इस स्थान को बद्री वन कहा जाता था। फिर एक ऐसी घटना हुई, जिसके बाद भगवान विष्णु को यह स्थान मिल गया और भगवान शिव माता पार्वती के साथ केदार क्षेत्र में चले गए।
बद्री वन में रहता था भगवान शिव का परिवार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में बद्री वन भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान था। हिमालय की सुंदर वादियों और शांत वातावरण के बीच यह स्थान उन्हें बेहद प्रिय था। यहां दोनों देवी-देवता आनंदपूर्वक निवास करते थे।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
कहा जाता है कि एक दिन भगवान विष्णु हिमालय में भ्रमण कर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर बद्री वन पर पड़ी। वहां का प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने इस स्थान को अपना निवास बनाने की इच्छा प्रकट की।
भगवान विष्णु ने रची अद्भुत लीला
प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने एक बालक का रूप धारण किया और बद्री वन में पहुंच गए। वहां पहुंचकर वह जोर-जोर से रोने लगे। उनकी आवाज सुनकर माता पार्वती का हृदय ममता से भर गया।
उन्होंने सोचा कि इतनी ठंड में यह छोटा बच्चा अकेला कैसे है। माता पार्वती उसे अपने पास ले आईं और चुप कराने का प्रयास करने लगीं।
माता पार्वती की ममता बनी भगवान विष्णु के लिए रास्ता
कथा के अनुसार, माता पार्वती ने बालक को घर के अंदर बैठाया और उसकी देखभाल करने लगीं। कुछ समय बाद भगवान शिव और माता पार्वती बाहर गए हुए थे। इसी अवसर का लाभ उठाकर भगवान विष्णु ने घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
जब भगवान शिव और माता पार्वती वापस लौटे तो दरवाजा बंद मिला। उन्होंने बालक से बाहर आने के लिए कहा, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया।
तब भगवान विष्णु ने बालक रूप में ही कहा कि उन्हें विश्राम करने दिया जाए और वे अब इस स्थान पर निवास करेंगे।
भगवान शिव और माता पार्वती पहुंचे केदारनाथ
प्रचलित मान्यता के अनुसार, भगवान शिव समझ गए कि यह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की लीला है। उन्होंने माता पार्वती के साथ उस स्थान को छोड़ने का निर्णय लिया।
इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती केदार क्षेत्र में जाकर रहने लगे। इसी कारण इस कथा में बद्रीनाथ को भगवान विष्णु और केदारनाथ को भगवान शिव का प्रमुख धाम बताया जाता है।
बद्रीनाथ और केदारनाथ का धार्मिक महत्व
बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु के बद्रीविशाल स्वरूप को समर्पित है, जबकि केदारनाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।
दोनों धाम उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के प्रमुख पड़ाव हैं। श्रद्धालुओं के लिए इन दोनों तीर्थस्थलों की यात्रा विशेष धार्मिक महत्व रखती है।
इस कथा से यह संदेश भी मिलता है कि भगवान विष्णु और भगवान शिव को अलग-अलग मानने के बजाय एक ही परम सत्ता के विभिन्न स्वरूपों के रूप में देखा जाता है।

