रुद्रपुर। अखिल भारतीय बंगाली एकता मंच के बैनर तले रवींद्रनाथ टैगोर पार्क में पिछले छह महीनों से चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के दौरान बंगाली समाज की विभिन्न मांगों को लेकर संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने रुद्रपुर तहसीलदार दिनेश कुटौला से मुलाकात कर विस्तृत वार्ता की। इस दौरान तहसीलदार ने संगठन के संस्थापक सुब्रत कुमार विश्वास एवं आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि बंग भवन निर्माण की प्रक्रिया काफी हद तक पूर्ण हो चुकी है। इसके लिए स्थान भी चिह्नित कर लिया गया है तथा आवश्यक कागजी कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है। उन्होंने आंदोलनकारियों से धरना समाप्त करने का आग्रह करते हुए कहा कि समाज की अन्य मांगों पर भी जल्द सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
हालांकि प्रशासन के आश्वासन के बावजूद अखिल भारतीय बंगाली एकता मंच ने अपना आंदोलन समाप्त करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। संगठन के संस्थापक सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि बंगाली समाज पिछले कई वर्षों से केवल आश्वासन सुनता आ रहा है। अब समाज को आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहिए। जब तक बंगाली समाज को आरक्षण, बंग भवन निर्माण सहित अन्य मांगों पर ठोस और संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि बंग भवन की केवल कागजी प्रक्रिया पूरी होना पर्याप्त नहीं है। जब तक बंग भवन की वास्तविक नींव नहीं रखी जाती, तब तक धरना जारी रहेगा। इसके साथ ही रवींद्रनाथ टैगोर पार्क का सौंदर्यीकरण भी समाज की प्रमुख मांगों में शामिल है। यह पार्क बंगाली समाज की भावनाओं, संस्कृति और पहचान से जुड़ा हुआ है।
बंग भवन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर तहसीलदार ने रखी स्थिति
वार्ता के दौरान बंग भवन निर्माण में देरी को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और व्यक्तियों की ओर से सुब्रत कुमार विश्वास पर लगाए जा रहे आरोपों का मुद्दा भी उठा। संगठन के अनुसार, तहसीलदार दिनेश कुटौला ने बातचीत में बताया कि बंग भवन से संबंधित कागजी कार्रवाई काफी पहले पूरी की जा चुकी थी। हालांकि स्थान को लेकर विभिन्न स्तरों पर सहमति नहीं बन पाने और अन्य प्रशासनिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों के कारण प्रक्रिया में विलंब हुआ।
सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि बंग भवन किसी एक व्यक्ति, नेता या संगठन की निजी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे बंगाली समाज के सम्मान, पहचान और अधिकारों का प्रतीक है। इसका श्रेय किसी एक व्यक्ति या संगठन को देने के बजाय पूरे समाज के सामूहिक संघर्ष को सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक और सामाजिक स्तरों पर इस मुद्दे को लेकर अनावश्यक देरी और श्रेय लेने की राजनीति होती रही है। संगठन का कहना है कि बंग भवन निर्माण को लेकर किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए और समाज के हित को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।
आरक्षण के मुद्दे पर युवाओं में नाराजगी, आंदोलन कमजोर करने का आरोप
आंदोलन में शामिल युवाओं ने बंगाली समाज को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। युवाओं का आरोप है कि कुछ लोगों और संगठनों ने समय पर ठोस निर्णय लेने के बजाय बार-बार आश्वासन देकर आंदोलन की गति कमजोर की। उनका कहना है कि समाज के अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष की आवश्यकता थी, लेकिन आपसी मतभेदों, पद और प्रतिष्ठा की राजनीति के चलते महत्वपूर्ण समय निकलता चला गया।
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि शीतकालीन सत्र से पहले समाज की मांगों को लेकर जिस प्रकार की एकजुटता और दबाव बनाया जाना चाहिए था, वह नहीं बन पाया। युवाओं का मानना है कि यदि सभी संगठन एकजुट होकर संघर्ष करते तो आरक्षण की मांग को लेकर अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते थे।
सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि अखिल भारतीय बंगाली एकता मंच का इतिहास सड़क पर संघर्ष करने का रहा है और आगे भी संगठन समाज के अधिकारों के लिए इसी तरह संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने कहा कि समाज का हित किसी पद, प्रतिष्ठा या राजनीतिक स्वार्थ से बड़ा है।
प्रशासनिक आश्वासनों से नहीं रुकेगा आंदोलन
संगठन ने स्पष्ट किया कि तहसीलदार द्वारा दिए गए आश्वासन का स्वागत है, लेकिन जब तक मांगों पर वास्तविक कार्रवाई दिखाई नहीं देती, तब तक धरना समाप्त करने का कोई सवाल नहीं है।
मंच की प्रमुख मांगों में बंगाली समाज को आरक्षण का अधिकार दिलाना, बंग भवन का निर्माण शुरू कर उसकी नींव रखना, रवींद्रनाथ टैगोर पार्क का सौंदर्यीकरण तथा समाज से जुड़ी अन्य लंबित मांगों का समाधान शामिल है।
संगठन ने प्रशासन और सरकार से मांग की कि अब केवल बैठकों और आश्वासनों के माध्यम से समाज को संतुष्ट करने के बजाय सभी मांगों पर समयबद्ध एवं लिखित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ये आंदोलन पूरे बंगाली समाज के सम्मान की लड़ाई है
सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि पिछले छह महीनों से जारी यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष की लड़ाई नहीं, बल्कि बंगाली समाज की आने वाली पीढ़ियों के अधिकार, सम्मान और पहचान की लड़ाई है। जब तक समाज को उसका अधिकार नहीं मिलता, तब तक अखिल भारतीय बंगाली एकता मंच पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने कहा, “हमारा संगठन हमेशा सड़कों पर संघर्ष करके आगे बढ़ा है और आगे भी बढ़ता रहेगा। बंगाली समाज का हित ही हमारा सर्वोपरि निर्णय है। हमें सिर्फ आश्वासन नहीं, अपने अधिकारों की पूर्ण प्राप्ति चाहिए।”
आंदोलन में शामिल प्रमुख लोग: अखिल भारतीय बंगाली एकता मंच के संस्थापक सुब्रत कुमार विश्वास, धीरज विश्वास, राजेश विश्वास, भजन राय, अर्जुन सरकार, देवबाला, बिट्टू माझी, अभिमन्यु, राकेश हालदार, राजू विश्वास, निपेन विश्वास, उपेंद्र दास, राकेश दास, दिलीप मंडल, कौशल विश्वास, समीर राय, शंकर, अभिषेक, सुभाष, विक्की, रंजीत सहित अन्य आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
