वृद्ध जनों के सहारे मिशन 2027 का आगाज?वरिष्ठ नागरिक सम्मान समारोह में स्वास्थ्य कैंप, लेकिन पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

।
आज हम रुद्रपुर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस, सेवा संकल्प अभियान और वरिष्ठ नागरिक सम्मान समारोह से लाइव हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वृद्धजन और आसपास के लोग पहुंचे हैं। मंच पर सम्मान है, स्वास्थ्य जांच के कैंप हैं, आयुर्वेदिक चिकित्सा की जानकारी है, विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी है और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी चल रहे हैं।
लेकिन इस पूरे आयोजन के बीच एक सवाल ऐसा है, जिसे पूछना जरूरी है—
क्या वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और एक दिन के स्वास्थ्य कैंप से उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की असली तस्वीर बदल सकती है?
और दूसरा सवाल इससे भी बड़ा है—
क्या मिशन 2027 का आगाज अब वृद्ध जनों के सहारे किया जा रहा है, या सरकार वास्तव में वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को स्थायी समाधान देना चाहती है?
यह सवाल किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का नहीं है। यह सवाल उत्तराखंड के उस आम नागरिक का है, जिसे बीमारी होने पर डॉक्टर, दवा, जांच और समय पर उपचार चाहिए।
आज यहां स्वास्थ्य कैंप लगाया गया है। लोग अपनी जांच करा रहे हैं। आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा सेवाओं की जानकारी दी जा रही है। योग, पंचकर्म, प्रकृति परीक्षण, पैथोलॉजी जांच, एनसीडी स्क्रीनिंग, क्षारसूत्र और अग्निकर्म जैसी सेवाओं के बारे में बताया जा रहा है।
यह पहल लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है। लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था का असली परीक्षण तब होता है, जब किसी पहाड़ी गांव में आधी रात को मरीज बीमार पड़ता है, जब किसी बुजुर्ग को विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत होती है, जब किसी महिला को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचना पड़ता है या जब किसी गंभीर मरीज को तत्काल रेफर करना पड़ता है।
उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग खुद अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में 2026 के दौरान मेडिकल ऑफिसर और विशेषज्ञ डॉक्टरों के रिक्त पदों की जानकारी प्रकाशित करता रहा है। सितंबर 2026 तक भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वेबसाइट पर मेडिकल ऑफिसर और विशेषज्ञों की रिक्तियों तथा भर्ती प्रक्रियाओं के रिकॉर्ड मौजूद हैं।
यानी तस्वीर का एक पहलू यह भी है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भर्ती और नियुक्ति की प्रक्रिया चला रही है, लेकिन दूसरी तरफ यह सवाल बना हुआ है कि दूरदराज के अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर और विशेषज्ञ कितनी स्थायी और नियमित व्यवस्था के साथ उपलब्ध हैं।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्वास्थ्य सेवा केवल अस्पताल की इमारत खड़ी करने का विषय नहीं है।
इमारत चाहिए, लेकिन डॉक्टर भी चाहिए।
मशीन चाहिए, लेकिन उसे चलाने वाला विशेषज्ञ भी चाहिए।
एम्बुलेंस चाहिए, लेकिन सड़क और समय पर पहुंचने की व्यवस्था भी चाहिए।
दवा चाहिए, लेकिन मरीज को समय पर इलाज भी चाहिए।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का अपना महत्व है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत राज्य के सभी 13 जिलों में जिला अस्पताल स्तर पर 10-बेड वाले जेरियाट्रिक वार्ड तथा बुजुर्गों के लिए ओपीडी सेवाओं का उल्लेख सरकारी रिकॉर्ड में है।
लेकिन यहां भी सवाल है—क्या कागज पर उपलब्ध व्यवस्था और जमीन पर उपलब्ध व्यवस्था के बीच कोई अंतर है?
क्योंकि वृद्ध व्यक्ति के लिए बीमारी केवल बीमारी नहीं होती। उसे नियमित जांच चाहिए, दवा की निरंतरता चाहिए, विशेषज्ञ की सलाह चाहिए, फिजियोथेरेपी चाहिए और कई मामलों में परिवार के किसी सदस्य को साथ लेकर अस्पताल तक पहुंचने की सुविधा चाहिए।
सरकार की ओर से स्वास्थ्य क्षेत्र में कई योजनाएं संचालित हैं। डायलिसिस केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाया गया है और सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार ऊधम सिंह नगर के जिला अस्पताल रुद्रपुर में भी डायलिसिस सुविधा संचालित है।
लेकिन जनता का सवाल सीधा है—
क्या इन सुविधाओं तक हर जरूरतमंद की आसान पहुंच है?
