दिवाली हिंदू महीने कार्तिक की अमावस्या को मनाई जाती है. वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर 12:32 बजे समाप्त होगी. त्योहार की तारीख तय करते समय ‘प्रदोष काल’ (पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण माना जाने वाला शाम का समय) को भी ध्यान में रखा जाता है. इस अवसर पर, लोग अपने घरों को दीयों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं.
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा भी करते हैं और अपने परिवारों के लिए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं. कार्तिक कृष्ण अमावस्या प्रदोष समय में माता लक्ष्मी का समुद्र मंथन से जन्म हुआ था. इसी कारण प्रदोष काल की दीपावली सूर्योदय से लेकर सूर्योदय तक मान्य होती है, यानी 24 घंटे.
हमारे बुजुर्ग कहां करते थे दीपावली के 5 दिन तक किसी मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती. इसी कारण से लक्ष्मी पूजन के दिन माता लक्ष्मी का जन्म दिवस पूजन के रूप में दिन भर रात भर मनाया जा सकता है. मुहूर्त में करने वालों के लिए मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे.
स्थिर लग्न : वृश्चिक सुबह 7:08 से 9:22 तक,
कुंभ दोपहर 1 :17 से 2:52,
वृषभ लग्न संध्याकाल 6:07 से 8:06 तक
सिंह रात्रि 12:33 से 2:43 तक
दो स्वभाव वाले लग्न का स्थिर भाव सुबह 9:50 से 10: 50, दोपहर 2:52 से 3 :34 मिनट, रात्रि 8:06 से 9:11. मध्य रात्रि उपरांत 2:39 से 3 बचकर 42 मिनट तक.
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:41 30 सेकंड से 12:29 : 30 सेकंड.
दिन के चौघड़िया : सूर्योदय से 7:52, चंचल 10:41 से लाभ 12:05 से 1:30 तक, अमित 1:30 से 2:55 बजे तक शुभ सायं काल 4:19 से 5:44.
रात्रि के चौघड़िया : अमृत संध्याकाल 5:44 से 7:19 तक, चंचल 7:19 बजे से 8:55 तक, लाभ 12:06 से 1:41 तक, शुभ 3:17 बजे से 4 : 52 मिनट, अमृत 4:52 से सूर्योदय तक. केवल चौघड़िया को छोड़कर सभी मुहूर्त महाराष्ट्रीयन पंचांग के अंक लेकर गणितीय आधार पर किए गए है. 8 नवंबर को अमावस्या सुबह 11:27 से आरंभ होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 तक रहेगी.
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