सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी कर्मचारी को सिर्फ इस वजह से पदोन्नति का अधिकार नहीं मिल जाता कि संबंधित पद पुराने सेवा नियम लागू रहने के दौरान खाली हुए थे।

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अदालत ने कहा कि सरकार प्रशासनिक जरूरतों और नीतिगत सुधारों को ध्यान में रखते हुए भर्ती और प्रमोशन प्रक्रिया में बदलाव कर सकती है। हालांकि, यह बदलाव निष्पक्ष और गैर-मनमाने तरीके से होना चाहिए।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड

‘प्रमोशन पर दावा नहीं कर सकते कर्मचारी’

इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने की। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन को लेकर कोई ‘निहित अधिकार’ या ‘वैध अपेक्षा’ स्वतः प्राप्त नहीं होती। अदालत के मुताबिक, किसी पद पर चयन कैसे होगा, भर्ती प्रक्रिया कैसी होगी और नियमों में क्या बदलाव किए जाएंगे, यह पूरी तरह सरकार के नीति निर्धारण का हिस्सा है। पीठ ने कहा कि सरकार को समय-समय पर सेवा नियमों में संशोधन करने और नई व्यवस्थाएं लागू करने का अधिकार है। जब तक किसी फैसले में दुर्भावना, पक्षपात या मनमानी साबित नहीं होती, तब तक अदालत उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

ओडिशा परिवहन विभाग से जुड़ा था विवाद

पूरा मामला ओडिशा के परिवहन विभाग के कर्मचारियों से जुड़ा हुआ था। विभाग के कुछ कर्मचारी असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (ARTO) पद पर प्रमोशन की मांग कर रहे थे। कर्मचारियों का तर्क था कि जिन पदों पर भर्ती होनी थी, वो पुराने सेवा नियम लागू रहने के दौरान खाली हुए थे। इसलिए उन पदों पर पदोन्नति भी पुराने नियमों के आधार पर ही की जानी चाहिए। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने बताया कि साल 2017 में विभागीय कैडर का पुनर्गठन किया गया था। इसके बाद 2021 में नए सेवा नियम लागू किए गए। नए नियमों के तहत ARTO के पद को चयन आधारित पद घोषित किया गया और अब इस पद पर नियुक्ति ओडिशा लोक सेवा आयोग (OPSC) की परीक्षा के जरिए की जानी तय हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला किया रद्द

इससे पहले ओडिशा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि कर्मचारियों के प्रमोशन पर पुराने नियमों के अनुसार विचार किया जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस आदेश को निरस्त कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि सरकार प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने और बेहतर चयन प्रक्रिया अपनाने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू करती है, तो उसे गलत नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार, बदलती प्रशासनिक जरूरतों के मुताबिक भर्ती और पदोन्नति के नियमों में बदलाव करना सरकार का वैध अधिकार है।


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