रुद्रपुर/किच्छा/खटीमा/उधम सिंह नगर।
23 मार्च के पावन शहीदी दिवस पर अमर क्रांतिकारियों Bhagat Singh, Sukhdev Thapar और Shivaram Rajguru को पूरे जिले में भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने एकजुट होकर इन महान वीरों के बलिदान को नमन किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
रुद्रपुर: महाविद्यालय परिसर में श्रद्धांजलि सभा
शहीद भगत सिंह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और छात्रसंघ अध्यक्ष रजत बिष्ट के नेतृत्व में दर्जनों लोगों ने शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
वक्ताओं ने कहा कि इन क्रांतिकारियों का बलिदान केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
खटीमा: उत्तरांचल पंजाबी महासभा का श्रद्धांजलि कार्यक्रम
उत्तरांचल पंजाबी महासभा खटीमा के तत्वावधान में टनकपुर रोड स्थित कार्यालय में शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित किए गए।
वरिष्ठ सदस्य संतोष मल्होत्रा और सचिव हरीश बत्रा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के जीवन से प्रेरणा लें और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं।
किच्छा: शहीद भगत सिंह पार्क में माल्यार्पण
किच्छा के आवास विकास स्थित शहीद भगत सिंह पार्क में पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने कार्यकर्ताओं के साथ शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी दीपक शुक्ला की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।
राजेश शुक्ला ने कहा कि ये महान क्रांतिकारी राष्ट्रभक्ति, साहस और त्याग के प्रतीक हैं और उनका जीवन हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।
उधम सिंह नगर: स्मृति स्थल बना प्रेरणा का केंद्र
जिले में विभिन्न संगठनों जैसे गुरु रामदास ट्रस्ट, पर्यावरण संरक्षण दल, शहीद भगत सिंह समिति, गुरुद्वारा कमेटी और सिख यूथ द्वारा संयुक्त रूप से श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस दौरान शहीदी स्थलों से लाई गई पवित्र मिट्टी को स्मृति स्थल पर स्थापित किया गया, जिसे राष्ट्रप्रेम की अमर विरासत बताया गया।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रथम बिष्ट ने यहां “शहीद भगत सिंह लाइब्रेरी” स्थापित करने की मांग भी रखी।
शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का बलिदान केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है।
जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों की सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि इन वीर सपूतों की स्मृति आज भी जन-जन के दिलों में जीवित है।
कार्यक्रमों के अंत में सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया—
“देश की एकता, अखंडता और शहीदों के सपनों का भारत बनाने के लिए हम सदैव तत्पर रहेंगे।”
