संपादकीय,:शत्रु संपत्ति: देवभूमि की विरासत पर भू-माफियाओं का कब्जा और सरकार की जिम्मेदारी

Spread the love


रुद्रपुर,देहरादून।उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। हिमालय की गोद में बसा यह राज्य प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिकता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। लेकिन यहां भी जमीनों पर अवैध कब्ज़ों और भू-माफियाओं की सक्रियता ने राज्य की छवि को बार-बार धूमिल किया है। ताज़ा मामला फैज मोहम्मद शत्रु संपत्ति का है, जिसकी फाइल एक बार फिर सरकारी अलमारियों में धूल फांक रही है। जबकि केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय बार-बार स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि शत्रु संपत्तियों पर कब्ज़ा कर उन्हें सरकारी नियंत्रण में लिया जाए।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

यह केवल एक जमीन का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रश्न है कानून के राज का, प्रशासन की नीयत का और जनता के हितों का


शत्रु संपत्ति क्या है?

आजादी के बंटवारे (1947) के बाद और विशेष रूप से 1965 तथा 1971 के भारत-पाक युद्धों के दौरान बड़ी संख्या में लोग पाकिस्तान और चीन जाकर बस गए। इनमें से कई लोग भारत छोड़कर उन देशों की नागरिकता ले चुके थे। उनकी भारत में जो भी चल-अचल संपत्तियां थीं, उन्हें भारत सरकार ने शत्रु संपत्ति (Enemy Property) घोषित कर दिया।

👉 10 सितंबर 1959 और 18 दिसंबर 1971 को जारी अध्यादेशों के आधार पर केंद्र सरकार ने इन्हें विधिवत अपने कब्ज़े में लिया।
👉 ऐसी संपत्तियों का प्रबंधन कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया (CEPI) करता है, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
👉 किसी भी स्थिति में इन संपत्तियों को न तो बेचा जा सकता है, न हस्तांतरित किया जा सकता है और न ही किसी कथित वारिस को दिया जा सकता है।

फिर भी, वर्षों से यह देखा गया है कि इन संपत्तियों पर फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए वारिस तैयार किए गए, रजिस्ट्री कराई गई और भू-माफिया ने अरबों की जमीनें कौड़ियों के भाव हड़प लीं।


फैज मोहम्मद शत्रु संपत्ति: अरबों की जमीन पर साजिश

देहरादून में दर्ज फैज मोहम्मद शत्रु संपत्ति इसका बड़ा उदाहरण है।

  • आईएसबीटी टर्नर रोड क्षेत्र: लगभग 70 बीघा जमीन को फैज मोहम्मद शत्रु संपत्ति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • माजरा क्षेत्र: यहां करीब 1800 बीघा जमीन शत्रु संपत्ति के तौर पर चिन्हित है।

इन दोनों संपत्तियों की अनुमानित कीमत अरबों रुपये में है। लेकिन इस पर वर्षों से अवैध कब्ज़ा किया गया है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों से लोग आकर यहां बसाए गए। आरोप है कि कई प्रभावशाली सफेदपोश नेताओं और अफसरों ने भी इस खेल में संरक्षण दिया।

पूर्व में जब देहरादून डीएम सोनिका ने मूल दस्तावेज़ सहारनपुर कमिश्नरी से मंगवाए थे, तब जाकर भू-माफियाओं की पोल खुली थी। नगर मजिस्ट्रेट स्तर पर मौके का मुआयना भी हुआ। लेकिन इसके बाद अचानक फाइल ठंडे बस्ते में चली गई। यह सवाल उठता है कि आखिर किस दबाव में यह फाइल दबा दी गई?


उत्तराखंड में शत्रु संपत्तियों का विवरण

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पूरे देश में लगभग 12,611 शत्रु संपत्तियां चिन्हित की गई हैं, जिनकी अनुमानित कीमत एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें से 12,485 पाकिस्तान जाने वालों की और 126 चीन जाने वालों की संपत्तियां हैं।

👉 उत्तराखंड में कुल 34 शत्रु संपत्तियां चिन्हित हैं।
इनमें प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं:

  • देहरादून: फैज मोहम्मद की जमीन (टर्नर रोड व माजरा)
  • नैनीताल: प्रसिद्ध मेट्रोपोल होटल शत्रु संपत्ति के रूप में कब्ज़े में ली गई।
  • हरिद्वार: धार्मिक नगरी में भी कई संपत्तियां शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज हैं।
  • उधम सिंह नगर (किच्छा क्षेत्र): यहां भी शत्रु संपत्ति होने की जानकारी सामने आई है।

क्यों अटक गईं फाइलें?