आज के इस कार्यक्रम में साइबर अपराध से बचाव की जानकारी भी दी जा रही है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वरिष्ठ नागरिक साइबर ठगी के आसान निशाने बन सकते हैं। 1930 साइबर हेल्पलाइन के बारे में जागरूकता दी जा रही है।
निर्माण श्रमिकों की योजनाओं की जानकारी भी यहां दी गई है। विवाह सहायता, प्रसूति सहायता, पेंशन, शिक्षा सहायता, चिकित्सा सहायता, कौशल विकास और अन्य योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जा रही है।
लेकिन एक बार फिर वही सवाल—
क्या योजनाओं की जानकारी देने के बाद पात्र व्यक्ति वास्तव में योजना का लाभ ले पा रहा है?
यही असली कसौटी है।
आज मंच पर वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान हो रहा है। तालियां बज रही हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं। स्वास्थ्य जांच हो रही है। सरकार की योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।
यह सब अपनी जगह महत्वपूर्ण है।
लेकिन मिशन 2027 की चर्चा अगर हो रही है तो जनता भी अपने सवाल लेकर खड़ी है।
उत्तराखंड की जनता पूछ रही है—
क्या गांव का अस्पताल 24 घंटे डॉक्टर देगा?
क्या विशेषज्ञ डॉक्टर पहाड़ों में टिकेंगे?
क्या मरीज को छोटी बीमारी में भी देहरादून या हल्द्वानी भागना पड़ेगा?
क्या बुजुर्गों को नियमित दवा और जांच अपने नजदीकी क्षेत्र में मिलेगी?
क्या सरकारी अस्पतालों में मशीनें उपलब्ध होने के साथ उनका संचालन भी नियमित होगा?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या स्वास्थ्य सेवा चुनावी कार्यक्रमों और स्वास्थ्य कैंपों से आगे बढ़कर स्थायी व्यवस्था बनेगी?
सरकार की ओर से स्वास्थ्य विभाग में नई नियुक्तियों और रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 में नए मेडिकल अधिकारियों की ज्वाइनिंग सूची और विभिन्न कैडरों से संबंधित सूचनाएं भी प्रकाशित की गई हैं।
इसलिए तस्वीर को केवल एक रंग में देखना भी सही नहीं होगा।
सरकार प्रयास कर रही है—यह सरकारी रिकॉर्ड से दिखाई देता है।
लेकिन रिक्त पदों और विशेषज्ञ सेवाओं की जरूरत भी रिकॉर्ड में दिखाई देती है।
अब सवाल यही है कि इन प्रयासों का अंतिम परिणाम मरीज तक कब और कितनी मजबूती से पहुंचेगा?
आज का यह कार्यक्रम वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान देने का अवसर है।
लेकिन वरिष्ठ नागरिक केवल सम्मान के पात्र नहीं हैं।
वे सवाल पूछने के भी हकदार हैं।
उन्हें सम्मान के साथ स्वास्थ्य चाहिए।
उन्हें पेंशन के साथ इलाज चाहिए।
उन्हें योजनाओं के साथ उनका वास्तविक लाभ चाहिए।
उन्हें आश्वासन के साथ जमीन पर व्यवस्था चाहिए।
और उत्तराखंड के हर नागरिक को ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था चाहिए, जहां बीमारी होने पर पहला विचार यह न हो कि “अब बड़े शहर किस अस्पताल में जाना पड़ेगा?”
तो रुद्रपुर से इस लाइव प्रसारण में आज का सवाल सरकार के सामने खुला है—
“मिशन 2027 का आगाज वृद्ध जनों के सम्मान से हो रहा है, लेकिन क्या इसका अगला कदम उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को गांव-गांव तक मजबूत करने का होगा?”
क्योंकि चुनाव आएंगे और चले जाएंगे।
सरकारें आएंगी और जाएंगी।
लेकिन अस्पताल, डॉक्टर, दवा और स्वास्थ्य सुविधा जनता की रोजमर्रा की जरूरत हैं।
सम्मान एक दिन का हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था 365 दिन चाहिए।
यही आज के कार्यक्रम का सबसे बड़ा संदेश और जनता का सबसे बड़ा सवाल है।
कैमरा टीम के साथ, रुद्रपुर से अवतार सिंह बिष्ट,
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स।
नोट: मैंने “मिशन 2027” को राजनीतिक प्रचार या समर्थन के रूप में नहीं, बल्कि आपके कार्यक्रम में उठ रहे जनस्वास्थ्य से जुड़े सवालों के संदर्भ में रखा है।