उत्तराखंड,देहरादून/नैनीताल/चमोली/पिथौरागढ़, 14 अगस्त। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। शुक्रवार को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से सड़क दुर्घटना, सुरंग हादसे और भूस्खलन की कई घटनाएं सामने आईं। नैनीताल में पर्यटकों से भरा टेंपो ट्रैवलर 100 फीट गहरी खाई में जा गिरा, चमोली के पीपलकोटी में निर्माणाधीन सुरंग में मलबा और पानी भरने से सात कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि पिथौरागढ़ के मुनस्यारी क्षेत्र में भारी बारिश के कारण भूस्खलन से कई मार्ग बंद हो गए और कई इलाकों का संपर्क टूट गया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
नैनीताल में खाई में गिरा पर्यटकों से भरा टेंपो ट्रैवलर
नैनीताल जिले के मल्ला रामगढ़ क्षेत्र में हरियाणा के पर्यटकों से भरा एक टेंपो ट्रैवलर दुर्घटनाग्रस्त होकर 100 फीट गहरी खाई में जा गिरा। हादसे के समय वाहन में 22 लोग सवार बताए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, वाहन भवाली से मुक्तेश्वर की ओर जा रहा था। मल्ला रामगढ़ में लक्ष्मीखान तिराहे से लगभग एक किलोमीटर आगे चालक का वाहन पर नियंत्रण समाप्त हो गया। इसके बाद वाहन पैराफिट तोड़ते हुए गहरी खाई में जा गिरा।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और राहत दल ने घायलों को खाई से बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामगढ़ पहुंचाया। दुर्घटना में घायल छह लोगों को बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक पर्यटक वाहन और पेड़ के बीच फंस गया था। उसे बाहर निकालने के लिए विशेष उपकरण और चेन मंगाई गई। राहत और बचाव कार्य कई घंटों तक जारी रहा।
पीपलकोटी टनल हादसे में सात कर्मचारियों की मौत
चमोली जिले के मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग में गुरुवार शाम बड़ा हादसा हो गया। भूस्खलन के कारण सुरंग के भीतर अचानक मलबा और पानी भर गया, जिससे वहां काम कर रहे कर्मचारी फंस गए।
हादसे के समय सुरंग के भीतर 22 कर्मचारी मौजूद थे। रातभर चले रेस्क्यू अभियान के दौरान 19 कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया गया, जबकि सात लोगों की मौत हो गई। तीन कर्मचारियों की तलाश अभी भी जारी है।
मृतकों की पहचान टिहरी गढ़वाल निवासी प्रदीप पंवार, चमोली निवासी मुकेश सिंह, उत्तर प्रदेश के दुर्गा शर्मा, विजय हंसदा और जितेंद्र कुमार तथा छत्तीसगढ़ के लोकेश्वर और भुनेश्वर के रूप में हुई है।
लापता कर्मचारियों में झारखंड निवासी लुकास टोपनो और छत्तीसगढ़ निवासी चेतन पोयाम तथा देवनाथ शामिल हैं।
घायलों का अस्पताल में उपचार जारी
हादसे में घायल कर्मचारियों का उपचार गोपेश्वर जिला चिकित्सालय में चल रहा है। इनमें झारखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई कर्मचारी शामिल हैं।
बिहार निवासी रोहित पांडे को बेहतर उपचार के लिए श्रीनगर बेस अस्पताल भेजा गया है, जबकि पश्चिम बंगाल निवासी गोविंदो मंडल को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक लगातार घायलों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी की टीमें जुटीं
टनल के भीतर पानी और मलबा जमा होने के कारण राहत और बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं।
गढ़वाल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप ने बताया कि लगातार बारिश के कारण रेस्क्यू अभियान प्रभावित हो रहा है। मशीनों की सहायता से मलबा हटाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पूरे क्षेत्र को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित करके प्रत्येक स्थान की बारीकी से जांच की जा रही है।
घटनास्थल पर पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने सुरंग के भीतर जाकर बचाव अभियान की स्थिति का जायजा लिया और विभिन्न एजेंसियों के अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुरंग में फंसे शेष कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी संसाधनों और तकनीकी विशेषज्ञता का पूरा उपयोग किया जाए।
उन्होंने चमोली जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल भी जाना और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
मुनस्यारी में भूस्खलन से बिगड़े हालात
पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी क्षेत्र में शुक्रवार सुबह से लगातार मूसलधार बारिश होती रही। भारी बारिश के कारण थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग के ला-झेकला क्षेत्र में जबरदस्त भूस्खलन हुआ।
पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर सड़क पर आ गए, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।
थल-मुनस्यारी और जौलजीबी-मुनस्यारी मार्ग बंद होने से मुनस्यारी तहसील का संपर्क प्रभावित हो गया है। क्षेत्र के सभी नदी-नाले उफान पर हैं और कई स्थानों पर लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं।
2009 की त्रासदी की यादें हुईं ताजा
ला-झेकला क्षेत्र पहले भी बड़े भूस्खलन का केंद्र रह चुका है। सात अगस्त 2009 को यहां हुए भीषण भूस्खलन में 44 लोगों की जान चली गई थी।
इस बार भी लगातार बढ़ते जलस्तर और पहाड़ियों से गिर रहे मलबे ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
बादल फटने की सूचना से मचा हड़कंप
मुनस्यारी क्षेत्र में बादल फटने की सूचना के बाद लोगों में दहशत फैल गई। सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें पहाड़ियों से तेज बहाव के साथ मलबा सड़कों पर आता दिखाई दे रहा है।
हालांकि प्रशासन के अनुसार अभी तक किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
प्रशासन ने सड़क से मलबा हटाने और मार्ग को दोबारा खोलने का कार्य शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने पौड़ी की दो परियोजनाओं के लिए 6.76 करोड़ रुपये किए स्वीकृत
इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पौड़ी और कोटद्वार विधानसभा क्षेत्रों में सड़क और पुल निर्माण से जुड़ी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए 6.76 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत करने का अनुमोदन दिया है।
विकासखंड कल्जीखाल के कांसखेत-असगढ़-घंडियालधार-अलासू-कुनकुली मोटर मार्ग के किलोमीटर 13 से 17 के बीच सड़क सुधार कार्य के लिए 3.45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होगा।
14 से 17 अगस्त तक ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने 14 से 17 अगस्त तक प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। देहरादून, नैनीताल और बागेश्वर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है।
मौसम निदेशक डॉ. सी.एस. तोमर के अनुसार, आगामी दिनों में प्रदेशभर में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है।
जिला प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों से दूर रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
उत्तराखंड में एक ही दिन के भीतर सामने आई इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में मानसून के दौरान अतिरिक्त सतर्कता कितनी आवश्यक है। लगातार हो रही बारिश के बीच प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और राहत एजेंसियां पूरी मुस्तैदी के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
