
शाह ने बिल पर चर्चा के दौरान कहा, “भारत कोई धर्मशाला नहीं है,” जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह नया कानून उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा जो देश में अवैध रूप से प्रवेश करते हैं या अशांति फैलाने की मंशा रखते हैं। आइए, इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों और इसके प्रभावों को विस्तार से समझते हैं।


प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)
अधिनियम का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
भारत पिछले कुछ वर्षों से अवैध आप्रवासन की समस्या से जूझ रहा है, खासकर रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के मामले में। ये लोग अक्सर नकली दस्तावेजों या बिना वैध कागजात के भारत में प्रवेश करते हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। अभी तक आप्रवासन से संबंधित नियम चार पुराने कानूनों – पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920; विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम, 1939; विदेशी अधिनियम, 1946; और आप्रवासन (वाहक दायित्व) अधिनियम, 2000 – के तहत संचालित होते आ रहे हैं। ये कानून स्वतंत्रता से पहले के हैं और वर्तमान समय की चुनौतियों से निपटने में अपर्याप्त साबित हुए हैं।
नया अधिनियम इन चारों कानूनों को एकसाथ जोड़कर एक आधुनिक, तकनीक-संचालित और सख्त आप्रवासन ढांचा तैयार करता है। इसका मुख्य उद्देश्य अवैध प्रवेश को रोकना, विदेशियों की गतिविधियों पर नजर रखना और देश को सुरक्षित रखते हुए वैध पर्यटन, व्यापार और शिक्षा को बढ़ावा देना है।
प्रमुख प्रावधान: अवैध प्रवेश पर सख्ती
वैध दस्तावेज अनिवार्य: इस कानून के तहत भारत में प्रवेश करने या रहने के लिए वैध पासपोर्ट और वीजा अनिवार्य होगा। बिना वैध दस्तावेजों के प्रवेश करने वालों को पांच साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
अवैध प्रवासियों पर कड़ा प्रहार: जो व्यक्ति बिना वैध दस्तावेजों के भारत में प्रवेश करते हैं या वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी रुकते हैं, उन्हें अवैध प्रवासी माना जाएगा। नए कानून के तहत, अवैध प्रवासियों को हिरासत में लेने, देश से निष्कासित करने (डिपोर्ट करने) और ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार अधिकारियों को दिया गया है। वीजा नियमों के उल्लंघन को छोटे और बड़े अपराधों में बांटा गया है, जिन पर अलग-अलग दंड लागू होंगे। छोटे अपराधों के लिए अधिकतम सजा भारत में फिर से प्रवेश पर 5 साल का प्रतिबंध होगी। गंभीर मामलों में डिपोर्टेशन, जेल और आजीवन ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान है। डिपोर्ट होने के बाद अवैध रूप से दोबारा प्रवेश करने की कोशिश करने पर 10 साल की जेल और आजीवन प्रतिबंध लगेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर प्रवेश से इनकार: सरकार को यह अधिकार होगा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माने जाने वाले किसी भी विदेशी को भारत में प्रवेश करने या रहने से रोक सके। यह एक बड़ा कदम है जो भारत को अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने में सशक्त बनाएगा।
प्रमाण का बोझ व्यक्ति पर: अब यह साबित करना विदेशी व्यक्ति की जिम्मेदारी होगी कि वह वैध रूप से भारत में है। पहले यह बोझ सरकार पर होता था, लेकिन अब “संदेह होने पर कार्रवाई” का रास्ता साफ हो गया है।
विदेशियों की निगरानी: अधिनियम में विदेशियों के आगमन, ठहरने और प्रस्थान की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम लागू करने की बात कही गई है। हवाई अड्डों, स्थलीय सीमाओं और पंजीकरण कार्यालयों को एकीकृत कर रीयल-टाइम सत्यापन संभव होगा।
वाहकों की जिम्मेदारी: अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस और शिपिंग कंपनियों को यात्रियों और चालक दल की जानकारी पहले से जमा करानी होगी। इससे अवैध प्रवेश की संभावना कम होगी।
विदेशियों को छह श्रेणियों में किया गया वर्गीकृत
नए अधिनियम में विदेशी नागरिकों को छह श्रेणियों में बांटा गया है:
- पर्यटक
- विद्यार्थी
- कुशल श्रमिक
- व्यवसायी आगंतुक
- शरणार्थी और शरण मांगने वाले
- अवैध प्रवासी
प्रत्येक श्रेणी के लिए विशेष वीजा नियम, प्रवास की अवधि और नवीनीकरण की शर्तें निर्धारित की गई हैं।
सरल वीजा प्रणाली और कड़ी सुरक्षा जांच
अधिनियम के अनुसार, भारत में दी जाने वाली वीजा श्रेणियों को पुनर्गठित किया गया है। उपलब्ध वीजा में पर्यटक, व्यवसाय, रोजगार, छात्र, चिकित्सा, शोध, धार्मिक, पत्रकार, शरणार्थी और ट्रांजिट वीजा शामिल हैं।
- वीजा आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन और दूतावासों के माध्यम से होगी।
- लंबी अवधि के वीजा के लिए बायोमेट्रिक डेटा (फिंगरप्रिंट व फेस स्कैन) अनिवार्य होगा।
- सभी आवेदकों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की जाएगी।
- उच्च जोखिम वाले आवेदकों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा मंजूरी की आवश्यकता होगी।पंजीकरण और प्रवास के सख्त नियम
- भारत में 180 दिनों से अधिक ठहरने वाले विदेशी नागरिकों को 14 दिनों के भीतर FRRO (विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय) में पंजीकरण कराना होगा।
