रुद्रपुर। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक संदेश तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार अब ₹2,000 से अधिक के प्रत्येक UPI भुगतान पर 0.5 प्रतिशत शुल्क वसूलेगी। संदेश में उदाहरण देते हुए कहा गया है कि ₹5,000 के UPI भुगतान पर ₹25 और ₹10,000 के भुगतान पर ₹50 अतिरिक्त देने होंगे। इस दावे को लेकर व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के बीच चर्चा तेज हो गई है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
इस बीच 14 सितंबर 2026 को वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग की ओर से जारी भारत के राजपत्र की अधिसूचना सामने आई है। अधिसूचना में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A के तहत दो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को निर्दिष्ट किया गया है। इनमें रुपे द्वारा संचालित डेबिट कार्ड तथा ₹2,000 तक के UPI लेनदेन शामिल हैं।

राजपत्र में कहा गया है कि इन निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भुगतान करने या प्राप्त करने पर कोई बैंक या सेवा प्रदाता किसी व्यक्ति पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क अधिरोपित नहीं करेगा।
हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेश में राजपत्र की इसी व्यवस्था को आधार बनाकर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.5 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। राजपत्र में ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.5 प्रतिशत सरकारी शुल्क लगाए जाने का कोई स्पष्ट प्रावधान दिखाई नहीं देता। इसलिए वायरल दावे को राजपत्र की वास्तविक भाषा से अलग करके देखना जरूरी है।
रुद्रपुर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय जुनेजा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान आज व्यापार और आम जनजीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक बड़ी संख्या में लेनदेन UPI के माध्यम से हो रहे हैं। ऐसे में यदि भविष्य में किसी प्रकार का शुल्क लगाया जाता है तो उसका सीधा प्रभाव व्यापारियों और ग्राहकों दोनों पर पड़ सकता है।
जुनेजा ने कहा कि व्यापारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय नीति की स्पष्टता है। सोशल मीडिया पर किसी सरकारी निर्णय को लेकर भ्रम फैलने से व्यापारिक समुदाय में अनावश्यक असमंजस पैदा होता है। इसलिए सरकार और संबंधित विभाग को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन को लेकर वास्तविक व्यवस्था क्या है और बैंकों अथवा सेवा प्रदाताओं पर किस प्रकार के शुल्क लागू होंगे।
व्यापार मंडल की ओर से यह भी कहा गया कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सरल और कम लागत वाला बनाए रखना व्यापार तथा उपभोक्ताओं दोनों के हित में है। यदि किसी नए शुल्क की व्यवस्था प्रस्तावित या लागू की जाती है तो उसके प्रभाव की जानकारी व्यापारियों और आम लोगों तक स्पष्ट रूप से पहुंचनी चाहिए।
फिलहाल उपलब्ध 14 सितंबर 2026 के राजपत्र के आधार पर इतना स्पष्ट है कि ₹2,000 तक के UPI लेनदेन को शुल्क-मुक्त इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के रूप में निर्दिष्ट किया गया है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना कि सरकार ने ₹2,000 से अधिक के प्रत्येक UPI भुगतान पर 0.5 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है, राजपत्र के दिए गए पाठ से सीधे साबित नहीं होता।
ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रहे दावे को लेकर आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों को सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने से पहले संबंधित बैंक, UPI सेवा प्रदाता या आधिकारिक सरकारी सूचना से इसकी पुष्टि करना अधिक उचित होगा।
