रंग, राग और रिश्तों की पुनर्स्थापना — शैल परिषद प्रांगण में खड़ी होली का सांस्कृतिक आह्वान

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रुद्रपुर। जब मैदानों की रफ्तार और पहाड़ों की आत्मा एक ही सुर में गूंजेगी—संस्कृति का पुनर्जन्म  आगामी 1 मार्च 2026 को शैल परिषद प्रांगण में शैल सांस्कृतिक समिति द्वारा आयोजित खड़ी होली का कार्यक्रम इसी सांस्कृतिक पुनर्स्मरण का अवसर लेकर आ रहा है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


समिति के  निवर्तमान अध्यक्ष गोपाल सिंह पटवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन प्रातः 11:00 बजे से प्रारंभ होगा। परिषद के सभी पूर्व एवं निवर्तमान पदाधिकारी, आजीवन सदस्य एवं स्थानीय पर्वतीय समुदाय को सादर आमंत्रित किया गया है।
यह उल्लेखनीय है कि अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने के उपरांत भी श्री पटवाल की सक्रियता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता ज्यों की त्यों बनी हुई है। ऐसे समय में जब प्रायः पद के साथ दायित्व भी समाप्त मान लिए जाते हैं, उन्होंने यह सिद्ध किया है कि संस्कृति के प्रति निष्ठा किसी कुर्सी की मोहताज नहीं होती। इसलिए  निवर्तमान अध्यक्ष” शब्द न केवल औपचारिक है, बल्कि उनके अनुभव और योगदान का सम्मान भी है।
खड़ी होली: केवल रंग नहीं, पहचान की ध्वनि
कुमाऊँ की पारंपरिक खड़ी होली केवल रंगों का उत्सव के साथ साथ सामूहिक स्वर-साधना का पर्व है। ढोलक की थाप, हारमोनियम की तान और सामूहिक गायन की परंपरा—यह सब मिलकर उस सांस्कृतिक ताने-बाने को जीवित रखते हैं, जो पहाड़ से मैदान तक लोगों को जोड़ता है।
यह होली आयोजन प्रवासी पहाड़ी समुदाय के लिए अपनी जड़ों से पुनः जुड़ने का अवसर है। आज जब नई पीढ़ी आधुनिकता की तेज़ रफ्तार में अपनी लोकधुनों से दूर होती जा रही है, तब ऐसे कार्यक्रम उन्हें अपनी विरासत से परिचित कराने का माध्यम बनते हैं।
सर परिषद प्रांगण: संवाद और समरसता का स्थल
शैल परिषद प्रांगण वर्षों से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहां आयोजित खड़ी होली, आपसी मेलजोल, भाईचारे और सामुदायिक एकता का प्रतीक बनेगी। यह आयोजन किसी एक संस्था या व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ी समाज का सामूहिक उत्सव है।
आमंत्रण: आइए, रंगों में संस्कृति को जीवित रखें
शैल सांस्कृतिक समिति की ओर से सभी पूर्व, निवर्तमान पदाधिकारियों, आजीवन सदस्यों तथा स्थानीय( पहाड़ी)पर्वतीय समाज से आग्रह किया गया है कि वे अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर इस सांस्कृतिक उत्सव को सफल बनाएं।
प्रातः 11:00 बजे से प्रारंभ होने वाले इस कार्यक्रम में खड़ी होली के पारंपरिक गीतों के साथ रंगों की सौम्य और सांस्कृतिक छटा बिखरेगी।
होली का रंग लगाने अमनों के मैल को धोने, संबंधों को पुनर्जीवित करने और सामूहिक स्मृतियों को सहेजने का अवसर है।
1 मार्च को शैल परिषद प्रांगण में जब पहाड़ी सुर गूंजेंगे, तब केवल होली नहीं खेली जाएगी—अपनी पहचान, अपनी भाषा और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को फिर से आत्मसात किया जाएगा।

होली के पावन पर्व पर आप सभी स्नेहीजनों को शैल परिषद प्रांगण में आयोजित होली मिलन समारोह में सादर आमंत्रण। आइए, इस बार आपसी मतभेद, मनभेद संचालन, गुटबाजी, चुनावी उठापटक और एक-दूसरे की बुराई को रंगों की तरह धो डालें। होली केवल त्योहार नहीं, दिलों को जोड़ने का अवसर है। अपने मन की कुंठाओं को त्यागें और प्रेम, अपनत्व व सौहार्द के साथ अवश्य पधारें। आपकी उपस्थिति ही उत्सव को पूर्ण करेगी।
सभी सादर आमंत्रित हैं।


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