


लोकसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। मनीष खंडूडी ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में उन्होंने बताया कि मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं। मेरा यह निर्णय बिना किसी व्यक्तिगत हित अथवा अपेक्षा से लिया गया है।


मनीष खंडूरी ने 2019 का लोकसभा चुनाव गढ़वाल सीट से लड़ा था। लेकिन वे बुरी तरह से हार गए थे। उनकी एंट्री कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने ही कराई थी। राहुल ने देहरादून में हुई कांग्रेस की रैली में मनीष को सबसे पहले मंच में अपने साथ खड़ा किया।
तब मनीष का कांग्रेस ज्वाइन करना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती मानी गई। मनीष खंडूरी के पिता भाजपा के सीनियर नेता और पूर्व सीएम बीसी खंडूरी हैं। जिनके चेहरे पर भाजपा ने चुनाव भी लड़ा। बीसी खंडूरी की बेटी और मनीष की बहन ऋतु खंडूरी दो बार विधायक बनने के साथ ही वर्तमान में विधानसभा की अध्यक्ष हैं। ऐसे में अब मनीष खंडूरी की भाजपा में जाने की अटकलें तेज हो गई है। मनीष फेसबुक कंपनी में बड़े पद पर कार्यरत रहे साथ ही मीडिया इंडस्ट्री से भी काफी लंबे समय तक जुड़े रहे।

समाजवादी पार्टी लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपने उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट जल्द जारी कर सकती है. इस लिस्ट में 13 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा जा सकता है.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया। इसके बाद भी इंडिया गठबंधन की उम्मीद है कि मायावती आ सकती हैं, इसलिए कांग्रेस की लिस्ट में यूपी के लिए उम्मीदवार घोषित नहीं किए गए हैं। फिलहाल, यूपी में इंडिया के तहत कांग्रेस और सपा के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हो गया है। इंडिया गठबंधन अब मायावती का इंतजार कर रहा है। अगर ऐसा हुआ तो यूपी में इंडिया गठबंधन को मजबूती मिलेगी।

अब कांग्रेस ने जो अपनी पहली सूची जारी की है, उससे भी कई सियासी संदेश निकले हैं। सबसे बड़ा संदेश तो ये सामने आया कि वरिष्ठ नेताओं को भी कांग्रेस चुनावी मैदान में उतारने जा रही है। वो किसी को भी रिटायर करने के मूड में नहीं दिख रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण केसी वेणुगोपाल हैं जिन्हें पार्टी ने केरल की अलाप्पुझा सीट से उतार दिया है। इससे पहले तक वे एक राज्यसभा सांसद थे, लेकिन अब जनता के बीच में उन्हें वोट मांगने पड़ेंगे।
माना तो ये भी जा रहा है कि कांग्रेस ने एक वरिष्ठ नेता को उतार सभी दूसरे बड़े नेताओं को साफ संदेश दे दिया है कि चुानवी मैदान में उतारना ही पड़ेगा। लिस्ट में अशोक गहलोत, सचिन पायलट, भूपेंद्र हुड्डा, दिग्विजिय सिंह और कमलनाथ जैसे नेताओं का नाम भी चर्चा में आ रहा है। ये अलग बात है कि कमलनाथ जैसे कई नेता चुनावी राजनीति से अब दूरी बनाने के संकेत दे रहे हैं, लेकिन कांग्रेस का सारा फोकस सीट निकालने पर है, ऐसे में बड़े चेहरों को ही आगे करने पर जोर दिया जा रहा है।
एक दूसरा बड़ा संदेश कांग्रेस की सूची से ये भी निकलता है कि राहुल गांधी के लिए पार्टी एक सुरक्षित सीट की ही तलाश में थी। वे कहने को कांग्रेस के वर्तमान में सबसे बड़े नेता हैं, पीएम उम्मीदवार भी माने जाते हैं, लेकिन बात जब चुनावी रण की आ रही है तो उन्हें फिर केरल की वायनाड की सीट से लड़वाकर साफ संकेत दे दिए गए हैं। वायनाड का समीकरण राहुल के मुफीद बैठ रहा है। 56 फीसदी से ज्यादा मुसलमान और हिंदू आबादी का भी अच्छी संख्या में होना फायदा पहुंचा सकता है।

