पर्वतीय समाज का मानना है ,पर्वतीय समाज के तिथि त्यौहार कब होंगे किस दिन होंगे इसको हमारे प्रखांड पंडित, ज्योतिषा चार्य,देव डांगर , पंचांग के अनुसार तय होते हैं,हम उन्हीं के निर्देशों व आदेशों का पालन करते हैं,हमारा प्रयास पंचांगों के अनुसार पूरे पहाड़ मैं यानी भाबर तराई पर्वतीय इलाकों मैं एक साथ एक ही दिन तिथि त्यौहार मनाए जाने का प्रयास रहता है,हमारे तिथि त्यौहार कब होंगे इसको हमारे कुल पुरोहित,पंचांग,देव डांगर,तय करते हैं,हम उसको ही मानते है,किसी को भी अधिकार नही है वह पर्वतीय समाज के लोगों की संस्कृति पर अपनी राय रखने का,हम पर्वतीय समाज के लोग एक जुट होकर अपने तिथि त्यौहार एक दिन ही मनाए,पर्वतीय संस्कृति से छेड़ छाड़ करने का किसी को कोई अधिकार नही है,समस्त पहाड़ी समाज के जागरुक जन,हुकम सिंह कुंवर,डॉक्टर केदार पलड़िया,कमल जोशी,मदन मोहन तिवारी,पंडित जगदीश जोशी,जगमोहन चिलवाल,पंडित भुवन तिवारी, डॉक्टर बालम सिंह बिष्ट,मनोज कुमार,पंकज कुमार,श्याम सिंह नेगी, प्रताप सिंह चौहान, प्रेम सिंह परिहार,पंडित किरन पांडे, भानु प्रताप सिंह, वसंत बल्लभ मिश्रा,चंद्र शेखर भट्ट, बृज मोहन सिजवाली,महेश कांडपाल, उमेश बेलवाल, योगेश कांडपाल, देवेंद्र कुमार,पंकज सुयाल, पृथ्वी पाल सिंह रावत,मोहन सिंह नेगी,दीपक थूवाल,रमेश जोशी, सुरेश कुमार, माधो सिंह देपा,हर्ष जलाल,बालम सिंह बर्गली, कैलाश जोशी,आदि लोग सामिल थे,
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