दीपावली 2026: दीपों का महापर्व, मां लक्ष्मी के आगमन और भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी का उत्सव, जानिए कितने दीपक जलाना शुभ, कहां रखें और क्या है पौराणिक महत्व?
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | आध्यात्मिक विशेष अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
दीपावली केवल दीपक जलाने, मिठाइयां बांटने और घरों को रोशनी से सजाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय सनातन संस्कृति में प्रकाश, ज्ञान, धर्म, समृद्धि, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का महापर्व है। दीपावली का अर्थ है दीपों की अवली अर्थात दीपों की पंक्ति। यह पर्व हमें संदेश देता है कि जीवन में चाहे कितना भी अंधकार क्यों न हो, एक छोटा-सा दीपक भी उसे दूर करने की शक्ति रखता है।
हिंदू धर्म में दीपावली का विशेष धार्मिक, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, भगवान कुबेर और कुछ परंपराओं में मां सरस्वती की भी आराधना की जाती है। दीपक जलाना अज्ञान पर ज्ञान, अधर्म पर धर्म और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का प्रतीक माना जाता है।
दीपावली 2026 कब मनाई जाएगी?
वर्ष 2026 में दीपावली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दीपावली का मुख्य पर्व मनाने की परंपरा है। इस दिन प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है। पूजा का सटीक मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना चाहिए।
भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने से जुड़ी पौराणिक कथा
दीपावली से जुड़ी सबसे लोकप्रिय पौराणिक मान्यता त्रेतायुग की है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके और रावण का वध करने के बाद माता सीता तथा लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाया था। घरों, गलियों और महलों में दीपक जलाकर प्रभु श्रीराम का स्वागत किया गया था।
इसी परंपरा को आज भी दीपावली के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सत्य और धर्म का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन अंततः विजय सत्य की ही होती है।
समुद्र मंथन और मां लक्ष्मी का प्राकट्य
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं और असुरों के समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास की अमावस्या के अवसर पर मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। मां लक्ष्मी को धन, वैभव, ऐश्वर्य, सौभाग्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।
इसी कारण दीपावली की रात्रि में मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। भक्त अपने घरों को स्वच्छ करते हैं, दीपक जलाते हैं और प्रार्थना करते हैं कि परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और सद्बुद्धि बनी रहे।
भगवान गणेश की पूजा क्यों होती है?
दीपावली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा का विशेष विधान है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि और शुभारंभ का देवता माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि धन के साथ विवेक और सद्बुद्धि भी आवश्यक है। इसलिए लक्ष्मीजी के साथ गणेशजी की पूजा की जाती है। इसका आध्यात्मिक संदेश है कि व्यक्ति के जीवन में धन तभी सार्थक है, जब उसके साथ सदाचार, बुद्धि और विनम्रता भी हो।
भगवान कुबेर की पूजा का महत्व
सनातन धर्म में भगवान कुबेर को देवताओं का कोषाध्यक्ष और धन का अधिपति माना गया है। दीपावली पर कई परिवार मां लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर का पूजन भी करते हैं।
इसका उद्देश्य केवल धन प्राप्ति नहीं, बल्कि धन का सदुपयोग, आर्थिक स्थिरता, दान-पुण्य और परिवार की खुशहाली की कामना करना भी है।
दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए?
धार्मिक परंपराओं में दीपकों की कोई एक अनिवार्य संख्या निर्धारित नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अपनी परंपरा के अनुसार दीपक जलाए जाते हैं।
आमतौर पर 5, 11, 21, 51 और 101 दीपक जलाने की परंपरा देखने को मिलती है।
5 दीपक: पंचतत्व और जीवन के पांच आधारों का प्रतीक मानकर।
11 दीपक: शुभता और आध्यात्मिक मंगलकामना के भाव से।
21 दीपक: धार्मिक अनुष्ठानों और मंगल भावना के साथ।
51 दीपक: विशेष पूजा और दीप सज्जा के लिए।
101 दीपक: भव्य दीपोत्सव और विशेष धार्मिक आयोजन के लिए।
इन संख्याओं का महत्व अलग-अलग पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं से जुड़ा है। श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दीपक जलाना ही महत्वपूर्ण है। दीपकों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण मन की पवित्रता और पूजा का भाव है।
दीपावली की रात इन स्थानों पर अवश्य जलाएं दीपक
मुख्य द्वार पर दीपक: घर के मुख्य प्रवेश द्वार को स्वच्छ करके दोनों ओर दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी का स्वागत होता है। द्वार पर सुंदर रंगोली बनाकर दीपक सजाना भी शुभ माना जाता है।
पूजा घर में घी का दीपक: मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के समय शुद्ध घी का दीपक जलाने की परंपरा है। इसे सात्विकता, पवित्रता और शुभ ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
तुलसी के पौधे के पास दीपक: तुलसी को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। कार्तिक मास में तुलसी पूजन और दीपदान का विशेष महत्व है। तुलसी के पास सुरक्षित दूरी पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
