





प्रदेश कांग्रेस कमेटी भले ही 25 नामों की सूची स्क्रीनिंग कमेटी को भेज चुकी हो, लेकिन स्क्रीनिंग कमेटी की दो बैठकों में माथा पच्ची के बाद भी प्रत्याशियों के नाम तय नहीं किया जा सके हैं, जिसके कारण सूची जारी होने में विलंब हो रहा है, जो संभावित प्रत्याशियों में बेचैनी का कारण भी बना हुआ है।

कांग्रेस प्रत्याशियों के नामों पर अब दिल्ली में होने वाली तीसरी स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में फैसला होने की बात कही जा रही है। दर असल कांग्रेस की अंदरूनी अंतर्कलह के कारण प्रत्याशियों के चयन में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। राज्य की सभी पांच सीटों पर संभावित प्रत्याशियों द्वारा यूं तो बहुत पहले से तैयारियां की जा रही थी, लेकिन जिन उम्मीदवारों ने अपनी पसंद या यह कहें कि जनाधार वाली सीटों पर तैयारी की गई थी, अब उन सीटों की बजाय उन्हें दूसरी सीटों पर चुनाव लड़ने को कहा जा रहा है जिसके लिए वह तैयार नहीं है।
यशपाल आर्य नैनीताल की सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन हरीश रावत जैसे नेता उन्हें नैनीताल की बजाय अल्मोड़ा से चुनाव लड़ने की सलाह दे रहे हैं। हरीश रावत हरिद्वार सीट पर अपने या अपने बेटे को टिकट का सबसे मजबूत दावेदार मानते हैं, लेकिन वह किसी भी दूसरी सीट से चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है। तमाम सीटों परऐसी ही स्थितियां बनी हुई है।
खास बात यह है कि टिकट के लिए पैरवी करना तो समझ में आता है, लेकिन कांग्रेस के नेता एक दूसरे के टिकट कटवाने के लिए दिल्ली के भी चक्कर काट रहे हैं। उन्हें खुद को टिकट मिलेगा या नहीं, इसकी चिंता से ज्यादा फिक्र इस बात की है कि दूसरे को टिकट न मिल जाए।
हालांकि कहा यही जा रहा है कि कल या परसों तक कांग्रेस की सूची जारी हो जाएगी। पार्टी जिसे जिस सीट से प्रत्याशी बनाएगी वह उसे सीट से चुनाव लड़ेगा ही। कोई प्रत्याशी चुनाव लड़ने से मना नहीं कर सकता है, लेकिन जिस कमजोर मनोबल और खींचतान के साथ कांग्रेस लोकसभा चुनाव में जा रही है वह उसके भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं माने जा सकते हैं।
हरीश रावत परिवार का चौथा सदस्य राजनीति को तैयार
आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व सीएम हरीश रावत के परिवार से चौथे सदस्य की चुनावी राजनीति में श्रीगणेश का गवाह बन सकता है। पिछले विधानसभा चुनावों में बेटी को विधायक बनवा चुके रावत अब बेटे वीरेंद्र के लिए लोकसभा टिकट की पैरवी कर रहे हैं।
सक्रिय राजनीति में पांच दशक पूरे कर चुके पूर्व सीएम हरीश रावत की गिनती कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में होती है। 75 साल की उम्र पार करने के बावजूद वो ना सिर्फ खुद सक्रिय बने हुए हैं, बल्कि अब उनकी दूसरी पीढ़ी भी सियासत में जगह बना रही है। रावत पिछले विधानसभा चुनाव में हरिद्वार ग्रामीण से अपनी बेटी अनुपमा रावत को विधायक बनवा चुके हैं, जबकि इस सीट पर 2017 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसी क्रम में इस बार वो हरिद्वार लोकसभा से बेटे वीरेंद्र रावत की लांचिंग की तैयारी में हैं। वीरेंद्र रावत हालांकि पिछली बार खानपुर विधानसभा में सक्रिय थे, लेकिन तब रावत परिवार से दो टिकट पहले ही होने के चलते, तीसरे को मौका नहीं मिल पाया। बहरहाल इस बार हरीश रावत, वीरेंद्र को अपने स्टैंड बाई में रखते हुए चल रहे हैं।
पत्नी को भी लड़वा चुके चुनाव
हरीश रावत इससे पहले अपनी पत्नी रेणुका रावत को भी अल्मोड़ा और हरिद्वार से लोकसभा चुनाव लड़वा चुके हैं, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। दूसरी तरफ उनके दूसरे पुत्र आनंद रावत की राजनीति यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस में महासचिव से आगे नहीं बढ़ पाई। देखना यह है कि रावत इस बार बड़े बेटे वीरेंद्र की सियासत को कितना आगे बढ़ा पाते हैं।
उत्तराखंड में तीन सीटों पर प्रत्याशी रिपीट किए गए हैं तो वही कांग्रेस में प्रत्याशियों को लेकर कशमकश चल रही है।
एक और जहां पार्टी के पास 40 दावेदारों के नाम गए थे तो वहीं कांग्रेस के कुछ दिग्गज नेता चुनाव लड़ने से लगातार इनकार कर रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस की तीन दौर की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हो चुकी है। जिसका निष्कर्ष यह निकला कि कांग्रेस पांचो लोकसभा सीटों में 40 दावेदारों की छटनी कर 14 से 15 दावेदारों तक ले आई है।
बीते कल भी कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हुई लेकिन अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई जिसको लेकर स्क्रीन कमेटी की एक बैठक और होनी है। कांग्रेस प्रदेश संगठन उपाध्यक्ष मथुरा दत्त जोशी ने बताया की प्रत्याशियों के नाम को लेकर चिंतन मंथन चल रहा है अभी एक स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक और होनी है जिसके बाद केंद्रीय चुनाव समिति निर्णय लेगी की टिकट किसे देना है।