यह प्रश्न केवल फैज मोहम्मद शत्रु संपत्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नीयत का है।

  1. राजनीतिक दबाव: अरबों की जमीनें जब्त होंगी तो कई सफेदपोशों की पोल खुलेगी।
  2. भू-माफियाओं का गठजोड़: स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली भू-माफिया फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर कब्ज़े बनाए रखते हैं।
  3. प्रशासनिक लापरवाही: बार-बार केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश आने के बावजूद जिलाधिकारी स्तर पर कार्रवाई अधूरी रह जाती है।
  4. अदालती पेच: फर्जी वारिस अदालतों में दावे ठोकते हैं और वर्षों तक मुकदमे लटकाए रखते हैं।

जनहित का प्रश्न

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साफ निर्देश दिया है कि शत्रु संपत्तियों को जिला प्रशासन कब्ज़े में लेकर जनहित के कार्यों में उपयोग करे।

👉 इन संपत्तियों का उपयोग स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, सामुदायिक केंद्र, पार्क, सरकारी कार्यालय आदि के लिए किया जा सकता है।
👉 लेकिन इसके उलट, वर्तमान में इन पर अवैध कॉलोनियां, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और निजी मकान खड़े हैं।

सोचिए, अगर केवल देहरादून की 1870 बीघा शत्रु संपत्ति को सरकार कब्ज़े में लेकर जनकल्याण कार्यों में लगाती, तो राजधानी की तस्वीर बदल सकती थी।


धामी सरकार की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद शत्रु संपत्तियों की फाइल खोलने के निर्देश दिए थे। नैनीताल का मेट्रोपोल होटल खाली कराया जाना उसी दिशा में एक कदम था। लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि देहरादून और हरिद्वार की अरबों की संपत्तियों पर सरकारी चुप्पी क्यों है?

धामी सरकार के लिए यह एक अवसर है कि वह भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाकर अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को जमीन पर उतारे।
केंद्र के निर्देश साफ हैं—कब्ज़ा लेकर रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजनी है। ऐसे में उत्तराखंड प्रशासन की देरी सीधे तौर पर कानून की अवहेलना है।


शत्रु संपत्ति का मामला केवल जमीन का विवाद नहीं है। यह राष्ट्रीय संपत्ति है, जिसे देश के नागरिकों के कल्याण के लिए इस्तेमाल होना चाहिए। लेकिन आज यह भू-माफियाओं, फर्जी वारिसों और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ चुकी है।

फैज मोहम्मद शत्रु संपत्ति की फाइल फिर से ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। लेकिन यह देवभूमि के स्वाभिमान और कानून के राज का सवाल है। अगर सरकार इस पर ठोस कदम नहीं उठाती, तो जनता इसे एक और राजनीतिक नाटक मानेगी।

आज जरूरत है कि धामी सरकार और जिला प्रशासन पारदर्शिता दिखाते हुए हर शत्रु संपत्ति को कब्ज़े में ले, भू-माफियाओं को जेल भेजे और इस संपत्ति का उपयोग उत्तराखंड के युवाओं, किसानों और आम जनता के हित में करे। तभी देवभूमि की जमीन सचमुच जनता की जमीन कहलाएगी।


✍️ लेखक का मत:
यह समय है कि देवभूमि उत्तराखंड में शत्रु संपत्तियों पर पड़े अवैध कब्ज़ों को हटाने का अभियान तेज़ हो। केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ज़मीन पर कार्रवाई ही सरकार की नीयत और प्रतिबद्धता का असली प्रमाण होगी।



उत्तराखंड में शत्रु संपत्तियों का जिला-वार विवरण

जिला प्रमुख शत्रु संपत्ति/क्षेत्र अनुमानित क्षेत्रफल स्थिति / विवाद देहरादून फैज मोहम्मद की संपत्ति (टर्नर रोड, आईएसबीटी के पास) 70 बीघा फर्जी वारिस व भू-माफियाओं का कब्ज़ा फैज मोहम्मद की संपत्ति (माजरा क्षेत्र) 1800 बीघा मौके का मुआयना हुआ, फाइल ठंडे बस्ते में नैनीताल मेट्रोपोल होटल 1 बड़ी इमारत व भूमि कब्ज़ा हटाकर प्रशासनिक नियंत्रण में लिया गया हरिद्वार धार्मिक नगरी में कई संपत्तियां (संख्या गोपनीय) दर्जनों बीघा अवैध रजिस्ट्रियां, मुकदमे लंबित उधम सिंह नगर किच्छा क्षेत्र की शत्रु संपत्ति अज्ञात (सूत्रों के अनुसार कई बीघा) प्रारंभिक पहचान, कब्ज़ा नहीं हुआ अन्य छोटे जिले बिखरी हुई संपत्तियां (संख्या सीमित) – दस्तावेज़ जांच लंबित

कुल संख्या: 34 शत्रु संपत्तियां (उत्तराखंड)
अनुमानित कीमत: अरबों रुपये
स्थिति: अधिकांश संपत्तियों पर अवैध कब्ज़ा, मुकदमेबाजी या फाइलें ठंडे बस्ते में



Spread the love