

सर्दियों में अधिकतर होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे खाली पड़े रहते हैं। यह असंतुलन साल के एक बड़े हिस्से में आर्थिक सुस्ती ला देता है। उन्होंने शीतकालीन पर्यटन की उत्तराखंड सरकार की पहल को सराहते हुए आर्थिक असंतुलन दूर करने के लिए पर्यटन क्षेत्र में विविधता लाने, उसे बारहमासी बनाने की जरूरत बताई।

पीएम ने कहा कि राज्य में कोई भी मौसम पर्यटन के लिहाज से ऑफ सीजन नहीं होना चाहिए। अब ऑफ नहीं, ऑन का जमाना। पीएम बृहस्पतिवार को उत्तराखंड में थे। उन्होंने हर्षिल में ट्रेक और बाइक रैली को हरी झंडी दिखाने के बाद शीतकालीन पर्यटन कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
उन्होंने रैली को संबोधित करने के अलावा मुखवा में मां गंगा के शीतकालीन गद्दी स्थल पर पूजा-अर्चना भी की। पीएम ने कहा, अगर देश-विदेश के लोग सर्दियों के मौसम में यहां आएं तो उन्हें सच्चे अर्थ में देवभूमि की वास्तविक आभा का परिचय मिलेगा। उन्होंने कहा, विंटर टूरिज्म यहां आने वालों को ट्रैकिंग, स्कीइंग जैसी गतिविधियों से सचमुच रोमांचित कर देगा।
धार्मिक यात्रा के लिए उत्तराखंड में सर्दियों का समय बेहद खास होता है। कई तीर्थ स्थलों पर इसी समय विशेष अनुष्ठान भी होते हैं। मुखवा गांव में जो धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है, वो हमारी प्राचीन और अद्भुत परंपरा का हिस्सा है। बारहमासी पर्यटन का उत्तराखंड सरकार का विजन लोगों को दिव्य अनुभूतियों से जुड़ने का अवसर देगा। इससे साल भर उपलब्ध रहने वाले रोजगार से भी स्थानीय लोगों को फायदा मिलेगा।
विंटर टूरिज्म बढ़ाने के लिए दिए सुझाव
पीएम ने कहा कि विंटर टूरिज्म के प्रसिद्ध देशों में अध्ययन कराया जाए और उसके आधार पर सक्रिय रूप से काम हो। स्थानीय परंपराओं, संगीत, नृत्य व पूजा-अर्चना को बढ़ावा दिया। यहां कई हॉट स्प्रिंग हैं, उन क्षेत्रों को वेलनेस स्पा के रूप में विकसित किया जा सकता है। शांत व बर्फीले क्षेत्रों में विंटर योगा रिट्रीट का आयोजन हो सकता है।
- पीएम ने कहा, बड़े साधु महात्माओं, मठ मंदिरों के मठपतियों व योगाचार्यों से आग्रह किया कि वे अपने शिष्यों का साल में एक योगा कैंप सर्दियों में उत्तराखंड में लगाएं। स्पेशल वाइल्ड लाइफ सफारी का आकर्षण भी विशेष पहचान बन सकता है।
लोग भूल गए, हम नहीं भूल सकते
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहाड़ों पर अब इको लॉग हट्स, कन्वेंशन सेंटर, हेलीपैड इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया जा रहा है। उत्तराखंड के टिम्मर-सैण महादेव, माणा गांव, जादुंग गांव में पर्यटन ढांचे को नए सिरे से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, देशवासियों को पता होगा, शायद नहीं भी होगा, 1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया, तब हमारे जादुंग गांव को खाली करवा दिया गया था। हमारे दो गांव खाली कर दिए गए थे। 60-70 साल हो गए, लोग भूल गए, हम नहीं भूल सकते, हमने उन दो गांवों को फिर से बसाने का अभियान चलाया है और बहुत बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने हाल ही में माणा गांव में हिमखंड गिरने से हुए हादसे में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि भी दी।
जीवनदायिनी मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया
पीएम ने कहा कि जीवनदायिनी मां गंगा के शीतकालीन गद्दी स्थल पहुंचकर वह खुद को धन्य महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, मां गंगा की कृपा से मुझे दशकों तक उत्तराखंड की सेवा का सौभाग्य मिला। उन्हीं के आशीर्वाद से मैं काशी पहुंचा और सांसद के रूप में काशी की सेवा कर रहा हूं। इसलिए, मैंने काशी में कहा भी था-मुझे मां गंगा ने बुलाया है। कुछ महीने पहले मुझे ये भी अनुभूति हुई कि जैसे मां गंगा ने मुझे अब गोद ले लिया है। अपने इस बच्चे के प्रति उनका स्नेह ही है कि आज मैं उनके मायके मुखवा गांव पहुंचा।




