यान रखें कि कुल मिलाकर सारे दीए 13 ही हो।

यम दीपदान कैसे करें?

धनतेरस पर यम दीपदान जरूर करें। हिंदू धर्म में इस दान का खास महत्व होता है। माना जाता है कि परिवार में अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है और यमराज खुद अपनी कृपा पूरे परिवार पर बरसाते हैं। यम का दीया आप आटे से बनाएं। इस दीए में चार बाती लगाइए। ध्यान रखें कि इस दीए में सिर्फ सरसों का तेल ही डालें। शाम के समय प्रदोष काल के दौरान पूजा करने के बाद आप घर की चौखट के पास ये दीया जला दें। अगर आप अपार्टमेंट में रहते हैं तो दीया मेनडोर के पास जलाएं। वहीं अगर आपका घर है तो इस दीए को गेट के बाहर रखें। कोशिश करें कि दीया साफ जगह ही रखा हो। इसे आप अनाज के ऊपर भी रख सकते हैं।

यम दीपदान का मंत्र क्या है?

यमराज के नाम से जो दीया आप घर के बाहर जलाने वाले हैं इसके साथ एक खास मंत्र भी पढ़ें। सिर्फ दीया जलाकर घर के अंदर लौट ना आएं। परंपरा के हिसाब से दीया जलाते वक्त ही इस मंत्र का जाप करना चाहिए। इस मंत्र का मतलब है कि हे सूर्यपूत्र यमराज त्रयोदशी पर आपके लिए दीपदान कर रहे हैं। आप प्रसन्न हो और मुझे और मेरे परिवार को अकाल मृत्यु के भय से बचाइए। नीचे देखें ये मंत्र-

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन शमया सह।

त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥

यम दीपदान का मुहूर्त

नियम के अनुसार यम दीपदान प्रदोष काल में जलाना चाहिए। पंचांग के हिसाब से 6 नवंबर को प्रदोष काल का समय शाम 5:33 बजे से रात में 6:51 बजे तक रहेगा। इस बीच ही आप यम दीपदान वाले दीए समेत घर में कुल 13 दीए जला दें।

यम दीपदान के वक्त दीए के नीचे क्या रखें?

सबसे पहले तो ये समझ लें कि यम का दीपक घर में जलाते वक्त हड़बड़ी नहीं करनी है। दीए के नीचे आप गेहूं या थोड़े से चावल रख सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि दीया ऐसी जगह ना हो कि वहां पर हवा आए वो बुझ जाए। साथ ही मुख्यद्वार पर रखते वक्त ध्यान दें कि पर्दे उससे दूर ही हो।