उत्तराखंड में सितंबर के अंतिम सप्ताह में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। 26 और 27 सितंबर को राज्य में कई स्थानों पर भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 28 सितंबर को भी भारी बारिश की संभावना है, जबकि 29 सितंबर से फिलहाल कोई राज्यव्यापी चेतावनी नहीं है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
भारी बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने, सड़क और राजमार्ग बंद होने तथा नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है। मैदानी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
13 जिलों की स्थिति
1. देहरादून:
27 सितंबर को रेड अलर्ट है। भारी से अत्यंत भारी बारिश की आशंका है। देहरादून-ऋषिकेश, मसूरी और पर्वतीय संपर्क मार्गों पर मलबा और जलभराव चुनौती बन सकते हैं। 28 सितंबर को भी भारी बारिश की संभावना है।
2. टिहरी गढ़वाल:
27 सितंबर को रेड अलर्ट। लगातार बारिश से पहाड़ी सड़कों पर भूस्खलन और चट्टान गिरने का खतरा बढ़ा है। यात्रियों को मौसम देखकर ही आवागमन करने की जरूरत है।
3. पौड़ी गढ़वाल:
27 सितंबर को रेड अलर्ट। जिले के संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर मलबा आने और यातायात प्रभावित होने की आशंका है। भारी बारिश की स्थिति में नदी-गधेरों के आसपास विशेष सावधानी जरूरी है।
4. हरिद्वार:
27 सितंबर को रेड अलर्ट है। मैदानी क्षेत्र होने के कारण यहां भारी बारिश में जलभराव और निचले इलाकों में पानी जमा होने का खतरा महत्वपूर्ण है। 28 सितंबर को भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
5. उत्तरकाशी:
27 सितंबर को ऑरेंज अलर्ट है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, पत्थर गिरने और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा है। 28 सितंबर को भी जिले के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।
6. चमोली:
27 सितंबर को ऑरेंज अलर्ट। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ ठंड बढ़ी है और ऊंचे इलाकों में बर्फबारी भी दर्ज की गई है। भूस्खलन के कारण संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।
7. रुद्रप्रयाग:
27 सितंबर को ऑरेंज अलर्ट। केदारनाथ क्षेत्र समेत ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम खराब रहने की संभावना है। भारी बारिश में पहाड़ी मार्गों पर मलबा और पत्थर गिरने का जोखिम रहेगा।
8. नैनीताल:
27 सितंबर को ऑरेंज अलर्ट। 26 सितंबर को यहां लगातार बारिश दर्ज हुई और जिले में पहले ही भारी बारिश की चेतावनी के चलते एहतियाती कदम उठाए गए थे। नैनीताल-हल्द्वानी तथा पर्वतीय मार्गों पर पत्थर और मलबा गिरने का खतरा बना हुआ है।
9. बागेश्वर:
27 सितंबर को येलो अलर्ट है, लेकिन पिछले 24 घंटे में बारिश का असर गंभीर रहा। रवाईखाल के पास मलबा आने से गरुड़-बागेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हुआ, जिसे खोलने के लिए बीआरओ की मशीनें लगाई गईं। पिंडारी ग्लेशियर यात्रा भी खराब मौसम के कारण स्थगित की गई।
10. अल्मोड़ा:
27 सितंबर को येलो अलर्ट। लगातार बारिश में पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन और पत्थर गिरने की आशंका बनी हुई है। फिलहाल जिले के लिए रेड या ऑरेंज चेतावनी नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर मौसम अचानक बिगड़ सकता है।
11. चंपावत:
27 सितंबर को येलो अलर्ट। 26 सितंबर को जिला रेड अलर्ट वाले क्षेत्रों में था। पहाड़ी संपर्क मार्गों और संवेदनशील ढलानों पर मलबा आने का खतरा बना हुआ है।
12. ऊधमसिंह नगर:
27 सितंबर को येलो अलर्ट। 26 सितंबर को जिला रेड अलर्ट में था। मैदानी क्षेत्र में भारी बारिश की स्थिति में जलभराव, निचले इलाकों में पानी भरने और कृषि क्षेत्र प्रभावित होने की आशंका है।
13. पिथौरागढ़:
27 सितंबर को येलो अलर्ट, लेकिन जिले में पिछले दिन मौसम का व्यापक असर रहा। घाट-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मुन्ना बैंड के पास भूस्खलन के कारण 20 घंटे से अधिक समय तक यातायात बाधित रहा। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम ठंडा हुआ और सीजन की पहली बर्फबारी भी दर्ज हुई।
इस बार मानसून में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
उत्तराखंड में इस मानसून के दौरान बार-बार सड़क बंद होना, भूस्खलन, नदी-नालों का जलस्तर बढ़ना और दूरस्थ गांवों का संपर्क प्रभावित होना बड़ी समस्या रही है। अगस्त और सितंबर में अलग-अलग दौर में दर्ज आंकड़ों में सैकड़ों सड़कें प्रभावित हुई हैं; उदाहरण के तौर पर एक रिपोर्ट में 112 सड़कें बंद होने और दूसरी अवधि में 108 सड़कें बंद होने की जानकारी सामने आई थी। ये आंकड़े अलग-अलग तारीखों के हैं, इसलिए इन्हें 27 सितंबर की मौजूदा स्थिति का कुल आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
अगले 72 घंटे का मौसम
27 सितंबर:
देहरादून, टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार में रेड अलर्ट। उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग में ऑरेंज अलर्ट। बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट।
28 सितंबर:
मौसम में कुछ कमी के संकेत हैं, लेकिन भारी बारिश की चेतावनी अभी बनी हुई है। विशेषकर उत्तरकाशी, हरिद्वार और देहरादून में कहीं-कहीं भारी बारिश तथा गरज-चमक की संभावना है।
29 सितंबर के बाद:
आईएमडी के 26 सितंबर के राज्य-स्तरीय पूर्वानुमान में 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक कोई राज्यव्यापी चेतावनी जारी नहीं है। इसका मतलब यह नहीं कि हर जगह बारिश पूरी तरह समाप्त होगी; स्थानीय स्तर पर गरज-चमक या हल्की बारिश हो सकती है।
चारधाम यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण
भारी बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए चारधाम यात्रा 27 सितंबर तक स्थगित की गई है। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी से ठंड भी बढ़ी है।
HGT सावधानी संदेश: अगले 24–48 घंटे उत्तराखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। नदी, गधेरे, नालों और भूस्खलन संभावित ढलानों के पास जाने से बचें। पहाड़ों में सड़क खुली दिखाई देने पर भी ऊपर से पत्थर या मलबा आने का खतरा हो सकता है। अनावश्यक यात्रा टालना और जिला प्रशासन/मौसम विभाग के स्थानीय निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
