उत्तराखंड/देहरादून/रुद्रपुर। उत्तराखंड में रविवार को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस, सीमांत गांवों की बदहाल स्थिति, अंतरराज्यीय साइबर ठगी और विकास योजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण खबरें सामने आईं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 149 छात्राओं को स्मार्टफोन देकर सम्मानित किया और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया। दूसरी ओर, चीन और नेपाल सीमा के समीप स्थित कभी समृद्ध रहे गर्ब्यांग गांव का अस्तित्व काली नदी के कटाव और भू-धंसाव के कारण संकट में है। टनकपुर में साइबर ठगी की रकम एक बैंक खाते में जमा होने का मामला सामने आया है, जबकि राज्य के विभिन्न जिलों में सड़कों, पेयजल, मंदिरों और कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के लिए करोड़ों रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई है।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर
149 मेधावी छात्राओं को स्मार्टफोन देकर सम्मानित किया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 149 छात्राओं को स्मार्टफोन देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का पड़ना इस अवसर को विशेष बनाता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में बालिकाओं को शक्ति का स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य बेटियों का सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना भी है।
मुख्यमंत्री ने बेटियों को समाज की ताकत और राष्ट्र के भविष्य की नींव बताते हुए कहा कि उनके सशक्तीकरण से ही समाज और देश की प्रगति सुनिश्चित हो सकती है। उन्होंने राज्य में महिलाओं को सरकारी नौकरियों में दिए जा रहे 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का भी उल्लेख किया। इस व्यवस्था के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में पात्र महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिलता है।
यह अवसर बेटियों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ-साथ उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार करने का भी है। शिक्षा, सुरक्षा, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराना ही बालिका दिवस की भावना को सार्थक बना सकता है।
कभी ‘मिनी यूरोप’ कहलाता था गर्ब्यांग, आज गांव के अस्तित्व पर संकट
पिथौरागढ़ जिले में चीन और नेपाल की सीमाओं के समीप स्थित गर्ब्यांग गांव कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और भारत-तिब्बत व्यापार के कारण विशेष पहचान रखता था। लगभग 10,500 फीट की ऊंचाई पर काली नदी के दाईं ओर स्थित यह गांव एक समय ‘भारत का यूरोप’ और ‘मिनी यूरोप’ के नाम से प्रसिद्ध था। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध से पहले यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था।
उस दौर में तिब्बत के साथ व्यापार ने यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी थी। लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदल गईं। काली नदी के लगातार कटाव और भू-धंसाव ने गांव के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। नदी के कटाव के कारण जमीन खिसक रही है और ग्रामीणों को अपने घरों तथा पुश्तैनी भूमि के भविष्य की चिंता सता रही है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1976 में भू-धंसाव की समस्या के चलते आधे से अधिक परिवारों को ऊधम सिंह नगर जिले के सितारगंज क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया था। वर्तमान में गांव के लगभग 146 परिवार स्थायी रूप से रहते हैं, जबकि करीब 400 परिवार देश-दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फैल चुके हैं।
गांव में बिजली, पेयजल, संचार और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी आज भी बड़ी समस्या है। वर्ष 2020 में लिपुलेख दर्रे तक सड़क संपर्क विकसित होने से आवागमन में राहत मिली, लेकिन संचार सुविधाओं की स्थिति अब भी चिंताजनक बताई जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, मोबाइल फोन से कॉल करने के लिए भी कई बार लगभग छह किलोमीटर दूर छियालेख तक जाना पड़ता है।
ग्रामीण कृष्णा गर्ब्याल का कहना है कि सड़क बनने से सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन बिजली, पेयजल, संचार और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। वहीं, भूपेन्द्र ने काली नदी के बढ़ते बहाव और कटाव पर चिंता जताते हुए कहा कि गांव के अस्तित्व को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
जिलाधिकारी आशीष भटगांई के अनुसार, गर्ब्यांग को वाइब्रेंट विलेज योजना में शामिल किया गया है। प्रशासन का कहना है कि अगले वर्ष तक गांव में बिजली पहुंचाने और नदी के कटाव को रोकने के लिए आवश्यक कार्य किए जाएंगे।
वर्ष 1992 में भारत-चीन व्यापार फिर से शुरू होने के बावजूद गांव अपनी पुरानी आर्थिक खुशहाली हासिल नहीं कर सका। अब सवाल यह है कि सीमांत क्षेत्र में सड़क संपर्क के साथ-साथ बिजली, संचार, स्वास्थ्य और सुरक्षित आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं कब तक सुनिश्चित हो पाएंगी। सीमांत गांवों को आबाद रखना केवल स्थानीय विकास का विषय नहीं, बल्कि सामरिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
टनकपुर में साइबर ठगी की रकम जमा होने का मामला, अंतरराज्यीय लेनदेन की जांच
चम्पावत जिले के टनकपुर क्षेत्र में साइबर अपराध से जुड़ा मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, यूको बैंक की टनकपुर शाखा के एक खाते का इस्तेमाल विभिन्न राज्यों के लोगों से कथित रूप से ठगी गई रकम प्राप्त करने के लिए किया गया। इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कोतवाली टनकपुर में तैनात उपनिरीक्षक जितेंद्र सिंह बिष्ट को साइबर सेल चम्पावत और समन्वय पोर्टल के माध्यम से राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज चार शिकायतों की जांच सौंपी गई थी। जांच में यूको बैंक की टनकपुर शाखा के खाता संख्या 24490110040126 में संदिग्ध लेनदेन सामने आए।
