
राउज एवेन्यू कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) दीपक कुमार की उम्र दो साल थी जब 1986 में यह मामला पहली बार दर्ज किया गया था। अब उनकी उम्र 41 है और कुमार पिछले पांच महीनों से इसी मामले की सुनवाई कर रहे हैं, जब से पिछले साल अक्टूबर के अंत में उन्हें द्वारका कोर्ट से राउज में ट्रांसफर किया गया था।


प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)
करीब चार दशकों से इस बैंक धोखाधड़ी मामले की फाइलें जो अब फटी-पुरानी हो चुकी हैं, अनगिनत जजों के कक्षों में घूम चुकी हैं। पिछले पांच सालों में ही 11 जजों के कक्षों में। करीब छह महीने पहले, आखिरकार फाइलें जज कुमार की अदालत में पहुंचीं। 78 वर्षीय एसके त्यागी थे इस मामले के मुख्य आरोपी हैं। 39 साल बाद उन्होंने अपना अपराध स्वीकार करने का फैसला किया। सीजेएम कुमार ने त्यागी की अर्जी देखते हुए कहा, “मैं आपको अपने फैसले पर विचार करने के लिए एक सप्ताह का समय दे रहा हूं।” हालांकि त्यागी अपने फैसले पर दृढ़ दिखे।
बैंक फ्रॉड के इस मामले में 13 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था
रिकॉर्ड से पता चलता है कि 20 मार्च 1986 को पंजाब एंड सिंध बैंक, नई दिल्ली के क्षेत्रीय प्रबंधक और बैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी द्वारा धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए की गई दो शिकायतों को सीबीआई ने एक साथ जोड़कर यह मामला दर्ज किया था। दो साल बाद 13 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया।
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पंजाब एंड सिंध बैंक को 32 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप
आरोप है कि आरोपियों ने धोखाधड़ी करके और अपने खातों में अवैध रूप से पैसे जमा करके बैंक को 32 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया। त्यागी पर 1984-85 में खातों में हेराफेरी करके, गलत क्रेडिट प्रविष्टियां करके और बिना किसी खाते में पैसे के भुगतान के लिए चेक क्लियर करके पंजाब एंड सिंध बैंक को धोखा देने का आरोप है।
आरोप पत्र दाखिल होने के 13 साल बाद 28 मई, 2001 को तीस हजारी कोर्ट के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट जेपीएस मलिक ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 477 ए (खातों में हेराफेरी) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय किए। 2001 से 2019 के बीच इस मामले की प्रगति के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस ने तीस हजारी कोर्ट का दौरा किया, जहां उस समय यह मामला चल रहा था लेकिन केस रिकॉर्ड नहीं मिल सका।
बैंक फ्रॉड केस: चार आरोपियों में से दो की मौत
जुलाई 2019 में यह मामला राउज एवेन्यू कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। पिछले 6 साल से त्यागी समेत चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। चार आरोपियों में से दो सुभाष गर्ग और आरके मल्होत्रा की मौत हो चुकी है। गर्ग की मौत राउज कोर्ट में केस आने से पहले हो गई थी, जबकि मल्होत्रा की मौत 19 अप्रैल, 2021 को हुई थी।
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आरोपी ने स्वीकार किया अपना गुनाह
29 जनवरी को 2025 एसके त्यागी जज दीपक कुमार की अदालत में वापस आए। उनके साथ उनके वकील एमएस अरोड़ा भी थे। त्यागी ने अपराध स्वीकार करने का मन बना लिया था। अदालत से नरम सजा की मांग करते हुए त्यागी ने कहा कि वे 78 वर्ष के हैं और उनके पास आय का कोई स्रोत नहीं है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि उनकी पत्नी, जिनकी आय पर वे निर्भर हैं, उन्हें पार्किंसंस रोग है। उन्होंने यह भी बताया कि बैंक से लिया गया पैसा वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) के रूप में बैंक को वापस कर दिया गया था। आरोपी त्यागी ने इस कृत्य के लिए पश्चाताप और भविष्य में इसे न दोहराने का आश्वासन भी दिया।
न्यायाधीश ने त्यागी को अपराधों में शामिल होने के लिए अदालत उठने तक की सजा सुनाते हुए कहा, “दोषी ने पश्चाताप करने की सच्ची इच्छा दिखाई है, इसलिए उसे सुधार के लिए उचित अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि वह देश का एक उपयोगी नागरिक बन सके। साथ ही, दोषी को ऐसी सजा दी जानी चाहिए जो अन्य समान विचारधारा वाले लोगों को अपराध की दुनिया में प्रवेश करने से हतोत्साहित करे।”
त्यागी पर प्रत्येक अपराध के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया
अदालत के उठने तक की सज़ा के तहत आरोपी व्यक्ति को अदालत के बंद होने तक हिरासत में रहना होता है। त्यागी पर प्रत्येक अपराध के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, मामले की शुरुआत में गिरफ्तारी के बाद त्यागी ने दो दिन न्यायिक हिरासत में बिताए थे।
दो आरोपियों की मौत हो चुकी है और एक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है इसलिए मुकदमा प्रभावी रूप से केवल एक व्यक्ति नीलू मल्होत्रा के खिलाफ लंबित है। हालांकि इससे कार्यवाही में आसानी हो सकती है लेकिन इससे मुकदमे की गति में तेजी नहीं आएगी।
