
रुद्रपुर,शैल सांस्कृतिक समिति द्वारा प्राण प्रतिष्ठा के लिए सबसे पहले देवी-देवताओं की प्रतिमा को दक्ष स्थित मंदिर से कलश यात्रा के दौरान लाया गया गंगाजल से स्नान कराया। इसके पश्चात, मुलायम वस्त्र से मूर्ति को पोछने के बाद देवी-देवता के रंग अनुसार नए वस्त्र धारण कराए गए। इसके बाद प्रतिमा को मंदिर में सुनिश्चित जगह पर स्थापित किया गया। सभी मूर्तियो का खास तरीके से सिंगार किया गया, ब्राह्मणों के द्वारा बीज मंत्रों का पाठ कर प्राण प्रतिष्ठा की गई । पंचोपचार कर विधि-विधान से गोलज्यु महाराज एवं सभी देवी देवताओं की पूजा-अर्चना की गई।और अंत में आरती कर लोगों को प्रसाद वितरित किया ।
breaking newsआज सायं 6:00 बजे लगेगी। गोलज्यु महाराज की जागर ।
गुलज्यु महाराज की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रमुख यजमान की भूमिका मैं सपरिवार शैल सांस्कृतिक समिति रूद्रपुर के अध्यक्ष श्री गोपाल सिंह पटवाल, महामंत्री श्री दिवाकर पांडे, कृष्णा मिश्रा, गिरीश जोशी नेहा जोशी, जगन्नाथ भट्ट कमला भट्ट,आदि प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूर्व राज्य मंत्री सुरेश परिहार, डी,के दनाई ,राजेंद्र बोरा, दिनेश बम, सतीश लोहनी,सतीश ध्यानी, के के मिश्रा, हरिशचंद्र मिश्रा गगन कांडपाल , दिनेश चंद्र भट्ट, Dhiraj Bhat,श्रीमती सुधा पटवाल, श्रीमती विनीत पांडे, श्रीमती सुनीता नेगी, श्रीमती भगवती, श्रीमती आशा लोहनी, श्रीमती भगवती मेहरा, श्रीमती सुनीता पांडे, श्रीमती बीना लखेड़ा, श्रीमती सुधा जोशी, श्रीमती लीला दनाई , श्रीमती चंद्र बम श्रीमती चंद्रा बम,श्रीमती प्रेमचंद्र, श्रीमती किरण बोहरा, श्रीमती विनिता लखेडा, श्रीमती राधा बिष्ट, श्रीमती भावना बलोदी,आदि भक्तजन उपस्थित थे।


हिंदुस्तान Global Times/print media,शैल ग्लोबल टाइम्स,अवतार सिंह बिष्ट,
शास्त्रों और धर्माचार्यों के अनुसार, जब किसी प्रतिमा में एक बार प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है, तो वह प्रतिमा एक देवता में बदल जाती है।हिंदू धर्म परंपरा में प्राण प्रतिष्ठा एक पवित्र अनुष्ठान है, जो किसी मूर्ति या प्रतिमा में उस देवता या देवी का आह्वान कर उसे पवित्र या दिव्य बनाने के लिए किया जाता है। ‘
शास्त्रों और धर्माचार्यों के अनुसार, जब किसी प्रतिमा में एक बार प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है, तो वह प्रतिमा एक देवता में बदल जाती है। वह देवता हमारी या किसी भी उपासक की प्रार्थना स्वीकार कर सकते है और अपना वरदान दे सकते हैं। आमतौर पर जब भी प्राण स्थापना होती है, तो उस प्रक्रिया के साथ मंत्रों का जाप,अनुष्ठान और अन्य धार्मिक प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया का उल्लेख वेदों में किया गया है। विभिन्न पुराणों, जैसे मस्त्य पुराण, वामन पुराण, नारद पुराण आदि में भी इसका विस्तार से वर्णन किया गया है।
