संपादकीय: जब कल्याणी नदी बन गई पीड़ा की प्रतीक(रुद्रपुर की त्रासदी और लापता सूरज की खोज)

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रुद्रपुर की कल्याणी नदी इन दिनों दुख और त्रासदी की प्रतीक बन चुकी है। भारी बारिश के बाद उफनाई इस नदी ने शहर के कई हिस्सों को जलमग्न कर दिया है, और अब यह सिर्फ बाढ़ नहीं, बल्कि मानव जीवन की पीड़ा और असहायता की कहानी भी बन गई है।

इस भीषण बाढ़ में 16 वर्षीय सूरज लापता हो गया, जिसे खोजने के लिए एसडीआरएफ की टीम तीसरी बार पानी में उतरी है। इससे पहले दो बार की तलाशी विफल रही। हर बार जब रेस्क्यू टीम नाव या रस्सियों के सहारे उतरती है, एक उम्मीद की किरण जागती है – शायद इस बार सूरज का कोई सुराग मिल जाए। लेकिन हर बार खाली हाथ लौटना उस परिवार के लिए एक असहनीय पीड़ा बन चुका है, जो लगातार भगवान और प्रशासन की तरफ उम्मीद से देख रहा है।

यह घटना सिर्फ एक लापता किशोर की नहीं है, बल्कि हमारे सिस्टम की भी परीक्षा है। क्यों नहीं समय रहते नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया? क्यों नहीं कल्याणी नदी के उफान पर कोई स्थायी समाधान तलाशा गया?

प्रशासन को चाहिए कि राहत कार्यों के साथ-साथ दीर्घकालिक योजनाएं भी बनाए, जिससे हर साल रुद्रपुर जैसे इलाके ऐसे संकट का सामना न करें। और सबसे जरूरी है, सूरज जैसे हर बच्चे को बचाने के लिए तंत्र की पूरी ताकत झोंक दी जाए – क्योंकि एक जिंदगी की कीमत, किसी आंकड़े से कहीं ज्यादा होती है।


लेखक: अवतार सिंह बिष्ट, संपादक – शैल ग्लोबल टाइम्स


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