उत्तराखंड/रुड़की। सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना देख रहे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए अहम खबर है। रुड़की में 5 अक्टूबर से अग्निवीर भर्ती रैली शुरू होने जा रही है। भर्ती प्रक्रिया 23 अक्टूबर तक चलेगी। इसमें CEE-2027 में सफल अभ्यर्थियों को विभिन्न पदों पर भर्ती का मौका मिलेगा। भर्ती स्थल पर शारीरिक दक्षता परीक्षा के साथ अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच भी की जाएगी।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
भर्ती वर्ष 2027 के लिए आयोजित होने वाली रैली में 5 से 12 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सभी जिलों के CEE-2027 पास अभ्यर्थी अग्निवीर क्लर्क/स्टोर कीपर टेक्निकल पद के लिए शामिल होंगे। इसके बाद 13 से 19 अक्टूबर तक उत्तराखंड के सात जिलों के अग्निवीर जीडी अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रिया होगी।
अग्निवीर जीडी के लिए उत्तरकाशी, चमोली, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, देहरादून और हरिद्वार जिले के अभ्यर्थी पात्र होंगे। 20 अक्टूबर को अग्निवीर टेक्निकल और ट्रेड्समैन पदों के लिए भर्ती होगी। इसमें शैक्षिक योग्यता के अनुसार 8वीं और 10वीं पास युवाओं को अवसर मिलेगा।
भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड में निर्धारित तारीख और समय के अनुसार ही भर्ती स्थल पर पहुंचना होगा। उन्हें एडमिट कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर, ऑनलाइन पुलिस चरित्र प्रमाणपत्र, 20 रंगीन फोटो और शैक्षिक योग्यता से संबंधित सभी मूल प्रमाणपत्र साथ ले जाने होंगे। दस्तावेजों की कमी होने पर अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उत्तराखंड में सड़क हादसों का बढ़ता कहर, सात महीने में 775 मौतें
देहरादून। पर्यटन के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड में सड़क हादसे लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। इस साल के शुरुआती सात महीनों में ही सड़क दुर्घटनाओं में 775 लोगों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2025 में पूरे साल 1,285 लोगों की जान सड़क हादसों में गई थी। मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए वर्ष के अंत तक दुर्घटनाओं और मौतों का आंकड़ा चिंता बढ़ा सकता है।
राज्य के 13 जिलों में देहरादून, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की स्थिति सबसे गंभीर बताई गई है। जुलाई 2025 से जुलाई 2026 के बीच देहरादून में 264, ऊधम सिंह नगर में 342, हरिद्वार में 362 और नैनीताल में 196 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई।
पहाड़ी क्षेत्रों में तेज रफ्तार, लगातार लंबे समय तक वाहन चलाना, ओवरलोडिंग और गलत तरीके से ओवरटेक करना हादसों के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। हिल ड्राइविंग लाइसेंस के बिना पहाड़ी सड़कों पर वाहन चलाना भी जोखिम बढ़ाता है। इसके अलावा सड़क पर गड्ढे, कई स्थानों पर क्रैश बैरियर की कमी और रात के समय वाहन चलाना भी दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ाते हैं।
मैदानी क्षेत्रों में गलत दिशा में वाहन चलाना, नशे में ड्राइविंग, लापरवाही, वाहनों का खराब रखरखाव, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना और नो-पार्किंग जोन में वाहन खड़ा करना भी हादसों की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।
सरकार सड़क सुरक्षा के लिए करीब 800 करोड़ रुपये के बजट से विभिन्न उपाय कर रही है। दुर्घटना संभावित 179 ब्लैक स्पॉट में से 169 पर सुधार कार्य पूरा किए जाने का दावा है। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में क्रैश बैरियर लगाने के साथ खतरनाक स्थानों की मैपिंग और नई तकनीक के इस्तेमाल की भी योजना है।
उत्तराखंड परिवहन विभाग के उप आयुक्त शैलेश तिवारी के अनुसार तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना सड़क हादसों के प्रमुख कारण हैं। गलत दिशा में वाहन चलाने वालों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की जा रही है। यातायात नियमों का उल्लंघन पकड़ने के लिए सड़कों पर हाई-स्पीड कैमरे भी लगाए जा रहे हैं।
