
रक्षा मंत्रालय ने इस वित्तीय वर्ष में 2.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के लिए अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर होगा।


प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)
यह डील 62,700 करोड़ रुपये की है। इन 156 हेलीकॉप्टर्स में से 66 भारतीय वायु सेना को और 90 थल सेना को मिलेंगे। हेलीकॉप्टर कर्नाटक के बेंगलुरु और तुमकुर स्थित उनके प्लांट्स में बनाए जाएंगे। बता दें कि भारत ने अपनी सैन्य शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दरअसल, यह सौदा आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने और थल व वायुसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में अहम साबित होगा।
ऊंचाई पर तैनाती में सक्षम है ‘प्रचंड’
- प्रचंड दुनिया का एकमात्र अटैक हेलीकॉप्टर है, जो 16,400 फीट (5,000 मीटर) की ऊंचाई पर भी उड़ सकता है।
- प्रचंड को मुख्य रूप से सियाचिन, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में तैनाती के लिए डिजाइन किया गया है।
- ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात करने के लिए यह आदर्श है। हवा से जमीन और हवा से हवा में हमला करने में सक्षम, मिसाइलों से लैस, दुश्मन की हवाई सुरक्षा को नष्ट कर सकता है।
- प्रचंड कई तरह की एयर-टू-ग्राउंड और एयर-टू-एयर मिसाइल दागने में सक्षम है और दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को नष्ट कर सकता है।
- सेना में प्रचंड हेलिकॉप्टरों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना के हमले वाले हेलिकॉप्टर बेड़े में विविधता आएगी।
- इस हेलीकॉप्टर का निर्माण मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत किया गया है।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती
बता दें कि सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए यह सौदा किया है। 83 लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) का सबसे बड़ा ऑर्डर पहले ही दिया जा चुका है। 97 और LCA ऑर्डर करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 307 ATAGS हॉवित्जर तोपों की खरीद को भी हाल ही में कैबिनेट से मंजूरी मिली है।
