रचनात्मक कांग्रेस के कार्यक्रम में गूंजा जंगल-जमीन का सवाल, जनहित के मुद्दों पर मंथन

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रुद्रपुर। रचनात्मक कांग्रेस के कार्यक्रम में लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और जनभागीदारी से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में मंच पर मौजूद वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखते हुए समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं को मजबूती से उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में जंगल-जमीन का मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

कार्यक्रम के आयोजक एवं प्रमुख संयोजक भुवन पाठक के साथ प्रभात पाल, ओंकार ढिल्लों, विक्रम विर्क, हरजिंदर सिंह विर्क, करमजीत सिंह चाना, देवेंद्र शाही, जेपी जनार्दन सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

मंच से वक्ताओं ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों के अधिकार, पर्यावरण संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों पर समुदाय की भागीदारी जैसे विषयों को लेकर भी चर्चा हुई।

वक्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्र के अनुभव साझा किए और कहा कि आम नागरिकों की समस्याओं को केवल चर्चा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से संबंधित मंचों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय तथा वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे।

रचनात्मक कांग्रेस की ओर से बताया गया कि यह मंच सामाजिक संगठनों, विषय विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, कलाकारों, श्रमिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा जन आंदोलनों से जुड़े लोगों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास कर रहा है। उद्देश्य नागरिक सहभागिता को बढ़ाना तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर व्यापक संवाद स्थापित करना बताया गया।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर उपस्थित सभी वक्ताओं ने अपनी-अपनी बात रखी। जंगल-जमीन का सवाल पूरे कार्यक्रम में प्रमुख मुद्दे के रूप में उभरकर सामने आया। वक्ताओं ने प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय समुदायों के अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियों पर सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता जताई।

अब देखना यह होगा कि रचनात्मक कांग्रेस की ओर से उठाए गए इन मुद्दों को आने वाले समय में किस रूप में आगे बढ़ाया जाता है और जनभागीदारी को धरातल पर कितना व्यापक बनाया जाता है।


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