

उत्तराखंड की राजनीति और समाजसेवा के वर्तमान परिदृश्य में अगर किसी नाम ने तेजी से जनमानस का विश्वास जीतते हुए एक नई उम्मीद जगाई है, तो वह नाम है — वरिष्ठ भाजपा नेता और समाजसेवी डॉ. केसी (किशोर) चंदौला। यह वह व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपने जीवन के दो सबसे बड़े धर्म — सेवा और समर्पण — को साथ लेकर जनता की भलाई के लिए एक अनोखा मॉडल खड़ा किया है। आज जब पूरे देश में हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और विकास की नई धारा बह रही है, ऐसे समय में रुद्रपुर से उठी यह सशक्त आवाज प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में निर्णायक रूप से उभर रही है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
डॉ. चंदोला की पहचान केवल एक भाजपा नेता तक सीमित नहीं है। वह चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के माध्यम से निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के जन-आंदोलन के प्रवर्तक हैं। यह पहल उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती है—क्योंकि यह राजनीति नहीं, मानवता का मिशन है।
ऑन रिकॉर्ड,कोरोना काल की ऐतिहासिक गवाही — शून्य मृत्यु, 1000 से अधिक मरीजों को नई जिंदगी
दुनिया इतिहास के सबसे कठिन दौर—कोरोना महामारी—की त्रासदी से गुजर रही थी, अस्पताल अस्त-व्यस्त हो रहे थे, लोग बेड, दवाइयों और ऑक्सीजन के लिए भटक रहे थे। उस दौर में चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एक अभूतपूर्व मिसाल बनकर सामने आया।
- कॉलेज में 1000 से अधिक कोरोना मरीज भर्ती हुए
- सभी स्वस्थ होकर घर लौटे
- एक भी कोरोना मरीज की मृत्यु नहीं हुई
यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि जनसेवा, चिकित्सा दक्षता और दिव्य मानवीय संवेदना का परिणाम था। आज भी अस्पताल पहुंचने वाले लोग साफ-सफाई, आॅक्सीजन की व्यवस्थित व्यवस्था, अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और मानवीय व्यवहार से प्रभावित हुए बिना नहीं रहते।
₹20 की साधारण पर्ची पर ब्लड टेस्ट, फुल बॉडी चेकअप और गंभीर बीमारियों का भी निशुल्क इलाज—यह अपने आप में एक क्रांति है।
रीति-रिवाज नहीं, सेवा है धर्म — RSS की पृष्ठभूमि से मिली कार्यशैली
बचपन से आरएसएस की विचारधारा और राष्ट्रवाद से प्रेरित डॉ. किशोर चंदोला का सेवा मॉडल किसी राजनैतिक शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के लिए दिया हुआ प्रण है।
उनकी बातों में हमेशा स्पष्टता, चेहरे पर विनम्रता और निर्णयों में दृढ़ता दिखाई देती है।
उनके जीवन का उद्देश्य कभी पद नहीं था—लोगों के दिलों में जगह बनाना था और वह बना भी ली।
धामी विकास मॉडल के पैरोकार — मिशन 2027 के सबसे सक्रिय रणनीतिक चेहरा
एक ओर अस्पताल में निशुल्क इलाज का दिव्य मॉडल है, तो दूसरी ओर राजनीति में धामी सरकार के विकास, सुशासन और पारदर्शिता मॉडल का प्रखर प्रचार।
डॉ. चंदोला पूरी स्पष्टता के साथ कहते हैं—
“जिस गति से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास किया है, 2027 में भाजपा की प्रचंड जीत सुनिश्चित है।”
वह जनसभाओं में हों, समाजिक मंचों पर हों या मेडिकल सेवा शिविरों में —
हर जगह उनका एक ही कथन प्रतिध्वनित होता है —
“विकास के भरोसे को राजनीतिक बहुमत में बदलना ही कर्म है।”
आज वह पूरा रुद्रपुर ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड में भाजपा के लिए संवाद, संपर्क और जनसहभागिता की नई लहर चलाने में जुटे हैं। वह प्रचार नहीं करते—जनसहयोग और जनविश्वास निर्मित करते हैं।
हिंदुत्व की जागृति और सामाजिक नेतृत्व का मेल
बाबा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के देशव्यापी हिंदुत्व जागरण अभियानों के बीच जब पूरे देश में सनातन चेतना का उभार दिखाई दे रहा है, उसी समय रुद्रपुर से उठी डॉ. किशोर चंदोला की आवाज ने भी हजारों लोगों को प्रेरित किया है।
उनके व्यक्तित्व में:
- राष्ट्रवाद,
- सनातन मूल्य,
- चिकित्सा सेवा,
- और सशक्त नेतृत्व
का अद्भुत समन्वय मिलता है। वह धर्म का प्रदर्शन नहीं — धर्म का पालन करते हैं। यही कारण है कि साधु–संत हो या युवा — सबके बीच उनकी प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है।
सम्मान की राह—समाज के लिए किए गए कार्यों की राष्ट्रीय स्वीकार्यता
डॉ. चंदोला के मानवीय कार्य केवल जनता ही नहीं, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी और इतिहास की दृष्टि में भी उल्लेखनीय हैं।
इसी कारण इस वर्ष उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद में स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मृति सम्मान के लिए उनका नाम प्रमुखता से विचाराधीन है। जनवरी में होने वाला यह सम्मेलन निश्चय ही ऐतिहासिक होगा—क्योंकि यह सम्मान केवल किसी व्यक्ति को नहीं,
समाजसेवा की उस विचारधारा को समर्पित होगा जो राजनीति से बड़ी है।
चिकित्सा सेवा से राजनीति तक — संकल्पों की श्रृंखला
2017 से लगातार डॉ. चंदोला की राजनीति और सामाजिक भागीदारी में तेजी आई।
उनकी सोच स्पष्ट थी—
“राजनीति स्वयं में लक्ष्य नहीं, समाज के लिए परिवर्तनकारी माध्यम होनी चाहिए।”
आज उन्हें रुद्रपुर और आसपास की जनता सिर्फ एक डॉक्टर, समाजसेवी या नेता के रूप में नहीं देख रही—
बल्कि एक ऐसे भविष्य के जननेता के रूप में देख रही है जो विकास, राष्ट्रवाद, पारदर्शिता और सेवा की चारों दिशाओं में संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है।
डॉक्टर, समाजसेवी, राजनैतिक नेता और एक नई संभावना
आज उत्तराखंड एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में है जिसमें:
- बौद्धिक क्षमता हो,
- जनसमर्थन हो,
- धरातल पर काम हो,
- और सेवा के प्रति प्रतिबद्धता हो।
डॉ. किशोर चंदोला इन चारों कसौटियों पर खरे उतरते हैं।
रुद्रपुर की जनता कहती है — उनका अस्पताल इलाज देता है,
भाजपा कार्यकर्ता कहते हैं — उनका नेतृत्व प्रेरणा देता है,
और समाज कहता है — उनकी ईमानदारी और सेवा भरोसा देती है।
भविष्य किसका होगा, यह जनता तय करेगी,
लेकिन इतना तय है कि
डॉ. किशोर चंदोला का नाम अब केवल रुद्रपुर तक सीमित नहीं—उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक भविष्य में निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है।




