

रुद्रपुर का अटरिया मंदिर: आस्था, परंपरा और मेले का उल्लास

उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में स्थित रुद्रपुर का प्रसिद्ध अटरिया मंदिर आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि अपनी पौराणिक कथाओं और सालाना मेले के कारण भी प्रसिद्ध है। हर वर्ष चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के समीपवर्ती जिलों से भी हजारों श्रद्धालु आते हैं।
अटरिया मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
अटरिया मंदिर की स्थापना के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि काठगोदाम से तराई क्षेत्र की यात्रा के दौरान रानी कंचनपुर ने इस स्थान पर रुककर माता दुर्गा की तपस्या की थी। उनकी भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें आशीर्वाद दिया और तभी से यह स्थान एक पवित्र धार्मिक स्थल के रूप में प्रतिष्ठित हो गया। यह मंदिर माँ दुर्गा को समर्पित है और यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
चैत्र नवरात्रि मेला: भक्ति और आनंद का संगम
हर साल चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर अटरिया मंदिर में विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष 5 अप्रैल को माता का भव्य डोला निकाला जाएगा, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। यह मेला धार्मिक भक्ति, संस्कृति और उत्साह का प्रतीक है। मेले में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने के बाद भंडारे का प्रसाद ग्रहण करते हैं और माँ से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
मेले की विशेषताएँ
- माँ अटरिया देवी के दर्शन: भक्तजन माँ के दर्शन करके अपनी आस्था प्रकट करते हैं और मनोकामनाएँ पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
- भव्य झांकी एवं शोभायात्रा: माँ का डोला एक विशेष आयोजन होता है, जिसमें भक्तजन भजन-कीर्तन करते हुए यात्रा में भाग लेते हैं।
- रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम: लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत लोकगीत और नृत्य मेले को और अधिक आकर्षक बनाते हैं।
- हस्तशिल्प और व्यापारियों की भागीदारी: मेले में दूर-दूर से व्यापारी आते हैं और पारंपरिक सामान, खिलौने, मिठाइयाँ और पूजा सामग्री की दुकानों से चहल-पहल बनी रहती है।
- झूले और मनोरंजन के साधन: बच्चों और युवाओं के लिए मेले में विभिन्न प्रकार के झूले और मनोरंजन के अन्य साधन भी उपलब्ध रहते हैं।
सभी श्रद्धालुओं के लिए आमंत्रण
अटरिया मंदिर और इसका वार्षिक मेला हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। इस पावन अवसर पर सभी श्रद्धालुओं से निवेदन है कि वे 5 अप्रैल को माता के डोले में शामिल होकर माँ अटरिया का आशीर्वाद प्राप्त करें। यह मेला भक्ति, उल्लास और सामुदायिक सौहार्द का प्रतीक है, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है।
आइए, इस ऐतिहासिक और पवित्र स्थल पर आकर माँ अटरिया के चरणों में शीश नवाएँ और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को मंगलमय बनाएँ।