पुलिस के मुताबिक, शेयर बाजार में मुनाफे, नौकरी और निवेश पर भारी रिटर्न का लालच देकर इंटरनेट मीडिया, फोन कॉल और ऑनलाइन ऐप के माध्यम से लोगों से धनराशि ट्रांसफर कराई गई थी। बैंक से प्राप्त केवाईसी और अन्य दस्तावेजों के आधार पर खाताधारक की पहचान ज्ञानखेड़ा, टनकपुर निवासी दीपक सक्सेना पुत्र पूरन सक्सेना के रूप में की गई है।
कोतवाल चेतन सिंह रावत के अनुसार, प्रारंभिक जांच में तेलंगाना, गुजरात, गुवाहाटी और जम्मू-कश्मीर से जुड़े लेनदेन सामने आए हैं। इन लेनदेन के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख रुपये जमा होने की जानकारी मिली है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक कुशल सिंह को सौंपी गई है।
पुलिस इस पूरे मामले में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है। हालांकि, जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष आने तक किसी की भूमिका को अंतिम रूप से दोषसिद्ध नहीं माना जा सकता। पुलिस का उद्देश्य धनराशि के स्रोत, लाभार्थियों और कथित साइबर नेटवर्क की कड़ियों का पता लगाना है।
यह मामला ऑनलाइन निवेश, नौकरी और अधिक मुनाफे के नाम पर होने वाली ठगी के प्रति सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित करता है। नागरिकों को अनजान लिंक, संदिग्ध निवेश योजनाओं और बिना सत्यापन के धन हस्तांतरण से बचना चाहिए।
धामी सरकार ने सड़क, पेयजल और मंदिरों के विकास के लिए मंजूर की करोड़ों की योजनाएं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के विभिन्न जिलों में सड़क निर्माण, सिंचाई, पेयजल, मंदिरों के विकास और सरकारी आवास से जुड़ी योजनाओं के लिए धनराशि स्वीकृत करने के प्रस्तावों को अनुमोदन दिया है। इसके साथ ही हरिद्वार में कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के लिए 61.42 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
चम्पावत जिले के टनकपुर और बनबसा के ग्रामीण क्षेत्रों में 10-10 किलोमीटर आंतरिक मार्गों के निर्माण के लिए 9.94 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। देहरादून के माजरी ग्रांट क्षेत्र में लालतप्पड़ से गोरखा बस्ती सागर सहित अन्य घरों तक दो किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 1.37 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
पिथौरागढ़ जिले में भूमिधारा से कुमालगांव तक खड़ंजा और पुलिया निर्माण के लिए 74.24 लाख रुपये की योजना को मंजूरी दी गई है। ग्राम पंचायत मझेड़ा में प्राथमिक विद्यालय भूगांव से नाघर, कुमाल्ता और स्यूसी तक संपर्क मार्ग बनाने के लिए 49.85 लाख रुपये स्वीकृत करने का अनुमोदन दिया गया है। इसी जिले की तौक भौरा फील्ड में सिंचाई गूल के निर्माण के लिए 44.13 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
इन योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और कृषि कार्यों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इनका वास्तविक लाभ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगा।
प्राचीन मंदिरों के विकास और सौंदर्यीकरण पर भी खर्च होगी धनराशि
ऊधम सिंह नगर जिले के जसपुर क्षेत्र में डाम स्थित प्राचीन मंदिर के सुदृढ़ीकरण के लिए 1.62 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। पिथौरागढ़ में गुरु गोरखनाथ मंदिर मेला स्थल के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए 32.53 लाख रुपये मंजूर हुए हैं।
अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र में शक्तिपीठ भौनादेवी मंदिर के लिए स्वीकृत 98.79 लाख रुपये की राशि में से 50 लाख रुपये जारी करने का अनुमोदन दिया गया है। पौड़ी गढ़वाल के कण्वाश्रम में सम्राट भरत की प्रतिमा स्थापित करने और सौंदर्यीकरण कार्य के लिए शेष 31.90 लाख रुपये जारी करने की मंजूरी दी गई है।
चम्पावत जिले के लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र में त्यौन्दर बाबा मंदिर फोर्ती, भूमिया बाबा मंदिर फोर्ती और महारुद्र मंदिर फोर्ती के सौंदर्यीकरण के लिए 20-20 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों से धार्मिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं और परिसर की व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।
कोटद्वार में पेयजल योजना के लिए 3.30 करोड़, कीर्तिनगर में सरकारी आवास
पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार नगर की सनेह नगरीय पेयजल योजना के तहत सनेह मल्ली में नलकूप खनन और उद्वहन जलाशय निर्माण के लिए 3.30 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। योजना का उद्देश्य क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता बेहतर करना है।
टिहरी जिले की कीर्तिनगर तहसील में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवासीय भवनों के निर्माण हेतु 1.213 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का काम शुरू करने के लिए 50 लाख रुपये भी मंजूर किए गए हैं।
कुंभ मेला-2027 के 18 कार्यों के लिए 61.42 करोड़ रुपये
हरिद्वार में आगामी कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के लिए भारत सरकार के अवस्थापना अनुदान के अंतर्गत प्रस्तावित 18 कार्यों के लिए 61.42 करोड़ रुपये स्वीकृत करने का अनुमोदन दिया गया है। इन कार्यों से कुंभ के दौरान आवश्यक बुनियादी ढांचे को विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। इसलिए स्वीकृत धनराशि का समय पर उपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में एक ओर बालिकाओं की शिक्षा और महिलाओं के सशक्तीकरण पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सीमांत गांवों का पलायन, प्राकृतिक कटाव, बुनियादी सुविधाओं की कमी और साइबर अपराध जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। विकास योजनाओं की घोषणाओं और स्वीकृतियों का वास्तविक मूल्यांकन तभी होगा, जब उनका लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे, सीमांत गांव सुरक्षित हों और लोगों को अपने क्षेत्र में सम्मानजनक जीवन जीने की सुविधाएं मिलें।
