अंकिता हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में CBI जांच की मांग, प्रवासी उत्तराखंडियों ने उत्तराखंड बंद को दिया समर्थन

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नई दिल्ली/देहरादून।अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रवासी उत्तराखंडी संगठनों ने एक बार फिर जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मामले की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सिटिंग जज की देखरेख में कराए जाने की मांग तेज कर दी है। उत्तराखंड सरकार द्वारा सीबीआई जांच की संस्तुति को प्रवासी संगठनों ने सकारात्मक कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि राज्य सरकार के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए केवल सीबीआई जांच पर्याप्त नहीं है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


प्रवासी उत्तराखंडी संगठनों की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि राज्य सरकार पर पहले भी इस मामले में लीपापोती और प्रभावशाली लोगों को बचाने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में न्याय सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी अनिवार्य है।
संगठनों ने मुख्यमंत्री के उस बयान को भ्रामक बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सीबीआई जांच की संस्तुति अंकिता के माता-पिता की इच्छा पर की गई है। प्रवासी नेताओं का कहना है कि मृतका के परिजन यह मांग पहले भी कर चुके थे, लेकिन तब सरकार ने इस दिशा में कोई निर्णय क्यों नहीं लिया, यह आज भी बड़ा सवाल है।
प्रवासी नेताओं ने स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी न्याय आंदोलन को तब तक जारी रखा जाएगा, जब तक मामले से जुड़े हर दोषी को कड़ी से कड़ी सजा नहीं मिल जाती। उन्होंने रविवार को आयोजित उत्तराखंड बंद को देशव्यापी समर्थन देने की घोषणा करते हुए इसे ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का संकल्प दोहराया।
वरिष्ठ प्रवासी नेताओं हरिपाल रावत और धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि उत्तराखंड बंद के दिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, प्रदेश के सभी केंद्रीय मंत्रियों और निर्वाचित सांसदों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। ज्ञापनों के माध्यम से उनसे अंकिता हत्याकांड में सक्रिय और सकारात्मक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। साथ ही चेतावनी भी दी गई कि यदि इस मामले में उदासीनता या नकारात्मक रुख अपनाया गया, तो संबंधित जनप्रतिनिधियों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि इस सिलसिले में प्रवासी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल भाजपा मीडिया विभाग के अध्यक्ष व सांसद अनिल बलूनी से भी मिला और उनसे सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच कराने की मांग रखी। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी मुलाकात कर इसी मांग पर जोर दिया गया।
प्रवासी नेताओं ने उत्तराखंड की जनता से अपील की है कि वे उत्तराखंड बंद को सफल बनाकर अंकिता को न्याय दिलाने की इस लड़ाई में एकजुटता का परिचय दें। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली में प्रवासी आंदोलनकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्षों से भी मुलाकात करेंगे और इस जघन्य अपराध में शामिल दोषियों को सजा दिलाने के लिए उनके सहयोग की मांग करेंगे।
गौरतलब है कि अंकिता भंडारी उत्तराखंड स्थित एक निजी रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं, जिसका स्वामित्व सत्तारूढ़ भाजपा के एक प्रभावशाली नेता के पुत्र के पास बताया गया। आरोप है कि अंकिता पर प्रभावशाली व्यक्तियों को खुश करने के लिए अनैतिक दबाव बनाया गया, विरोध करने पर उनके साथ मारपीट हुई और अंततः उनकी निर्मम हत्या कर दी गई।
हालांकि स्थानीय न्यायालय द्वारा मुख्य अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन VIP भूमिका, राजनीतिक संरक्षण और व्यापक साजिश से जुड़े कई गंभीर प्रश्न आज भी अनुत्तरित हैं। हाल ही में श्रीमती उर्मिला सनावर द्वारा किए गए खुलासों ने इन आशंकाओं को और अधिक मजबूत किया है।
प्रवासी संगठनों का कहना है कि जब तक इन सवालों का स्पष्ट और निष्पक्ष उत्तर नहीं मिलता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।


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