बाबरी मस्जिद विध्वंस की यादें एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गई हैं. इस बार वजह कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी का एक इंटरव्यू है. ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने बताया कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना उन्होंने टेलीविजन पर देखी थी.

उस दृश्य को देखकर वह रो पड़ी थीं. सोनिया ने कहा कि उसी वक्त उन्हें अहसास हो गया था कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने जिस धर्मनिरपेक्ष भारत का सपना देखा था उसे बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी. उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है. उत्तर प्रदेश के अगले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को कांग्रेस पर हमला बोलने का नया मौका मिल गया है. बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने सोनिया गांधी के बयान को लेकर कांग्रेस और गांधी परिवार पर तीखा निशाना साधा है.

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर

सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में सिर्फ बाबरी मस्जिद विध्वंस पर अपनी प्रतिक्रिया ही नहीं बताई बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक गलतियों को भी स्वीकार किया. उन्होंने माना कि उनकी पार्टी की कुछ नाकामियों ने बीजेपी और उसकी हिंदुत्व की राजनीति के उभार में भूमिका निभाई. सोनिया के मुताबिक कांग्रेस कई मामलों में जरूरत से ज्यादा निश्चिंत रही और उसका रवैया भी ढीला था. उनके इस बयान के बाद बीजेपी ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक सोच और उसके पुराने रुख से जोड़ दिया है. प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सोनिया गांधी पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने बाटला हाउस का जिक्र करते हुए भी हमला बोला. इस बयानबाजी ने एक बार फिर बाबरी मस्जिद और अयोध्या से जुड़े पुराने राजनीतिक विवाद को चर्चा में ला दिया है.


बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी का X पोस्ट.

सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में क्या कहा?

‘द गार्जियन’ को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय की अपनी प्रतिक्रिया साझा की. उन्होंने बताया कि टीवी पर मस्जिद को गिरते देखकर वह रो पड़ी थीं. सोनिया ने कहा कि उन्हें उसी समय समझ आ गया था कि अब धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के विचार को बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी. उन्होंने इस विचार का श्रेय महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू समेत उन नेताओं को दिया जिन्होंने ऐसे भारत के निर्माण के लिए प्रयास किए थे.

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कांग्रेस की गलतियों को भी माना जिम्मेदार

सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में बीजेपी के उभार पर कांग्रेस की भूमिका को लेकर भी बात की. उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी की कुछ नाकामियों ने बीजेपी और उसकी कट्टर हिंदुत्व की राजनीति को आगे बढ़ने का मौका दिया. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि कई मायनों में हम जरूरत से ज्यादा निश्चिंत रहे. हमारा रवैया कुछ ऐसा था कि चीजें अपने आप चलती रहेंगी.’


बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी का X पोस्ट.

सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में क्या कहा?

‘द गार्जियन’ को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय की अपनी प्रतिक्रिया साझा की. उन्होंने बताया कि टीवी पर मस्जिद को गिरते देखकर वह रो पड़ी थीं. सोनिया ने कहा कि उन्हें उसी समय समझ आ गया था कि अब धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के विचार को बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी. उन्होंने इस विचार का श्रेय महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू समेत उन नेताओं को दिया जिन्होंने ऐसे भारत के निर्माण के लिए प्रयास किए थे.

कांग्रेस की गलतियों को भी माना जिम्मेदार

सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में बीजेपी के उभार पर कांग्रेस की भूमिका को लेकर भी बात की. उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी की कुछ नाकामियों ने बीजेपी और उसकी कट्टर हिंदुत्व की राजनीति को आगे बढ़ने का मौका दिया. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि कई मायनों में हम जरूरत से ज्यादा निश्चिंत रहे. हमारा रवैया कुछ ऐसा था कि चीजें अपने आप चलती रहेंगी.’

प्रदीप भंडारी ने बाटला हाउस का भी किया जिक्र

  • बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सोनिया गांधी के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा, ‘सोनिया गांधी बाबरी के लिए रोईं. सोनिया गांधी बाटला हाउस के लिए रोईं. सोनिया गांधी वोट बैंक के लिए कुछ भी करेंगी. कांग्रेस हिंदुओं से नफरत करती है.’
  • भंडारी ने आगे गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए आपातकाल और 1984 के सिख विरोधी दंगों का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी अपने बयान के जरिए इंदिरा गांधी को पीड़ित के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने राजीव गांधी के उस कथन का भी हवाला दिया जिसे 1984 के दंगों के संदर्भ में अक्सर उद्धृत किया जाता है. भंडारी ने कहा कि देश गांधी-वाड्रा परिवार को माफ नहीं करेगा.

राजनीति में सोनिया गांधी की भूमिका पर भी बोलीं

इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने अपने राजनीतिक सफर और कांग्रेस अध्यक्ष बनने के फैसले पर भी बात की. उन्होंने कहा कि राजनीति को लेकर उनके मन में हमेशा अविश्वास रहा. उन्होंने इसे महत्वाकांक्षा, लालच और पाखंड से भरा क्षेत्र बताया. सोनिया के मुताबिक 1998 में कांग्रेस मुश्किल दौर से गुजर रही थी और पार्टी के नेताओं के दबाव के बाद उन्होंने अध्यक्ष पद संभालने का फैसला किया. उन्होंने इसे अपने दिवंगत पति राजीव गांधी के प्रति कर्तव्य की भावना से जुड़ा फैसला बताया.

सोनिया गांधी ने यह भी बताया कि 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा कि उनके मन में यह बात साफ थी कि वह प्रधानमंत्री नहीं बनेंगी क्योंकि यह उनकी शख्सियत के अनुरूप नहीं था.

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