बागेश्वर की जिलाधिकारी अनुराधा पाल ने मामले को जांच के लिए पुलिस को सौंप दिया गया है. शुरुआती जांच में कई बातें सामने आ रही हैं. बाबा को अलग-अलग नामों […]
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ह रिद्वार में वर्ष 2020 से शुरू हुआ चंडीघाट का नया पुल चार साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। कई बार निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया जा चुका है, मगर काम समय पर नहीं हो पा रहा है।
समय बढ़ने के साथ ही इसकी लागत भी बढ़ रही है। पहले यह पुल 57 लाख में बनना था, लेकिन समय अधिक होने से अब इसकी लागत बढ़कर 65 करोड़ […]
प्र देश के सरकारी और अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के बच्चे संसदीय कार्यप्रणाली को अब पढ़ेंगे ही नहीं बल्कि किरदार भी निभाएंगे। राज्य के माध्यमिक विद्यालय और काॅलेजों में इस साल से युवा संसद का आयोजन किया जाएगा।
शासन में हुई बैठक में सचिव माध्यमिक शिक्षा और सचिव विद्यालयी शिक्षा रामनगर को इसे अतिरिक्त पाठ्यक्रम के रूप में शामिल करने के लिए कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। […]
महाराष्ट्र की प्रशिक्षु आइएएस पर फर्जी प्रमाणपत्र को लेकर लगे आरोपों का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। इस मामले के सामने आने के बाद अब उत्तराखंड के एक आइएएस अधिकारी दिव्यांगता के मामले में इंटरनेट मीडिया में चर्चाओं में हैं।
महाराष्ट्र की प्रशिक्षु आइएएस पर आरोप है कि उन्होंने फिटनेस और ओबीसी का गलत प्रमाण पत्र लगाकर सिविल सेवा पास की है। इस मामले में केंद्र सरकार ने जांच के […]
Uttrakhand को शिवभूमि कहा जाता है, क्योंकि यहां केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (Kedarnath Jyotirlinga) और शिवजी (Lord Shiva) का ससुराल भी है. इसलिए उत्तराखंड में हरेला पर्व की खास महत्व है. इस दिन लोग भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा भी करते हैं. कैसे मनाया जाता है हरेला पर्व हरेला पर्व की तैयारियों में लोग 9 दिन पहले से ही जुट जाते हैं. 9 दिन पहले घर पर मिट्टी या फिर बांस से बनी टोकरियों में हरेला बोया जाता है. हरेला के लिए सात तरह के अनाज, गेहूं, जौ, उड़द, सरसो, मक्का, भट्ट, मसूर, गहत आदि बोए जाते हैं. हरेला बोने के लिए साफ मिट्टी का प्रयोग किया जाता है. हरेला बोने के बाद लोग 9 दिनों तक इसकी देखभाल भी करते हैं और दसवें दिन इसे काटकर अच्छी फसल की कामना की जाती है और इसे देवताओं को समर्पित किया जाता है. हरेला की बालियां से अच्छे फसल के संकेत मिलते हैं. वैसे तो हरेला पर्व साल में तीन बार चैत्र, सावन और आश्विन माह में मनाया जाता है. लेकिन सावन माह की हरेला अधिक प्रचलित और महत्वपूर्ण होती है. इस दिन लोग कान के पीछे हरेला का तिनका लगाते हैं, गाजे-बाजे और पूजा-पाठ के साथ दिनभर पौधे लगाए जाते हैं. लोग बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं और हरेला की बालियां या तिनके भी आशीर्वाद के तौर पर एक-दूसरे भेजे जाते हैं. :
हरेला इस साल आज, यानी 16 जुलाई को मनाया जा रहा है, जो मॉनसून के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। यह राज्य की कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण समय […]
एक बृक्ष माँ के नाम थीम पर ओखलकांडा व ओखलड़ूंगा में वन कर्मियों संग ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने लगाये बृक्ष। रिपोर्ट।ललित जोशी /हर्षित जोशी।
नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल से दूर जनपद नैनीताल के ओखलकांडा क्षेत्र में भूमि संरक्षण वन प्रभाग रेन्ज के वन पंचायत पोखरी व पुटगाव मे संयुक्त रुप से हरेला पर्व की […]
हुकम सिंह कुंवर के पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के संरक्षक पद पर पुनः वापसी का चौतरफा स्वागत,
हल्द्वानी,पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के संरक्षक पद पर पुनः हुकम सिंह कुंवर की वापसी का चौतरफा स्वागत किया है, राज्य आंदोलनकारीयों ने हुकम सिंह कुंवर का स्वागत करते हुए कहा […]
आज दिनांक 16/07/2024 दिन मंगलवार को शैल सांस्कृतिक समिति (शैल परिषद) गंगापुर रोड रुद्रपुर में उत्तराखंड के लोक पर्व “हरेला”बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया।
आज दिनांक 16/07/2024 दिन मंगलवार को शैल सांस्कृतिक समिति (शैल परिषद) गंगापुर रोड रुद्रपुर में उत्तराखंड के लोक पर्व “हरेला”बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि […]
