एक तरफ विपक्ष मतदाता सूची से 13 करोड़ वोटर्स के नाम काटे जाने और लाखों-करोड़ों लोगों को नोटिस भेजे जाने को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगातार हमलावर बना हुआ है, तो वहीं दूसरी तरफ इस पूरे मामले का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है, जो बेहद हैरान करने वाला है। एसआईआर की इस प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट में ऐसी अजीबोगरीब और चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, जिन्हें जानकर हर कोई दंग रह जाए। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 99 प्रतिशत नोटिस मतदाताओं के नाम, उम्र और दर्ज विवरणों में भारी गड़बड़ियों के चलते ही जारी किए गए हैं
।अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
बीजेपी नेता बीएल संतोष ने सामने रखे बेहद तार्किक और हैरान करने वाले आंकड़े
विपक्षी दलों द्वारा मतदाता सूची में गड़बड़ियों और धांधली के लगाए जा रहे तमाम आरोपों का करारा जवाब देते हुए भारतीय जनता पार्टी के संगठन महासचिव बीएल संतोष ने सोशल मीडिया पर कुछ बेहद तार्किक और चौंकाने वाले आंकड़े सबके सामने रख दिए हैं। उन्होंने इन आंकड़ों के जरिए साबित कर दिया है कि वोटर लिस्ट में कितनी बड़ी विसंगतियां थीं।
बीएल संतोष ने जानकारी देते हुए बताया कि अकेले दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जारी किए गए नोटिसों में से करीब 6.4 प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जहां वोटर लिस्ट में सगे भाई-बहनों की उम्र के बीच का अंतर महज नौ महीने या उससे भी कम दर्ज पाया गया है। इसके अलावा, करीब 5 प्रतिशत नोटिस ऐसे मामलों में दिए गए हैं, जहां मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र का फासला 15 साल से भी कम का है। वहीं, लगभग ढाई प्रतिशत मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जहां माता-पिता और उनके बच्चे की आयु में 50 वर्ष से अधिक का अंतर दर्ज किया गया है। इतना ही नहीं, 2.3 प्रतिशत नोटिस उन लोगों को भेजे गए हैं, जहां मतदाता और उसके दादा-दादी की उम्र का अंतर 40 साल से भी कम पाया गया है, जबकि 4.2 प्रतिशत नोटिस ऐसे लोगों को दिए गए हैं जिनके नाम के आगे छह या उससे अधिक बच्चों के नाम वोटर लिस्ट में दर्ज हैं।
चुनाव आयोग ने अब तक हटाए 13 करोड़ मतदाताओं के नाम
देशभर में इन दिनों युद्ध स्तर पर चल रही एसआईआर की इस पारदर्शी प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग अब तक लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम या तो मतदाता सूची से हटा चुका है या फिर उन्हें इसके लिए पूरी तरह चिन्हित कर चुका है। आयोग द्वारा जारी किए गए ब्योरे के अनुसार, इन 13 करोड़ नामों में से करीब 2.8 करोड़ मतदाता ऐसे पाए गए जिनकी मौत हो चुकी है (मृत मतदाता), लगभग 3 करोड़ मतदाता अपने पते पर अनुपस्थित (गायब) मिले, 6.3 करोड़ लोग स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके हैं, और करीब 1 करोड़ ऐसे मतदाता थे जिनके नाम देश में अलग-अलग जगहों पर दो या उससे अधिक जगह पर दर्ज पाए गए थे। इन तमाम फर्जी और दोहरे आंकड़ों को सुधारने के लिए ही आयोग यह बड़ी कार्रवाई कर रहा है।