- पते, नौकरी या विश्वविद्यालय बदलने पर इसकी सूचना अनिवार्य रूप से देनी होगी।
- पर्यटकों और छात्रों को भारत में नौकरी करने की अनुमति नहीं होगी।
- व्यापार वीजा धारकों को भारत में वेतनभोगी रोजगार स्वीकार करने की अनुमति नहीं होगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर कड़े प्रावधान
अगर कोई विदेशी नागरिक भारतीय कानूनों का उल्लंघन करता है, जालसाजी करता है, आतंकवाद से जुड़े मामलों में संलिप्त पाया जाता है, या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनता है, तो उसका वीजा तत्काल रद्द कर दिया जाएगा और उसे देश से निष्कासित कर दिया जाएगा।
भारत को ‘धर्मशाला’ बनने से रोकने की रणनीति
अमित शाह ने अपने भाषण में कहा कि भारत में व्यापार, शिक्षा और शोध के लिए आने वालों का स्वागत होगा, लेकिन गलत उद्देश्य से और अशांति फैलाने के मंसूबे के साथ भारत में दाखिल होने वालों से कठोरता से निपटा जाएगा। उन्होंने कहा, “जो लोग देश के लिए खतरा बनकर आते हैं, चाहे वे रोहिंग्या हों या बांग्लादेशी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।” यह बयान भारत की नई नीति को स्पष्ट करता है कि देश अब उन लोगों के लिए खुला मैदान नहीं रहेगा जो व्यक्तिगत लाभ के लिए अवैध रूप से यहां शरण लेते हैं।
पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अवैध घुसपैठ एक बड़ी समस्या रही है। शाह ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर 450 किलोमीटर की बाड़बंदी अभी तक पूरी नहीं हुई है क्योंकि राज्य सरकार ने जमीन उपलब्ध नहीं कराई। उन्होंने वादा किया कि अगले साल बंगाल में सरकार बनने के बाद यह काम पूरा होगा।
शरणार्थियों पर UN समझौते को दिखाया ठेंगा
गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को शरणार्थियों पर 1951 के संयुक्त राष्ट्र (UN) सम्मेलन पर भारत के हस्ताक्षर करने की संभावना को खारिज कर दिया। इस UN समझौते के सरकार को शरणार्थियों को लेना और उनके अधिकारों को मान्यता देना आवश्यक है। इसी को लेकर शाह ने कहा कि भारत कोई “धर्मशाला” नहीं है। उन्होंने कहा, ”हमारे देश में कौन आता है और कितने समय के लिए आता है, देश की सुरक्षा के लिए हमें यह जानने का अधिकार है।”
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कई बार लोग सवाल उठाते हैं कि शरणार्थी संबंधी अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए कि पांच हजार साल से प्रवासियों के बारे में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग रहा है और किसी शरणार्थी नीति की हमें जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ”भारत भू सांस्कृतिक देश है, भू राजनीतिक देश नहीं है…भारत का शरणार्थियों के प्रति एक इतिहास रहा है। पारसी भारत में आए। इजराइल से यहूदी भागे तो भारत में आ रहे हैं।”
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में छह पड़ोसी देशों के प्रताड़ित लोगों को भारत ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के माध्यम से शरण दी है। उन्होंने कहा, ”घुसपैठ करने वालों को रोकेंगे, नागरिकता उन्हें ही मिलेगी जिन्होंने पड़ोसी देशों में विभाजन की विभीषीका झेली है और अत्याचारों का सामना किया है।” उन्होंने कहा कि जो कानून तोड़ेंगे उन पर सरकार की कड़ी नजर होगी। शाह ने कहा कि जहां भारत प्रवासियों का स्वागत करता है, वहीं भारत से गए प्रवासियों ने दुनिया भर में भारत की समृद्ध विरासत को पहुंचाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि विश्व छोटा हो रहा है और पूरी दुनिया के अर्थतंत्र की सूची में भारत एक ‘ब्राइट स्पॉट’ बनकर उभरा है, एक विनिर्माण केंद्र बनकर उभरा है और ऐसे में देश में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी। उनका कहना था कि यदि विदेशों से लोग भारत के अर्थतंत्र को मजबूत करने, व्यापार करने, शिक्षा और शोध के लिए आते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा। गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यदि बांग्लादेशी और रोहिग्या अशांति फैलाने के लिए आते हैं तो फिर कठोरता से निपटा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रवासन नीति कठोरता और करुणा दोनों के भाव से बनाई गई है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
यह अधिनियम न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि वैध आप्रवासियों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाएगा। नए वीजा श्रेणियां जैसे “बिजनेस वीजा प्लस” और “स्टार्टअप वीजा” पेश की गई हैं, जो लंबी अवधि के व्यापारियों और उद्यमियों को आकर्षित करेंगी। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और यह वैश्विक व्यापार और नवाचार का केंद्र बन सकेगा।
हालांकि, विपक्ष ने इस कानून की कुछ धाराओं को “मनमाना” करार दिया है। उनका कहना है कि यह सरकार को असीमित अधिकार देता है, जिसका दुरुपयोग हो सकता है। विपक्षी सांसदों ने इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने की मांग की, लेकिन यह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।