घर की खिड़कियों और बालकनी में: घर के कोनों, खिड़कियों, बालकनी और आंगन में दीपक जलाने से पूरा घर प्रकाशमय हो जाता है। यह अंधकार को दूर करने और खुशियों का स्वागत करने का प्रतीक है।
रसोईघर में दीपक: रसोई को अन्नपूर्णा और परिवार के पोषण से जोड़कर देखा जाता है। कई परिवार रसोई में भी दीपक जलाकर अन्न और भोजन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इसे सुरक्षित स्थान पर रखें।
घर की तिजोरी और धन रखने के स्थान पर: मां लक्ष्मी की कृपा और आर्थिक समृद्धि की कामना से धन रखने के स्थान पर दीपक जलाने की परंपरा भी है।
घर के आंगन में: आंगन में दीपों की पंक्ति सजाना भारतीय संस्कृति की सुंदर परंपरा है। यह परिवार की एकता, खुशहाली और उत्सव का प्रतीक है।
यम दीपदान का पौराणिक महत्व
दीपावली से पहले कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस के अवसर पर यम दीपदान की परंपरा भी है। मान्यता के अनुसार, शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर भगवान यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हेम के पुत्र की अकाल मृत्यु का योग था। उसकी पत्नी ने अपने पति की रक्षा के लिए घर के बाहर दीपक जलाए और सोने-चांदी के आभूषण द्वार पर रख दिए। मान्यता है कि यमराज दीपों की चमक से आगे नहीं बढ़ सके और राजकुमार का जीवन बच गया। इसी कथा से यम दीपदान की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।
दीपावली और भगवान विष्णु का संबंध
मां लक्ष्मी को भगवान विष्णु की अर्धांगिनी माना जाता है। इसलिए दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के साथ भगवान विष्णु का स्मरण भी किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से लक्ष्मी समृद्धि की प्रतीक हैं और विष्णु पालन एवं धर्म की मर्यादा के प्रतीक हैं। इसका संदेश है कि धन और समृद्धि का उपयोग लोककल्याण तथा धर्म के कार्यों में होना चाहिए।
जैन और सिख धर्म में भी दीपावली का विशेष महत्व
दीपावली केवल हिंदू समाज तक सीमित नहीं है।
जैन धर्म में दीपावली का संबंध भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस से है। जैन परंपरा में माना जाता है कि कार्तिक अमावस्या को भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया था। उनके ज्ञान के प्रकाश की स्मृति में दीप जलाए जाते हैं।
सिख इतिहास में भी दीपावली का विशेष महत्व है। इस अवसर को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ग्वालियर के किले से 52 राजाओं को मुक्त कराकर अमृतसर पहुंचे थे। इस खुशी में स्वर्ण मंदिर को दीपों से सजाया गया था।
दीपक जलाने का आध्यात्मिक रहस्य
सनातन दर्शन में दीपक को केवल मिट्टी का पात्र और तेल या घी की लौ नहीं माना गया है। इसके भीतर जीवन का गहरा संदेश छिपा है।
मिट्टी का दीपक मानव शरीर का प्रतीक माना जा सकता है।
तेल या घी जीवन के संस्कार और साधना का प्रतीक है।
बाती मनुष्य के संकल्प और चेतना का प्रतीक है।
अग्नि ज्ञान, आत्मविश्वास और ईश्वरीय प्रकाश का प्रतीक है।
जिस प्रकार दीपक स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने ज्ञान, सेवा और अच्छे कर्मों से समाज में उजाला फैलाना चाहिए।
दीपावली पर दीपदान का महत्व
भारतीय संस्कृति में दीपदान को पुण्यकारी कार्य माना गया है। मंदिरों, धार्मिक स्थलों, नदी तटों और सार्वजनिक स्थानों पर दीपदान की परंपरा है। इसका भाव है कि हम अपने जीवन में प्रकाश के साथ-साथ दूसरों के जीवन में भी आशा और प्रसन्नता लाएं।
गरीब और जरूरतमंद परिवारों की सहायता करना, भोजन कराना, वस्त्र दान करना और किसी दुखी व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाना भी दीपावली के वास्तविक संदेश का हिस्सा है।
दीपावली पर इन बातों का रखें ध्यान
दीपक हमेशा सुरक्षित स्थान पर रखें। पर्दों, कपड़ों और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से जलते दीपक दूर रखें। मिट्टी के दीपकों में शुद्ध तेल या घी का प्रयोग करें। जहां संभव हो, पर्यावरण के अनुकूल दीपावली मनाएं और तेज ध्वनि तथा प्रदूषण से बचें।
दीपावली का वास्तविक संदेश
दीपावली हमें केवल घरों को रोशन करना नहीं सिखाती, बल्कि अपने भीतर के अज्ञान, अहंकार, ईर्ष्या, क्रोध और नकारात्मकता को दूर करने की प्रेरणा देती है। मां लक्ष्मी से धन के साथ सद्बुद्धि, भगवान गणेश से विवेक, भगवान विष्णु से धर्म पालन और भगवान श्रीराम से मर्यादा तथा आदर्श जीवन की प्रेरणा लेनी चाहिए।
आइए, इस दीपावली पर हम अपने घरों के साथ अपने मन और विचारों को भी प्रकाशमय बनाएं। किसी के जीवन में खुशियों का दीप जलाएं, रिश्तों में मिठास लाएं और समाज में प्रेम, भाईचारे तथा सद्भाव का संदेश फैलाएं।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की ओर से सभी देशवासियों को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।
संदेश: एक दीप घर के लिए जलाएं, एक दीप अपने मन के लिए और एक दीप किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाला लाने के लिए।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
दीपावली 2026: दीपों का महापर्व, मां लक्ष्मी के आगमन और भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी का उत्सव, जानिए कितने दीपक जलाना शुभ, कहां रखें और क्या है पौराणिक महत्व?हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | आध्यात्मिक विशेष

